UPSC New Rules Hindi: अब दिव्यांग उम्मीदवारों को मिलेगा मनचाहा परीक्षा केंद्र

UPSC New Rules Hindi: संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC ने सिविल सेवा परीक्षा को और अधिक समावेशी और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। आयोग ने परीक्षा केंद्रों के आवंटन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिसका सबसे बड़ा लाभ दिव्यांग उम्मीदवारों यानी PwBD (Persons with Benchmark Disabilities) को मिलने वाला है। लंबे समय से यह शिकायत सामने आ रही थी कि पसंदीदा परीक्षा केंद्रों की क्षमता जल्दी भर जाने के कारण PwBD उम्मीदवारों को दूर-दराज के केंद्रों पर परीक्षा देनी पड़ती है। अब UPSC के नए नियमों के बाद यह समस्या लगभग खत्म होने वाली है।

यह बदलाव सिर्फ एक तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि UPSC अब परीक्षा प्रक्रिया को केवल प्रतिस्पर्धी ही नहीं, बल्कि मानवीय और समान अवसरों वाला भी बनाना चाहता है। नए सिस्टम में दिव्यांग उम्मीदवारों की जरूरतों को केंद्र में रखा गया है, जिससे उन्हें मानसिक, शारीरिक और लॉजिस्टिक स्तर पर राहत मिलेगी।

क्या थी पहले की व्यवस्था? UPSC New Rules Hindi

UPSC New Rules Hindi

अब तक UPSC में परीक्षा केंद्र आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह क्षमता आधारित थी। जैसे ही किसी परीक्षा केंद्र की तय सीटें भर जाती थीं, वह केंद्र सभी उम्मीदवारों के लिए बंद हो जाता था। इसमें PwBD और सामान्य उम्मीदवारों के बीच कोई अलग व्यवस्था नहीं थी। नतीजा यह होता था कि दिल्ली, पटना, लखनऊ, कटक जैसे हाई डिमांड वाले शहर बहुत जल्दी भर जाते थे।

इसका सबसे ज्यादा नुकसान दिव्यांग उम्मीदवारों को उठाना पड़ता था। उन्हें मजबूरी में ऐसे शहर चुनने पड़ते थे, जहां तक पहुंचना मुश्किल होता था। यात्रा में ज्यादा समय, ज्यादा खर्च और शारीरिक असुविधा उनके लिए परीक्षा से पहले ही एक बड़ी चुनौती बन जाती थी। कई बार यह भी देखा गया कि परीक्षा से पहले का तनाव सिर्फ पढ़ाई का नहीं, बल्कि यात्रा और केंद्र की चिंता का ज्यादा होता था।

नए नियमों की सोच और उद्देश्य

UPSC अध्यक्ष अजय कुमार के अनुसार, आयोग ने पिछले पांच वर्षों के डेटा का गहराई से अध्ययन किया। इस विश्लेषण में साफ दिखा कि कुछ चुनिंदा केंद्रों पर हर साल असाधारण संख्या में आवेदन आते हैं और वे बहुत जल्दी भर जाते हैं। इसी दौरान यह भी सामने आया कि PwBD उम्मीदवारों को इन केंद्रों से वंचित होना पड़ता है।

नए नियमों का मूल उद्देश्य यही है कि दिव्यांग उम्मीदवारों को उनकी पसंद के परीक्षा केंद्र से वंचित न होना पड़े। आयोग चाहता है कि परीक्षा का अनुभव उनके लिए आसान, सम्मानजनक और बिना किसी अतिरिक्त बाधा के हो।

Capacity Cap हटाने का मतलब क्या है?

