Rajma Gogji राजमा गोगजी: कश्मीर की पाक-परंपरा में कई ऐसे व्यंजन मिलते हैं जो स्थानीय जलवायु, फसलों और सांस्कृतिक आदतों के आधार पर विकसित हुए हैं। उन्हीं में से एक है “राजमा गोगजी”, यानी राजमा और शलगम (गोगजी कश्मीरी भाषा में शलगम को कहते हैं) से बना व्यंजन। यह डिश स्वाद, पोषण और परंपरा—तीनों का अद्भुत मेल है।

इतिहास और पृष्ठभूमि:
कश्मीर की भौगोलिक परिस्थितियाँ ठंडी हैं और वहाँ की खेती में राजमा, नादरू (कमल ककड़ी), मूली, और शलगम जैसी फसलें आसानी से पाई जाती हैं। शलगम खासकर सर्दियों की मुख्य सब्ज़ी है। पुराने समय में कश्मीर घाटी के किसान शीत ऋतु में राजमा और शलगम को साथ मिलाकर पकाते थे ताकि शरीर को ताक़त और गर्माहट मिल सके।
कहा जाता है कि यह व्यंजन 18वीं शताब्दी में वहाँ के गाँवों में लोकप्रिय हुआ। जब सर्दियों में बर्फबारी होती थी और हरी सब्ज़ियाँ उपलब्ध नहीं होती थीं, तब राजमा और शलगम ही ऊर्जा और पोषण का प्रमुख स्रोत बनते थे। धीरे-धीरे यह डिश कश्मीरी पंडित और मुस्लिम दोनों समुदायों में खास जगह बनाने लगी।
आज भी सर्दियों में जब घाटी में बर्फ गिरती है, तो कश्मीरी घरों की रसोई में राजमा गोगजी ज़रूर पकती है। यह न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन है बल्कि इसमें मौजूद फाइबर, प्रोटीन और मिनरल्स शरीर को मजबूती देते हैं।
आवश्यक सामग्री (4 लोगों के लिए)
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राजमा – 1 कप (पहले से रातभर भिगोया हुआ)
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शलगम (गोगजी) – 3-4 मध्यम आकार के, छीलकर टुकड़ों में कटे हुए
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प्याज़ – 2 मध्यम आकार के (बारीक कटा हुआ)
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अदरक-लहसुन पेस्ट – 1 बड़ा चम्मच
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टमाटर – 2 मध्यम (प्यूरी बना लें)
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हरी मिर्च – 2 (लंबाई में कटी हुई)
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हल्दी पाउडर – ½ छोटा चम्मच
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लाल मिर्च पाउडर – 1 छोटा चम्मच (कश्मीरी लाल मिर्च बेहतर होगी)
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धनिया पाउडर – 1 छोटा चम्मच
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गरम मसाला – ½ छोटा चम्मच
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सौंफ पाउडर – 1 छोटा चम्मच (कश्मीरी स्वाद के लिए)
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नमक – स्वादानुसार
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सरसों का तेल – 3 बड़े चम्मच
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हरा धनिया – सजावट के लिए
बनाने की विधि:
1. राजमा उबालना
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राजमा को रातभर भिगो दें।
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प्रेशर कुकर में नमक और पानी डालकर 4-5 सीटी में मुलायम होने तक उबाल लें।
2. शलगम तैयार करना
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शलगम को छीलकर मध्यम आकार के टुकड़ों में काट लें।
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हल्का सा नमक और हल्दी लगाकर इन्हें तेल में सुनहरा होने तक तल लें। इससे इनका स्वाद बढ़ जाता है।
3. मसाला बनाना
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कढ़ाई में सरसों का तेल गरम करें और इसे धुआँ निकलने तक गर्माकर ठंडा होने दें (कश्मीरी व्यंजनों में तेल को इस तरह प्रयोग किया जाता है)।
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इसमें प्याज़ डालकर सुनहरा भूरा होने तक भूनें।
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अदरक-लहसुन पेस्ट डालकर खुशबू आने तक पकाएँ।
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टमाटर प्यूरी, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और सौंफ पाउडर डालकर तेल छोड़ने तक भूनें।
4. राजमा और शलगम मिलाना
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अब उबला हुआ राजमा और तले हुए शलगम डालें।
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आवश्यकतानुसार पानी डालकर धीमी आँच पर 15-20 मिनट पकाएँ ताकि दोनों का स्वाद एक-दूसरे में अच्छे से घुल जाए।
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आखिर में गरम मसाला और हरी मिर्च डाल दें।
5. परोसना
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ऊपर से हरा धनिया छिड़ककर गरमा-गरम परोसें।
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इसे गर्म चावल या फिर ताज़ी रोटी के साथ खाना सबसे अच्छा माना जाता है।
पोषण और लाभ:
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राजमा प्रोटीन और फाइबर का बेहतरीन स्रोत है, जो शरीर को ऊर्जा देता है।
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शलगम में विटामिन C, कैल्शियम और पोटैशियम भरपूर मात्रा में होता है। यह पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करता है।
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सरसों के तेल और कश्मीरी मसाले शरीर को ठंड से बचाने के लिए गर्माहट प्रदान करते हैं।
सांस्कृतिक महत्व:
कश्मीर में जब परिवार सर्दियों की ठंडी शामों में अंगीठी (कांगड़ी) के पास बैठता है, तो राजमा गोगजी जैसी डिश उस माहौल को और भी खास बना देती है। यह सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि पारिवारिक जुड़ाव और परंपरा की निशानी है।
आज भी जो लोग कश्मीर से बाहर रहते हैं, वे जब यह डिश बनाते हैं तो उन्हें अपने घर-आँगन, बर्फ से ढकी वादियों और वहाँ की यादों का अहसास होता है।
राजमा गोगजी सिर्फ एक व्यंजन नहीं बल्कि कश्मीर की सर्दियों, वहाँ के जीवन और परंपरा का प्रतीक है। इसका स्वाद सरल है, लेकिन इसमें वह गहराई है जो पीढ़ियों से कश्मीरी खानपान को खास बनाती आई है। जब आप इसे अपने घर पर बनाएँगे, तो आपको भी ऐसा लगेगा जैसे आप कश्मीर की वादियों में बैठकर गरमा-गरम भोजन का आनंद ले रहे हों।
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