आलू की चटनी बनाने की विधि और इसका इतिहास

आलू की चटनी बनाने की विधि: भारतीय भोजन में चटनी का स्थान हमेशा से खास रहा है। चाहे वह हरी धनिया-पुदीना की चटनी हो, इमली की खट्टी-मीठी चटनी या फिर टमाटर-लहसुन की चटनी – हर भोजन के साथ इसका स्वाद भोजन की महत्ता को कई गुना बढ़ा देता है। इन्हीं में से एक बेहद अनोखी और कम चर्चित लेकिन बेहद स्वादिष्ट चटनी है – आलू की चटनी। यह चटनी खासकर उत्तराखंड और पहाड़ी क्षेत्रों में बेहद लोकप्रिय है।

आलू की चटनी बनाने की विधि
आलू की चटनी बनाने की विधि

आलू की चटनी का इतिहास:

आलू भारत का मूल फसल नहीं है। इसका जन्मस्थान दक्षिण अमेरिका (पेरू और बोलीविया) माना जाता है। 16वीं शताब्दी में जब पुर्तगाली भारत आए, तब उन्होंने आलू को यहाँ लाकर रोपित किया। धीरे-धीरे यह भारतीय भोजन का अहम हिस्सा बन गया।

उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में आलू 18वीं शताब्दी में अधिक मात्रा में उगना शुरू हुआ। वहाँ की पहाड़ी जलवायु आलू के लिए अनुकूल थी। चूँकि पहाड़ी लोग पारंपरिक रूप से मसालेदार, झटपट बनने वाले और कम सामग्री से बनने वाले व्यंजनों को पसंद करते थे, इसलिए आलू को उन्होंने सिर्फ सब्ज़ी या पराठों में ही नहीं बल्कि चटनी के रूप में भी प्रयोग करना शुरू किया।

पहाड़ों में ताजे हरे पत्ते (जैसे धनिया, पुदीना) हमेशा उपलब्ध नहीं रहते थे, इसलिए स्थानीय लोगों ने उबले आलू को मसालों के साथ पीसकर चटनी बनाने की परंपरा शुरू की। धीरे-धीरे यह उत्तराखंड, हिमाचल और नेपाल के कई हिस्सों में लोकप्रिय हो गई। इसे खासतौर पर मंडुवा (रागी) की रोटी, गहत की दाल या चावल के साथ खाया जाता है।

आलू की चटनी बनाने की सामग्री:

आलू की चटनी बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। यह आसान, स्वादिष्ट और तुरंत बनने वाली रेसिपी है।

आवश्यक सामग्री (4 लोगों के लिए):
  • उबले हुए आलू – 2 मध्यम आकार

  • हरी मिर्च – 2 से 3

  • लहसुन की कलियाँ – 4 से 5

  • नमक – स्वादानुसार

  • नींबू का रस – 1 छोटा चम्मच

  • हरा धनिया (वैकल्पिक) – थोड़ी मात्रा

  • सरसों का तेल/घी – 1 छोटा चम्मच (स्वाद बढ़ाने के लिए)

आलू की चटनी बनाने की विधि:

  1. आलू उबालें – सबसे पहले आलू को उबालकर छील लें और हल्का ठंडा होने दें।

  2. मसाले तैयार करें – हरी मिर्च और लहसुन को मोटा-मोटा काट लें।

  3. पीसना या कूटना – परंपरागत रूप से इसे सिल-बट्टे या ओखली-मूसल पर कूटा जाता है, ताकि इसमें देसी स्वाद और खुशबू बनी रहे। आप चाहें तो मिक्सर का उपयोग भी कर सकते हैं।

  4. सभी सामग्री मिलाएँ – उबले आलू, हरी मिर्च, लहसुन और नमक डालकर अच्छे से कूटें या पीसें।

  5. नींबू का रस डालें – अब इसमें नींबू का रस डालकर हल्का खट्टापन लाएँ।

  6. तेल या घी डालें – अंत में थोड़ा सा सरसों का तेल या देसी घी डालकर अच्छे से मिलाएँ।

  7. परोसें – आपकी आलू की चटनी तैयार है। इसे गरमागरम रोटी, पराठा, मंडुवे की रोटी या चावल-दाल के साथ परोसें।

आलू की चटनी की विशेषताएँ:

  • यह चटनी बहुत जल्दी बन जाती है और ज्यादा सामग्री की आवश्यकता नहीं होती।

  • स्वाद में यह तीखी, चटपटी और हल्की खट्टी होती है।

  • पहाड़ी क्षेत्रों में इसे अक्सर मुख्य भोजन के साथ परोसा जाता है, खासकर जब हरी चटनी की सामग्री उपलब्ध न हो।

  • आलू की वजह से यह चटनी पेट भरने वाली और पौष्टिक भी होती है।

पौष्टिकता:

आलू में विटामिन C, पोटैशियम और कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होते हैं। जब इसे लहसुन और हरी मिर्च के साथ मिलाया जाता है तो यह स्वाद के साथ-साथ पाचन के लिए भी फायदेमंद हो जाती है। नींबू इसमें विटामिन C जोड़ देता है और सरसों का तेल रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

आलू की चटनी का सांस्कृतिक महत्व:

आलू की चटनी सिर्फ एक व्यंजन नहीं है बल्कि पहाड़ी संस्कृति और परंपरा की झलक है। उत्तराखंड में जब भी लोग खेतों या जंगलों में काम पर जाते थे, तो वे रोटी के साथ आलू की चटनी बाँधकर ले जाते थे। यह हल्का भी होता था और तृप्त करने वाला भी। त्योहारों और मेलों में भी यह खास व्यंजन के रूप में परोसा जाता रहा है।

आलू की चटनी साधारण दिखने वाला परंतु बेहद खास व्यंजन है। यह न केवल पहाड़ी जीवनशैली और परंपरा की निशानी है बल्कि भारतीय भोजन की विविधता को भी दर्शाती है। जब आपके पास ज्यादा सामग्री न हो और कुछ चटपटा खाने का मन हो, तो आलू की चटनी एकदम सही विकल्प है।

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