Motivational Story in Hindi: नदी की तरह बहना सीखो!

Motivational Story in Hindi: ओशो का मानना था कि इंसान की ज़िंदगी में दुख इसलिए नहीं आते क्योंकि परिस्थितियां खराब होती हैं, बल्कि इसलिए आते हैं क्योंकि इंसान परिस्थितियों से लड़ता रहता है। वे कहते थे कि जीवन को समझाने के लिए बड़े उपदेशों से ज्यादा असर छोटी लेकिन गहरी कहानियों का होता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी ओशो ने सुनाई थी, जो हमें सिखाती है कि ज़िंदगी को कैसे सहजता और स्वीकार के साथ जिया जाए।

Motivational Story in Hindi नदी की तरह बहना सीखो!

Motivational Story in Hindi:

     ओशो अक्सर कहते थे कि इंसान दुखी इसलिए नहीं है क्योंकि उसकी ज़िंदगी में समस्याएं हैं, बल्कि इसलिए है क्योंकि वह समस्याओं से लड़ता रहता है। जीवन को समझाने के लिए वे सरल लेकिन गहरी कहानियों का सहारा लेते थे। ऐसी ही एक कहानी है, जो हमें सिखाती है कि ज़िंदगी को कैसे स्वीकार किया जाए।

एक बार एक युवक बहुत बेचैन मन से ओशो के पास आया। उसने कहा, “मैं बहुत कोशिश करता हूँ, मेहनत भी करता हूँ, लेकिन ज़िंदगी में सब कुछ उल्टा ही होता है। जितना आगे बढ़ता हूँ, उतनी रुकावटें आ जाती हैं। मैं थक गया हूँ।”

ओशो ने उसे देखा और बोले, “क्या तुमने कभी नदी को बहते देखा है?” युवक थोड़ा हैरान हुआ, फिर बोला, “हाँ, देखा है।” ओशो मुस्कुराए और बोले, “नदी से बड़ा कोई गुरु नहीं।”

ओशो ने कहानी शुरू की। उन्होंने कहा कि एक नदी पहाड़ों से निकलती है। रास्ते में उसे बड़े-बड़े पत्थर मिलते हैं, चट्टानें मिलती हैं, मोड़ आते हैं। अगर नदी हर पत्थर से लड़ने लगे और कहे कि ‘मैं यहीं से सीधा जाऊँगी’, तो वह कभी समुद्र तक नहीं पहुंच पाएगी। लेकिन नदी ऐसा नहीं करती। वह जहां रास्ता नहीं मिलता, वहां झुक जाती है, जहां बाधा आती है, वहां रुकने की बजाय बहना चुनती है

नदी न तो शिकायत करती है, न ही अपने रास्ते को लेकर दुखी होती है। वह बस बहती रहती है। कभी धीरे, कभी तेज़ — लेकिन रुकती नहीं।

ओशो ने युवक से कहा, “तुम ज़िंदगी को नदी की तरह नहीं जी रहे हो। तुम हर हालात से लड़ना चाहते हो, हर चीज़ अपने हिसाब से चाहते हो। इसी लड़ाई में तुम्हारी ऊर्जा खत्म हो जाती है।”

युवक चुप हो गया। ओशो ने आगे कहा, “ज़िंदगी का मतलब यह नहीं कि तुम्हारे सामने कभी पत्थर नहीं आएंगे। ज़िंदगी का मतलब है उनके साथ बहना सीखना। जो इंसान हर चीज़ को कंट्रोल करना चाहता है, वही सबसे ज्यादा दुखी होता है।”

ओशो बोले, “जब तुम बहाव को स्वीकार कर लेते हो, तब ज़िंदगी आसान हो जाती है। तब संघर्ष कम हो जाता है, और आनंद अपने आप आने लगता है।”

उस युवक को पहली बार महसूस हुआ कि उसकी थकान बाहर की दुनिया से नहीं, बल्कि उसकी ज़िद से पैदा हुई थी। वह हर हालात को बदलना चाहता था, जबकि ज़रूरत खुद को बदलने की थी।

ओशो कहते हैं कि जो व्यक्ति नदी की तरह बहना सीख लेता है, वह हारता नहीं है। वह हालात के साथ चलता है, उनसे सीखता है और धीरे-धीरे अपने लक्ष्य तक पहुंच जाता है। जीवन में शांति तब आती है, जब हम विरोध छोड़कर स्वीकार करना सीखते हैं।

                    ओशो की यह कहानी हमें सिखाती है कि ज़िंदगी में हर समस्या को जबरदस्ती बदलने की ज़रूरत नहीं होती। कुछ चीज़ों को स्वीकार कर लेना ही सबसे बड़ा समाधान होता है। जब हम नदी की तरह बहना सीख लेते हैं, तो रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं।

जीवन तब आसान हो जाता है, जब हम विरोध छोड़ देते हैं और समझ के साथ आगे बढ़ते हैं। ओशो कहते हैं कि जो इंसान परिस्थितियों के साथ बहना सीख लेता है, वह कभी हारता नहीं— क्योंकि वह टूटता नहीं, बल्कि हर मोड़ से कुछ नया सीख लेता है।

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