पुतिन–ट्रंप मीटिंग के बाद Zelensky तैयार, बोले: स्थायी शांति ही असली समाधान

रूस और यूक्रेन के बीच लगभग तीन साल से जारी भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो गए, हजारों सैनिक और नागरिकों ने जान गंवाई और यूरोप की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा। इस बीच अब एक बड़ी ख़बर सामने आई है — यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर Zelensky ने ऐलान किया है कि वह युद्ध खत्म करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। लेकिन यह तैयारी किसी अस्थायी सीज़फायर के लिए नहीं, बल्कि एक ठोस और स्थायी शांति समझौते के लिए है।

यह बयान तब आया है जब अमेरिका के पूर्व और मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलास्का में मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद ट्रंप ने सीधे ज़ेलेंस्की को फोन कर बातचीत की और त्रिपक्षीय वार्ता का प्रस्ताव रखा, जिसे यूक्रेनी राष्ट्रपति ने भी समर्थन दिया।

अलास्का सम्मेलन: क्यों था खास?

अमेरिका के अलास्का में हाल ही में ट्रंप और पुतिन की ऐतिहासिक मुलाकात हुई। पूरी दुनिया की निगाहें इस बैठक पर टिकी थीं क्योंकि यह तय करना था कि क्या रूस-यूक्रेन युद्ध का कोई हल निकल पाएगा।

मुलाकात से पहले तक यह कयास लगाए जा रहे थे कि ट्रंप रूस पर दबाव बनाएंगे और यूक्रेन को तत्काल सीज़फायर का रास्ता देंगे। लेकिन बैठक के बाद तस्वीर बदल गई। ट्रंप ने कहा कि “सिर्फ सीज़फायर से युद्ध खत्म नहीं होगा, बल्कि स्थायी शांति समझौता ही इसका असली समाधान है।”

यानी अब अमेरिका भी वही मांग कर रहा है, जो रूस लंबे समय से करता आ रहा था। यही कारण है कि इस बयान ने वैश्विक राजनीति को झकझोर दिया।

Zelensky का बयान: यूक्रेन पूरी तरह तैयार

zelensky trump

ट्रंप से फोन पर हुई एक घंटे लंबी बातचीत के बाद ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट कर दिया कि यूक्रेन अब शांति की दिशा में ठोस कदम उठाने को तैयार है।

उनका कहना था —
“हमारी जनता शांति चाहती है। हम सीज़फायर जैसी अस्थायी व्यवस्था से आगे बढ़कर ऐसा समझौता चाहते हैं, जो स्थायी हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित हो।”

ज़ेलेंस्की ने आगे कहा कि इस प्रक्रिया में यूरोपीय नेताओं की भागीदारी बेहद जरूरी है। क्योंकि केवल अमेरिका और रूस पर भरोसा करना यूक्रेन के लिए जोखिम भरा हो सकता है। अगर यूरोपीय देश इसमें शामिल होते हैं तो यह समझौता न सिर्फ मज़बूत होगा बल्कि यूक्रेन की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

यूरोप की भूमिका क्यों अहम है?

यूरोप ने इस युद्ध की शुरुआत से ही यूक्रेन का साथ दिया है। हथियार, आर्थिक मदद और मानवीय सहायता — हर स्तर पर यूरोपीय देशों ने सहयोग किया है।

Zelensky का मानना है कि यदि केवल रूस और अमेरिका के बीच समझौता होता है तो यूक्रेन के हितों की पूरी तरह गारंटी नहीं मिलेगी। यूरोप को इस वार्ता में शामिल करना जरूरी है ताकि किसी भी समझौते को बहुपक्षीय समर्थन मिले और भविष्य में उसका उल्लंघन न हो।

इसके अलावा, यूरोप की अर्थव्यवस्था भी इस युद्ध से बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऊर्जा संकट, महंगाई और व्यापार में बाधाएं — इन सबका सीधा असर यूरोपीय देशों पर पड़ा। इसलिए यूरोप भी अब इस युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करना चाहता है।

ट्रंप–पुतिन मुलाकात

अलास्का में हुई इस बैठक की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

  1. सीज़फायर का विकल्प: पुतिन चाहते थे कि ट्रंप युद्धविराम की बजाय स्थायी शांति समझौते पर ध्यान दें। ट्रंप ने इसे स्वीकार किया।

  2. प्रतिबंधों पर बातचीत: रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में नरमी लाने की चर्चा भी हुई।

  3. नए शक्ति संतुलन: अमेरिका और रूस ने इस बात पर भी सहमति जताई कि यूरोप की सुरक्षा संरचना को नए सिरे से देखा जाए।

यानी साफ है कि यह बैठक रूस के लिए कूटनीतिक जीत साबित हुई।

यूक्रेन की स्थिति: लगातार संघर्ष

Zelensky के बयान के बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि यूक्रेन अब भी भारी नुकसान झेल रहा है। रूस की आक्रामक रणनीति और यूक्रेन की थकी हुई सेना — दोनों ने युद्ध को असमान बना दिया है।

यूक्रेन के कई शहर खंडहर में बदल चुके हैं। लाखों लोग शरणार्थी बनकर पोलैंड, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों में बस गए हैं। देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

ऐसे में ज़ेलेंस्की का यह बयान स्वाभाविक है कि अब सिर्फ युद्ध रोकना काफी नहीं, बल्कि एक स्थायी और ग्लोबल गारंटी वाला समझौता जरूरी है।

क्या होगा आगे?

अब पूरी दुनिया की नज़रें वॉशिंगटन पर हैं। सोमवार को ज़ेलेंस्की अमेरिका जाएंगे और ट्रंप से मुलाकात करेंगे। यदि यह मुलाकात सफल रही तो अगला कदम होगा — पुतिन के साथ औपचारिक शांति वार्ता।

अगर यह वार्ता सफल होती है, तो यह न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया के लिए राहत की सांस होगी। ऊर्जा संकट कम होगा, व्यापार सामान्य होगा और लाखों लोगों की जान बचाई जा सकेगी।

विश्लेषण: क्यों मायने रखता है यह पल?

  1. यह पहली बार है जब ज़ेलेंस्की ने सार्वजनिक रूप से माना है कि यूक्रेन किसी स्थायी समझौते के लिए तैयार है।
  2. ट्रंप का रुख बदलना बताता है कि अमेरिका अब रूस के साथ टकराव की बजाय समझौते की ओर झुक रहा है।
  3. यूरोप की भागीदारी इस शांति प्रक्रिया को मज़बूत और टिकाऊ बना सकती है।

एक नई शुरुआत की ओर

यूक्रेन युद्ध ने जिस तरह लाखों जिंदगियों को तबाह किया है, उसके बाद यह नई पहल उम्मीद की किरण लेकर आई है। अगर ट्रंप–पुतिन–Zelensky के बीच त्रिपक्षीय समझौता होता है और यूरोप इसमें शामिल होता है, तो यह 21वीं सदी का सबसे बड़ा शांति समझौता साबित हो सकता है।

यह सिर्फ यूक्रेन और रूस की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की जीत होगी।

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