L Ganesan Passed Away: नागालैंड के राज्यपाल एल. गणेशन का निधन, 80 साल की उम्र में अलविदा, राष्ट्रपति और पीएम समेत देशभर ने जताया शोक

L Ganesan Passed Away: 15 अगस्त 2025 की शाम देश को एक बड़ी और दुखद खबर मिली। नागालैंड के राज्यपाल और वरिष्ठ भाजपा नेता एल. गणेशन का चेन्नई के अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। वह 80 वर्ष के थे। उनके निधन से न केवल भाजपा बल्कि पूरे राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

एल. गणेशन का जीवन एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर राज्यपाल बनने तक की प्रेरणादायक यात्रा है। उन्होंने अपना पूरा जीवन जनसेवा और राष्ट्र निर्माण को समर्पित कर दिया था।

अचानक बिगड़ी सेहत और अस्पताल में निधन | L Ganesan Passed Away

L Ganesan Passed Away

कुछ दिन पहले चेन्नई स्थित घर पर एल. गणेशन अचानक बेहोश होकर गिर पड़े थे, जिससे उन्हें सिर में गंभीर चोट लगी। तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन और गहन इलाज की कोशिश की, लेकिन उनकी हालत लगातार नाजुक बनी रही। अंततः 15 अगस्त की शाम 6:23 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनके निधन के साथ ही एक ऐसे व्यक्ति का सफर समाप्त हुआ, जिसने चार दशकों से अधिक समय तक भारतीय राजनीति और समाज सेवा में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया शोक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि एल. गणेशन का निधन राष्ट्र के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने राज्यसभा सदस्य और विभिन्न राज्यों के राज्यपाल के रूप में सेवा देते हुए हमेशा जनता के कल्याण को प्राथमिकता दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में लिखा कि गणेशन एक सच्चे राष्ट्रवादी थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन सेवा और संगठन को समर्पित कर दिया। उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा का विस्तार करने में बड़ी भूमिका निभाई और तमिल संस्कृति से गहरा लगाव रखा।

गृह मंत्री और अन्य नेताओं की श्रद्धांजलि

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि गणेशन का योगदान आपातकाल के दौर से ही अमूल्य रहा है। वह हमेशा पार्टी के विस्तार और विचारधारा के प्रसार के लिए समर्पित रहे।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने उन्हें जनता के कल्याण के लिए समर्पित नेता बताया और नितिन गडकरी ने कहा कि गणेशन ने जनसेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताया और उन्हें तमिल समाज और राजनीति का सम्माननीय चेहरा बताया।

शुरुआती जीवन और आरएसएस से जुड़ाव

एल. गणेशन का जन्म 16 फरवरी 1945 को तमिलनाडु के तंजावुर जिले में हुआ था। साधारण परिवार से आने वाले गणेशन ने अपनी सामाजिक यात्रा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से शुरू की। संगठनात्मक क्षमता और समर्पण की वजह से वह जल्दी ही भाजपा में एक प्रमुख चेहरा बन गए।

भाजपा में उन्होंने प्रदेश संगठन महासचिव, प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय सचिव और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे कई अहम पद संभाले। उनके नेतृत्व में तमिलनाडु में भाजपा का संगठन मज़बूत हुआ।

राज्यसभा और राज्यपाल का सफर

एल. गणेशन राज्यसभा के सदस्य भी रहे, जहाँ उन्होंने मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। उनकी सादगी और स्पष्टवादिता उन्हें हमेशा अलग पहचान दिलाती रही।

बाद में उन्हें मणिपुर और पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया। 2023 में उन्हें नागालैंड का राज्यपाल बनाया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने हमेशा संवाद, सहयोग और जनता की भलाई को प्राथमिकता दी।

साहित्य और समाज से लगाव

एल. गणेशन केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति से भी गहरा रिश्ता रखते थे। उन्होंने “ओर नाडु” नामक एक प्रकाशन का संपादन किया और “पोट्रामराई” नाम की साहित्यिक संस्था की स्थापना की। इस तरह उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उनका व्यक्तित्व और कार्यशैली

गणेशन का व्यक्तित्व सरल, अनुशासित और सौम्य था। उन्हें हर वर्ग का सम्मान प्राप्त था। विरोधी दलों के नेताओं से भी उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे थे। यही कारण है कि उनके निधन पर सभी राजनीतिक दलों से श्रद्धांजलि के संदेश आए।

अंतिम विदाई और देश की भावनाएँ

चेन्नई में उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहाँ हजारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। भाजपा कार्यकर्ताओं से लेकर आम नागरिकों तक, हर कोई इस बात को मान रहा था कि उन्होंने अपना जीवन दूसरों के लिए जिया।

देश के लिए उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उन्होंने हमें यह सिखाया कि राजनीति केवल सत्ता तक पहुँचने का साधन नहीं, बल्कि जनता की सेवा और राष्ट्र निर्माण का मार्ग है।

निष्कर्ष

एल. गणेशन का निधन भारतीय राजनीति और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। एक ऐसे नेता, जिन्होंने अपना जीवन सादगी, सेवा और संगठन को समर्पित किया, आज हमारे बीच नहीं रहे। लेकिन उनकी स्मृति, उनके विचार और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

उनकी कहानी हमें यह याद दिलाती है कि सच्चा नेता वही है जो अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर जनता और देश को प्राथमिकता देता है। एल. गणेशन हमेशा भारतीय राजनीति में एक आदर्श और प्रेरणा बने रहेंगे।

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