1 फरवरी की पूर्णिमा: 1 फरवरी को आसमान में चमकने वाली पूर्णिमा केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि भावनात्मक और आत्मिक स्तर पर एक बड़ा परिवर्तन लेकर आ रही है। फरवरी की पूर्णिमा को परंपरागत रूप से “स्नो मून” कहा जाता है और इस बार यह सिंह राशि में घटित हो रही है, जो इसे और भी शक्तिशाली बनाती है।
पूर्णिमा हमेशा किसी चक्र की पराकाष्ठा, परिणाम या विदाई का संकेत होती है। यह वह समय होता है जब दबाई गई भावनाएँ बाहर आती हैं, सच सामने आता है और हम उन चीज़ों को देख पाते हैं जिन्हें अब तक नज़रअंदाज़ कर रहे थे।

सिंह राशि की पूर्णिमा: पहचान, आत्मसम्मान और आत्म-अभिव्यक्ति
सिंह राशि रचनात्मकता, साहस, आत्मविश्वास और स्वयं को व्यक्त करने की प्रतीक है। इसलिए इस पूर्णिमा के दौरान सबसे ज़्यादा असर इन विषयों पर पड़ेगा:
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मैं वास्तव में कौन हूँ?
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क्या मैं दूसरों को खुश करने के लिए खुद को छोटा कर रहा हूँ?
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क्या मेरी असली इच्छाएँ दब गई हैं?
यह पूर्णिमा हमें सिखाती है कि खुद को छुपाना अब विकल्प नहीं है। चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, अब समय है खुद के पक्ष में खड़े होने का।
ड्रामा और खुलासों का समय:
सिंह ऊर्जा थोड़ी नाटकीय भी होती है। इसलिए इस पूर्णिमा के आसपास:
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कोई पुराना विवाद खुलकर सामने आ सकता है
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कोई दबा हुआ सच बाहर आ सकता है
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कोई रचनात्मक विचार अचानक आकार ले सकता है
ज़रूरी नहीं कि यह सब आपके भीतर ही हो—यह आपके आसपास के लोगों के ज़रिये भी घट सकता है, लेकिन उसका असर आप पर पड़ेगा।
क्यों है यह पूर्णिमा इतनी तीव्र?
इस पूर्णिमा से पहले के दिन ज्योतिषीय रूप से बेहद शक्तिशाली हैं।
सूर्य-प्लूटो और मंगल-प्लूटो जैसे योग गहरे परिवर्तन, शक्ति संघर्ष और अंदरूनी उथल-पुथल को दर्शाते हैं।
ऐसा महसूस हो सकता है जैसे कई दिनों से कुछ “पक” रहा था और 1 फरवरी की पूर्णिमा उस दबाव को रिलीज़ कर देती है।
इन राशियों पर सबसे ज़्यादा असर:
विशेष रूप से स्थिर राशियाँ (Fixed Signs) इस पूर्णिमा को तीव्रता से महसूस करेंगी:
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वृषभ (Taurus)
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सिंह (Leo)
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वृश्चिक (Scorpio)
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कुंभ (Aquarius)
इसके अलावा मेष और धनु जैसी अग्नि राशियाँ भी इस ऊर्जा से प्रभावित होंगी।
इन राशियों के लिए यह समय आत्म-छवि, पहचान, क्रिएटिविटी और पब्लिक इमेज में बड़ा बदलाव ला सकता है।
सिंह-कुंभ अक्ष: मैं और समाज
यह पूर्णिमा सिंह-कुंभ अक्ष को सक्रिय करती है, जो व्यक्ति और समाज के बीच संतुलन का प्रतीक है।
अब खुद से पूछिए:
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क्या मैं किसी समूह या विचारधारा में खुद को खो रहा हूँ?
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क्या मेरी व्यक्तिगत पहचान दब रही है?
यह पूर्णिमा याद दिलाती है कि किसी समूह से जुड़ने के लिए खुद को छोड़ना ज़रूरी नहीं।
आप जैसे हैं, वैसे रहकर भी आप कहीं belong कर सकते हैं- शायद किसी नए स्थान पर।
शुक्र ग्रह का संतुलन:
अच्छी खबर यह है कि इसी दिन सूर्य और शुक्र का संयोग भी बन रहा है।
यह ऊर्जा मेल-मिलाप, प्रेम, सौहार्द और समाधान लेकर आती है।
मतलब- जहाँ तनाव है, वहाँ दिल से बात करने पर हल निकल सकता है।
जुलाई 2025 से जुड़ा है यह चक्र:
अगर आप अपने जीवन के जुलाई 2025 के आख़िरी सप्ताह को याद करें, तो संभव है वही विषय अब दोबारा सामने आ रहे हों।
तब जो बीज बोए गए थे, अब उनका परिणाम या समापन हो रहा है।
इस पूर्णिमा में क्या करें?
खुद को दिखाएँ (Online & Offline)
अपना काम, विचार या क्रिएटिविटी दुनिया के सामने रखें।
अब “perfect timing” का इंतज़ार न करें।
डिजिटल सफ़ाई करें:
पुरानी चैट्स, नेगेटिव अकाउंट्स और बेकार ऐप्स हटाएँ।
क्लियर फोन = क्लियर माइंड
घर की सफ़ाई और डिक्लटरिंग:
जो चीज़ें अब काम की नहीं, उन्हें विदा करें।
नया तभी आएगा जब जगह बनेगी।
तारीफ़ दें और स्वीकार करें:
दूसरों की सराहना करें और जब कोई आपकी करे, तो बस कहें—धन्यवाद।
क्या न करें?
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दूसरों को खुश करने के लिए खुद को छोटा न करें
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क्रिएटिव आइडिया को टालें नहीं
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गुस्से या अहंकार में बड़े फैसले न लें
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हर भावना को ड्रामा न बनाएँ
असल शेर शांत होता है, ज़रूरी नहीं कि हमेशा दहाड़े।
1 फरवरी की सिंह पूर्णिमा सर्दियों से बसंत की ओर एक मानसिक और भावनात्मक दहलीज़ है।
यह समय है खुद को पहचानने, अपनाने और दुनिया के सामने आने का।
जो सच अब तक अंधेरे में था, वह अब रोशनी माँग रहा है।
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