INSV Kaundinya Oman Visit: सोमवार, 29 दिसंबर 2025 का दिन भारतीय समुद्री इतिहास के लिए बेहद खास बन गया, जब भारतीय नौसेना का अनोखा जहाज INSV कौंडिन्य गुजरात के पोरबंदर बंदरगाह से ओमान के मस्कट के लिए रवाना हुआ। यह कोई आम जहाज नहीं है। इसमें न इंजन है, न स्टील की प्लेट, न ही एक भी लोहे की कील। फिर भी यह 1,400 किलोमीटर लंबा अंतरराष्ट्रीय समुद्री सफर केवल हवाओं और पालों के सहारे तय करेगा।
INSV कौंडिन्य केवल एक नौसैनिक प्रयोग नहीं, बल्कि भारत की 1,500 साल पुरानी समुद्री विरासत को फिर से जीवित करने की एक साहसिक कोशिश है। यह यात्रा दिखाती है कि भारत की ताकत सिर्फ आधुनिक युद्धपोतों में ही नहीं, बल्कि उस ज्ञान में भी है जिसने सदियों पहले महासागरों को भारत से जोड़ा था।
जब बिना इंजन के समंदर से होती है बात | INSV Kaundinya Oman Visit
कल्पना कीजिए ऊंची समुद्री लहरें, तेज मानसूनी हवाएं और उनके बीच आगे बढ़ता एक लकड़ी का जहाज, जो पूरी तरह हवा की दिशा पर निर्भर है। INSV कौंडिन्य को किसी आधुनिक नेविगेशन सिस्टम या इंजन की जरूरत नहीं है। यह जहाज उसी तरीके से चलता है जैसे पांचवीं शताब्दी में भारतीय नाविक समुद्र पार किया करते थे।
इस जहाज की यात्रा यह साबित करती है कि प्राचीन तकनीक आज भी उतनी ही कारगर हो सकती है, अगर उसे सही वैज्ञानिक समझ और आधुनिक परीक्षणों के साथ अपनाया जाए।
अजंता की गुफाओं से जन्मा समुद्री चमत्कार
INSV कौंडिन्य का डिजाइन किसी कंप्यूटर सॉफ्टवेयर या डिजिटल मॉडल से नहीं, बल्कि अजंता की गुफाओं में बनी पांचवीं शताब्दी की एक पेंटिंग से प्रेरित है। उस पेंटिंग में बने एक समुद्री जहाज ने इतिहासकारों और नौसेना विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या उस तकनीक को दोबारा जिंदा किया जा सकता है।
कोई मूल ब्लूप्रिंट मौजूद नहीं था। केवल चित्र, मूर्तियां और प्राचीन ग्रंथों के संदर्भ थे। इन्हीं के आधार पर नौसेना के वास्तुकारों, वैज्ञानिकों और पारंपरिक कारीगरों ने मिलकर इस जहाज को आकार दिया।
न कील, न बोल्ट: रस्सियों से सिला जहाज
INSV कौंडिन्य की सबसे अनोखी खासियत इसकी बनावट है। आधुनिक जहाज जहां वेल्डिंग और भारी लोहे की कीलों से तैयार होते हैं, वहीं इस जहाज के लकड़ी के तख्तों को नारियल की जटाओं से बनी मजबूत रस्सियों से सिला गया है।
केरल के अनुभवी कारीगरों ने महीनों तक मेहनत करके इस स्टिच्ड शिप तकनीक को साकार किया। लकड़ी के हर जोड़ को प्राकृतिक राल और तेलों से सील किया गया, ताकि समुद्री पानी अंदर न जा सके। यही तकनीक प्राचीन भारत में इस्तेमाल होती थी, जिसकी बदौलत भारतीय व्यापारी अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया तक बेधड़क यात्रा करते थे।
जहाज नहीं, चलता-फिरता विरासत संग्रहालय

INSV कौंडिन्य केवल तकनीकी चमत्कार नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति का प्रतीक भी है। जहाज के पालों पर बने पौराणिक चिन्ह, सूर्य और गंडाभेरुंडा जैसे प्रतीक शक्ति और ऊर्जा का संदेश देते हैं। इसके अगले हिस्से पर उकेरी गई सिंह याली की आकृति भारत की कलात्मक परंपरा को दर्शाती है।
डेक पर रखा गया पत्थर का लंगर हड़प्पा काल की याद दिलाता है, जो यह बताता है कि भारत की समुद्री परंपरा सिंधु घाटी सभ्यता तक जाती है। यह जहाज समंदर में चलते हुए इतिहास की किताब बन जाता है।
मानसूनी हवाओं पर टिका भरोसा
INSV कौंडिन्य की ओमान यात्रा आसान नहीं है। यह जहाज पूरी तरह मानसूनी हवाओं पर निर्भर है। इसके मार्ग, दिशा और गति का निर्धारण हवा की चाल से होता है। भारतीय नौसेना ने इस जहाज का आधुनिक हाइड्रोडायनेमिक परीक्षण कराया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह बिना इंजन के भी समुद्री तूफानों और ऊंची लहरों का सामना कर सके।
यह यात्रा यह दिखाती है कि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान जब साथ आते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है।
कौंडिन्य: नाम में छुपी समुद्री गाथा

इस जहाज का नाम उस महान भारतीय नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने सदियों पहले दक्षिण-पूर्व एशिया तक समुद्री यात्राएं की थीं। यह नाम भारत की उस समुद्री शक्ति की याद दिलाता है, जिसने व्यापार, संस्कृति और विचारों को समंदर के रास्ते दुनिया तक पहुंचाया।
आज जब INSV कौंडिन्य मस्कट की ओर बढ़ रहा है, तो वह केवल एक यात्रा नहीं कर रहा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक संप्रभुता और ऐतिहासिक गौरव को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित कर रहा है।
भारत की सॉफ्ट पावर का समुद्री संदेश
INSV कौंडिन्य की यह पहली विदेशी यात्रा भारत की सॉफ्ट पावर का मजबूत उदाहरण है। यह दिखाता है कि भारत अपनी जड़ों को समझते हुए भविष्य की ओर बढ़ रहा है। आधुनिक युद्धपोतों और मिसाइलों के दौर में यह जहाज याद दिलाता है कि असली ताकत ज्ञान, परंपरा और आत्मविश्वास में होती है।
यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी कि वे इतिहास को केवल किताबों में न देखें, बल्कि उससे सीख लेकर नए प्रयोग करें।
Wonderful to see that INSV Kaundinya is embarking on her maiden voyage from Porbandar to Muscat, Oman. Built using the ancient Indian stitched-ship technique, this ship highlights India’s rich maritime traditions. I congratulate the designers, artisans, shipbuilders and the… pic.twitter.com/bVfOF4WCVm
— Narendra Modi (@narendramodi) December 29, 2025
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