CP Radhakrishnan: NDA ने किया बड़ा ऐलान, सीपी राधाकृष्णन होंगे उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार

CP Radhakrishnan: भारतीय राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने देश के उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने साझा उम्मीदवार के रूप में सीपी राधाकृष्णन का नाम घोषित किया है। यह फैसला बीजेपी संसदीय बोर्ड की अहम बैठक में लिया गया। बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा कि सभी सहयोगी दलों की सहमति से यह नाम तय किया गया है।

सीपी राधाकृष्णन वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। इससे पहले वे झारखंड के राज्यपाल भी रह चुके हैं। उनका राजनीतिक करियर चार दशकों से ज्यादा लंबा रहा है और वे दक्षिण भारत में बीजेपी का एक मजबूत और विश्वसनीय चेहरा माने जाते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला

उपराष्ट्रपति का चुनाव हमेशा से राजनीतिक रूप से अहम होता है। यह पद न सिर्फ राज्यसभा का सभापति होता है बल्कि देश के संवैधानिक ढांचे में दूसरी सबसे ऊँची कुर्सी मानी जाती है।

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद यह पद रिक्त हुआ। ऐसे समय में NDA का यह कदम रणनीतिक भी है और राजनीतिक रूप से दूरगामी असर डालने वाला भी। बीजेपी और एनडीए चाहते थे कि ऐसा चेहरा लाया जाए जो साफ-सुथरी छवि वाला हो, सभी राज्यों को प्रतिनिधित्व दे सके और खासकर दक्षिण भारत में पार्टी की पैठ को मजबूत कर सके।

सीपी राधाकृष्णन कौन हैं?

CP Radhakrishnan

सीपी राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में हुआ। वे बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे और यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत हुई। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की और धीरे-धीरे संगठन और जनता के बीच अपनी पहचान बनाई।

राधाकृष्णन पेशे से कारोबारी परिवार से आते हैं, लेकिन उनका रुझान हमेशा राजनीति और समाज सेवा की तरफ रहा। वे दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और कई अहम संसदीय समितियों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।

राजनीतिक करियर और संसदीय योगदान

सीपी राधाकृष्णन को पहली बार बड़ा मौका तब मिला जब वे 1998 और 1999 में लगातार दो बार कोयंबटूर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। कोयंबटूर जैसी औद्योगिक और राजनीतिक रूप से अहम सीट से उनकी जीत ने उन्हें तमिलनाडु की राजनीति में स्थापित कर दिया।

अपने सांसद कार्यकाल में उन्होंने खासकर टेक्सटाइल इंडस्ट्री, शिक्षा, वित्त और आम जनता से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाया। उन्हें एक गंभीर और कामकाजी सांसद के रूप में याद किया जाता है।

2003 से 2006 तक वे बीजेपी तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान उन्होंने दक्षिण भारत में पार्टी के विस्तार के लिए लगातार मेहनत की।

राज्यपाल के रूप में कार्यकाल | CP Radhakrishnan

राधाकृष्णन को फरवरी 2023 में झारखंड का राज्यपाल बनाया गया। वहां उनके शांत और अनुशासित कार्यशैली की सराहना हुई। झारखंड के बाद मार्च 2024 में उन्हें तेलंगाना के राज्यपाल और साथ ही पुडुचेरी के उपराज्यपाल की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी मिली।

इसके बाद 31 जुलाई 2024 को उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। महाराष्ट्र जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में भी उन्होंने संतुलित ढंग से जिम्मेदारी निभाई। विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों के अटके मामलों को आगे बढ़ाना, राज्य और केंद्र के बीच समन्वय बनाना—ये उनके कामकाज की पहचान रही।

व्यक्तित्व और छवि

सीपी राधाकृष्णन को राजनीति में एक साफ-सुथरे और ईमानदार नेता के रूप में देखा जाता है। उनका व्यवहार संतुलित और विनम्र माना जाता है। दक्षिण भारत में उनकी जड़ें गहरी हैं और वे ओबीसी वर्ग से आते हैं, जिससे उनका सामाजिक आधार भी मजबूत माना जाता है।

उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में है जो न तो विवादों में रहते हैं और न ही सत्ता की राजनीति के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए जाने जाते हैं। यही कारण है कि बीजेपी और एनडीए ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए सबसे उपयुक्त माना।

NDA की रणनीति और दक्षिण भारत का समीकरण

बीजेपी लंबे समय से दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कर्नाटक में पार्टी ने बड़ी सफलता पाई, लेकिन तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में अभी भी उसे लंबा रास्ता तय करना है।

सीपी राधाकृष्णन जैसे तमिलनाडु से आने वाले वरिष्ठ और लोकप्रिय नेता को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने यह संदेश दिया है कि वह दक्षिण भारत की राजनीति को गंभीरता से ले रही है। इससे ओबीसी वर्ग और दक्षिण भारतीय समुदायों के बीच भी पार्टी की साख बढ़ेगी।

NDA सहयोगियों की प्रतिक्रिया

एनडीए के सभी सहयोगी दलों ने इस फैसले का स्वागत किया है। बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा कि यह नाम सर्वसम्मति से चुना गया है और सभी दलों ने इसका समर्थन किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि सीपी राधाकृष्णन का राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव उन्हें इस पद के लिए सबसे उपयुक्त बनाता है। वहीं, राधाकृष्णन ने खुद कहा कि यह उनके लिए सम्मान की बात है और वे देश के लिए अपनी अंतिम सांस तक मेहनत करते रहेंगे।

चुनाव प्रक्रिया और तारीखें

उपराष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त 2025 है और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 25 अगस्त 2025 रखी गई है। अगर मुकाबला हुआ तो मतदान 9 सितंबर 2025 को होगा।

फिलहाल यह साफ नहीं है कि विपक्ष अपना उम्मीदवार खड़ा करेगा या नहीं। अगर विपक्ष पीछे हटता है तो संभव है कि सीपी राधाकृष्णन निर्विरोध उपराष्ट्रपति चुने जाएं।

NDA का भरोसेमंद चेहरा

एनडीए का यह फैसला स्पष्ट रूप से दिखाता है कि गठबंधन राजनीति में संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व दोनों को महत्व दिया जा रहा है। सीपी राधाकृष्णन का नाम इस लिहाज से बिल्कुल फिट बैठता है।

वे अनुभवी हैं, साफ छवि रखते हैं और दक्षिण भारत में बीजेपी की साख को मजबूत करने की क्षमता रखते हैं। अगर वे उपराष्ट्रपति चुने जाते हैं तो निश्चित ही उनका कार्यकाल देश की संसदीय परंपराओं को और मजबूत करेगा।

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