Siddhartha Bhaiya Founder and MD of Aequitas Passes Away at 47: भारतीय शेयर बाजार और निवेश जगत के लिए यह खबर बेहद दुखद और चौंकाने वाली है। Aequitas Investment Consultancy Pvt. Ltd. के संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ भैया का 47 वर्ष की उम्र में अचानक निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वे अपने परिवार के साथ विदेश यात्रा पर थे, तभी उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया। उनके अचानक जाने से न सिर्फ Aequitas बल्कि पूरा निवेश समुदाय शोक में डूब गया है।

सिद्धार्थ भैया को एक सफल निवेशक से कहीं ज्यादा, एक दूरदर्शी सोच रखने वाले फाइनेंशियल लीडर के तौर पर जाना जाता था। उन्होंने अपने अनुभव और विश्लेषण के दम पर हजारों निवेशकों का भरोसा जीता था और Aequitas को भारत की जानी-मानी निवेश सलाहकार कंपनियों में शामिल किया।
एक साधारण शुरुआत से असाधारण सफर तक:
सिद्धार्थ भैया का करियर इस बात का उदाहरण है कि सही सोच, अनुशासन और धैर्य से कोई भी व्यक्ति बड़ी पहचान बना सकता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री से की थी, जहां उन्होंने बतौर फंड मैनेजर काम किया। बाजार को गहराई से समझने की उनकी क्षमता शुरू से ही साफ दिखने लगी थी।
कुछ सालों तक बड़े संस्थानों में काम करने के बाद उन्होंने 2012 में Aequitas Investment Consultancy की नींव रखी। उनका उद्देश्य सिर्फ रिटर्न कमाना नहीं था, बल्कि निवेशकों के पैसे को समझदारी और जिम्मेदारी के साथ बढ़ाना था। यही सोच Aequitas की पहचान बनी।
“मल्टीबैगर हंटर” के नाम से मिली पहचान:
सिद्धार्थ भैया को बाजार में अक्सर “स्मॉलकैप मल्टीबैगर हंटर” कहा जाता था। इसका कारण यह था कि वे छोटी लेकिन मजबूत कंपनियों को पहचानने में माहिर थे। जब ज्यादातर निवेशक बड़ी और चर्चित कंपनियों के पीछे भागते थे, तब भैया ऐसे स्टॉक्स पर नजर रखते थे जिनमें लंबी अवधि में बड़ा दम होता था।
उनकी निवेश रणनीति शोर-शराबे से दूर और पूरी तरह रिसर्च आधारित होती थी। वे मानते थे कि बाजार में धैर्य सबसे बड़ा हथियार है। इसी सोच के चलते Aequitas के पोर्टफोलियो ने कई बार बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया।

Aequitas को बनाया भरोसे का नाम:
आज Aequitas हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति का प्रबंधन करती है और देश के बड़े निवेश प्लेटफॉर्म्स में गिनी जाती है। यह सफलता एक दिन में नहीं मिली। इसके पीछे सिद्धार्थ भैया की स्पष्ट रणनीति, जोखिम प्रबंधन और निवेशकों के साथ पारदर्शिता की बड़ी भूमिका रही।
वे हमेशा कहते थे कि निवेश सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि व्यवहार और अनुशासन की परीक्षा है। यही वजह थी कि वे बाजार के ऊंचे स्तर पर भी सतर्क रहते थे और जरूरत पड़ने पर नकदी बनाए रखने से नहीं हिचकिचाते थे।
बाजार को समझने का अलग नजरिया:
सिद्धार्थ भैया की सबसे बड़ी खासियत थी भीड़ से अलग सोच। जब बाजार तेजी में होता और ज्यादातर लोग बिना सोचे निवेश कर रहे होते, तब वे जोखिम को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते थे। वहीं, जब बाजार में डर का माहौल होता, तब वे अवसर तलाशते थे।
उनका मानना था कि हर तेजी खरीदने के लिए नहीं होती और हर गिरावट डरने के लिए नहीं। यही संतुलित नजरिया उन्हें बाकी निवेशकों से अलग बनाता था।
Deeply saddened by the passing of Siddharth Bhaiya @sidd1307
A visionary mentor who transformed how many of us approach investing. His wisdom and passion will remain an enduring inspiration. Rest in peace.His last interview 15-Dec-25 during Dezerv Wealth Summit @MoneycontrolH pic.twitter.com/k3UHBQhM3u
— Hituraj Sahu (@HiturajSahu) January 2, 2026
निवेशकों और साथियों के लिए प्रेरणा:
उनके निधन की खबर के बाद सोशल मीडिया और निवेश जगत में शोक संदेशों की बाढ़ आ गई। कई निवेशकों ने उन्हें एक ईमानदार, जमीन से जुड़े और सीख देने वाले इंसान के रूप में याद किया। उनके साथ काम कर चुके लोगों का कहना है कि वे सिर्फ बॉस नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक थे।
सिद्धार्थ भैया ने यह साबित किया कि सफलता सिर्फ पैसों से नहीं मापी जाती, बल्कि उस भरोसे से मापी जाती है जो लोग आप पर करते हैं।
एक अधूरी लेकिन यादगार कहानी:
सिर्फ 47 साल की उम्र में उनका जाना निवेश जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी सोच, उनकी रणनीतियां और उनके द्वारा बनाई गई संस्था आने वाले समय में भी निवेशकों को दिशा देती रहेगी।
सिद्धार्थ भैया की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो बाजार में लंबी सोच और ईमानदारी के साथ कुछ बड़ा करना चाहता है। उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
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