UPSC के नए परीक्षा केंद्र आवंटन ढांचे की सबसे बड़ी खासियत है ‘Capacity Cap’ यानी क्षमता सीमा को हटाना। अब सिस्टम ऐसा होगा कि किसी भी परीक्षा केंद्र की सामान्य क्षमता पूरी हो जाने के बाद वह केंद्र गैर-PwBD उम्मीदवारों के लिए बंद हो जाएगा, लेकिन PwBD उम्मीदवारों के लिए खुला रहेगा।

इसका सीधा सा मतलब यह है कि अगर दिल्ली जैसे किसी केंद्र की सारी सामान्य सीटें भर भी जाती हैं, तब भी कोई PwBD उम्मीदवार उस केंद्र को चुन सकता है। जरूरत पड़ने पर UPSC वहां अतिरिक्त संसाधन, अतिरिक्त कक्ष या अन्य व्यवस्थाएं करेगा, ताकि दिव्यांग उम्मीदवार को किसी और शहर में न जाना पड़े।

पसंदीदा परीक्षा केंद्र की शत-प्रतिशत गारंटी

UPSC प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा है कि नए रिवाइज्ड सिस्टम के तहत अब हर PwBD उम्मीदवार को उसके पसंदीदा परीक्षा केंद्र की गारंटी दी जाएगी। यह सिर्फ एक वादा नहीं है, बल्कि इसके लिए आयोग ने प्रशासनिक और लॉजिस्टिक स्तर पर पूरी तैयारी कर ली है।

जहां भी PwBD उम्मीदवारों की संख्या तय सीमा से ज्यादा होगी, वहां अतिरिक्त क्षमता विकसित की जाएगी। इसमें नए परीक्षा कक्ष, अतिरिक्त स्टाफ और जरूरी सुविधाएं शामिल होंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिव्यांग उम्मीदवारों को किसी भी स्थिति में समझौता न करना पड़े।

हाई डिमांड शहरों पर विशेष फोकस

दिल्ली, कटक, पटना और लखनऊ जैसे शहरों में हर साल हजारों उम्मीदवार परीक्षा देना चाहते हैं। ये शहर न सिर्फ शैक्षणिक रूप से मजबूत हैं, बल्कि यहां परिवहन और रहने की सुविधाएं भी बेहतर हैं। यही वजह है कि इन केंद्रों पर सबसे ज्यादा दबाव रहता है।

UPSC ने इन हाई डिमांड केंद्रों के लिए खास रणनीति बनाई है। एक तरफ PwBD उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त क्षमता सुनिश्चित की जा रही है, वहीं दूसरी ओर आसपास के शहरों को नए परीक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि कुल दबाव को संतुलित किया जा सके।

प्रारंभिक परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ी

UPSC ने सिर्फ नियमों में बदलाव नहीं किया, बल्कि भौतिक स्तर पर भी परीक्षा केंद्रों का दायरा बढ़ाया है। सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए केंद्रों की संख्या 80 से बढ़ाकर 83 कर दी गई है।

इसमें श्रीनगर, इंफाल और मेरठ को नए परीक्षा केंद्र के रूप में जोड़ा गया है। खासतौर पर मेरठ को दिल्ली-एनसीआर के दबाव को कम करने के उद्देश्य से शामिल किया गया है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के उम्मीदवारों को सीधा फायदा मिलेगा।

मुख्य परीक्षा केंद्रों में भी विस्तार

सिर्फ प्रारंभिक परीक्षा ही नहीं, बल्कि मुख्य परीक्षा के केंद्रों की संख्या में भी इजाफा किया गया है। पहले जहां मुख्य परीक्षा के लिए 24 केंद्र थे, अब उनकी संख्या बढ़ाकर 27 कर दी गई है।

भुवनेश्वर और इंफाल जैसे शहरों को मुख्य परीक्षा केंद्रों में शामिल किया गया है। इससे पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें पहले लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।

क्षेत्रीय दबाव कम करने की रणनीति

UPSC की यह पूरी कवायद सिर्फ संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक स्पष्ट क्षेत्रीय रणनीति है। मेरठ को दिल्ली के पास इसलिए जोड़ा गया ताकि दिल्ली-एनसीआर का बोझ कम हो सके। इसी तरह कानपुर को लखनऊ के विकल्प के तौर पर और भुवनेश्वर को कटक के सप्लीमेंट के रूप में विकसित किया गया है।

इस भौगोलिक विस्तार से उम्मीदवारों का यात्रा समय कम होगा, खर्च घटेगा और परीक्षा से पहले की थकान भी कम महसूस होगी। खासकर PwBD उम्मीदवारों के लिए यह बदलाव बेहद उपयोगी साबित होगा।

PwBD उम्मीदवारों के लिए मानसिक और शारीरिक राहत

नए नियमों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब PwBD उम्मीदवार परीक्षा से पहले ही कई तरह की चिंताओं से मुक्त रहेंगे। पसंदीदा केंद्र मिलने की गारंटी होने से उन्हें यह डर नहीं रहेगा कि आखिरी समय में उन्हें किसी दूर के शहर जाना पड़ेगा।

कम यात्रा, परिचित माहौल और बेहतर सुविधाएं उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएंगी। इससे वे परीक्षा पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे, न कि व्यवस्थाओं से जूझने पर।

UPSC की समावेशी सोच का संकेत

यह बदलाव UPSC की सोच में आए सकारात्मक परिवर्तन को भी दर्शाता है। आयोग अब यह समझ रहा है कि समान परीक्षा का मतलब सबके लिए एक जैसी परिस्थितियां नहीं होतीं। कुछ उम्मीदवारों को समान अवसर देने के लिए अतिरिक्त सहारे की जरूरत होती है।

PwBD उम्मीदवारों के लिए Capacity Cap हटाना इसी सोच का नतीजा है। यह कदम भविष्य में अन्य सुधारों का रास्ता भी खोल सकता है।

आवेदन प्रक्रिया में क्या ध्यान रखें PwBD उम्मीदवार

हालांकि नए नियम PwBD उम्मीदवारों के लिए बेहद फायदेमंद हैं, फिर भी आवेदन करते समय उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। सही श्रेणी का चयन, वैध दिव्यांग प्रमाण पत्र और समय पर आवेदन करना बेहद जरूरी है।

परीक्षा केंद्र का चयन करते समय अब उन्हें ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन फिर भी प्राथमिकता के अनुसार विकल्प भरना समझदारी होगी।

सामान्य उम्मीदवारों पर क्या असर पड़ेगा?

यह सवाल भी कई उम्मीदवारों के मन में है कि क्या इन बदलावों से सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को नुकसान होगा। UPSC ने इस पर साफ किया है कि सामान्य उम्मीदवारों के लिए मौजूदा क्षमता का पूरा उपयोग पहले किया जाएगा।

जब कोई केंद्र अपनी तय सीमा तक भर जाएगा, तब वह सामान्य उम्मीदवारों के लिए बंद होगा। यानी सामान्य उम्मीदवारों की प्रक्रिया पहले जैसी ही रहेगी, बस PwBD उम्मीदवारों को अतिरिक्त सुविधा दी जाएगी।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

शिक्षा विशेषज्ञों और कोचिंग संस्थानों ने UPSC के इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि यह बदलाव न सिर्फ दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए जरूरी था, बल्कि यह संविधान में दिए गए समान अवसर के सिद्धांत के भी अनुरूप है।

कई विशेषज्ञों का कहना है कि इससे PwBD उम्मीदवारों की भागीदारी और प्रदर्शन दोनों में सुधार देखने को मिलेगा।

भविष्य में और सुधारों की उम्मीद

UPSC का यह कदम एक मजबूत शुरुआत मानी जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में आयोग परीक्षा केंद्रों की सुविधाओं, तकनीकी सहायता और डिजिटल प्रक्रियाओं में भी PwBD उम्मीदवारों के लिए और सुधार करेगा।

अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो अन्य राष्ट्रीय परीक्षाएं भी इससे प्रेरणा ले सकती हैं।

UPSC द्वारा परीक्षा केंद्र आवंटन के नियमों में किया गया यह बदलाव दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। Capacity Cap हटाना, पसंदीदा केंद्र की गारंटी और नए केंद्रों का विस्तार, ये सभी कदम परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा न्यायपूर्ण बनाते हैं।

यह फैसला न सिर्फ प्रशासनिक रूप से मजबूत है, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी बेहद सराहनीय है। PwBD उम्मीदवारों के लिए अब सिविल सेवा परीक्षा का सफर थोड़ा आसान, थोड़ा सम्मानजनक और कहीं ज्यादा उम्मीदों से भरा हुआ होगा।

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