When Is Amavasya 2025-2026: अमावस्या हिंदू पंचांग में एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। यह दिन पूर्ण चंद्रमा के बाद चंद्रमा की शून्यता – यानी ‘नो मून (New Moon)’ वाली स्थिति पर आता है, जब आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। इसी कारण इसे अमावस्या कहते हैं। हिंदू धर्म में यह दिन विशेष रूप से पितरों की शांति, तर्पण, दान-पुण्य, मनोवैज्ञानिक शुद्धि और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति प्राप्ति के रूप में मनाया जाता है।

साल 2025-26 की ताज़ा अमावस्या तारीख:
हिंदू पंचांग के अनुसार दिसंबर 2025 के महीने में पौष अमावस्या (Paush Amavasya) 19 दिसंबर 2025 को ही धार्मिक दृष्टि से अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी।
यह पौष मास की अमावस्या है और इसे विशेष श्रद्धा के साथ पितरों के तर्पण, पूजा-पाठ और दान के लिए आदर्श दिन माना जाता है।
2026 में अमावस्या की प्रमुख तिथियाँ:
अमावस्या हर महीने की कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है। नीचे 2026 के लिए प्रमुख अमावस्या तिथियों की लिस्ट दी गई है (साल भर में):
| माह | अमावस्या तिथि (2026) |
|---|---|
| माघ अमावस्या (मौनी) | 18 जनवरी 2026 |
| फाल्गुन अमावस्या | 17 फरवरी 2026 |
| चैत्र अमावस्या | 19 मार्च 2026 |
| वैशाख अमावस्या | 17 अप्रैल 2026 |
| ज्येष्ठ अमावस्या | 16 मई 2026 |
| ज्येष्ठ अधिक अमावस्या | 15 जून 2026 |
| आषाढ़ अमावस्या | 14 जुलाई 2026 |
| श्रावण अमावस्या | 12 अगस्त 2026 |
| भाद्रपद अमावस्या | 17 सितंबर 2026 |
| अश्विन अमावस्या | 10 अक्टूबर 2026 |
| कार्तिक अमावस्या | 9 नवंबर 2026 |
| मार्गशीर्ष अमावस्या | 8 दिसंबर 2026 |
1. पितृ की शांति (Pitru Shanti)
अमावस्या को विशेष रूप से पितरों की आत्मा की शांति के लिए माना जाता है। इस दिन तर्पण, श्राद्ध, पिंड-दान और पितृ कर्म करने की परंपरा है। पुराणों के अनुसार, पितरों की प्रसन्नता से ही वंश में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मानसिक शांति बनी रहती है।
2. दान-पुण्य और पुण्य कर्म
अमावस्या के दिन किये गये दान-धर्म, गरीबों की सेवा, ब्राह्मणों को भोजन कराना आदि को अत्यंत फलदायी माना जाता है। खासकर गाय, वस्त्र, अन्न और धन दान का विशेष महत्व है।
3. गंगा स्नान और शुद्धि
पौराणिक मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से न सिर्फ शरीर शुद्ध होता है बल्कि मन-मस्तिष्क की नकारात्मक ऊर्जा भी दूर होती है। इसे अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
4. मानसिक शांति और ध्यान
चंद्रमा के न होने के कारण मानसिक ध्यान, साधना और आत्म-चिंतन की ऊर्जा अधिक मानी जाती है। यह दिन ध्यान, पूजा-जप और मानसिक शांति के लिए अनुकूल है।
अमावस्या पर कैसे पूजा करें?
अगर आप इस दिन पूजा करना चाहते हैं, तो नीचे दिए कदम अपनाएं:
🔹1. स्नान और शुद्धि: सुबह जल्दी उठकर गंगा या पवित्र नदी में स्नान करें अथवा घर पर स्नान करके शुद्ध हो जाएं।
🔹2. पूजा-स्थल तैयार करें: घर के पूजा-स्थल में दीपक, धूप, फूल और अक्षत (चावल) रखें।
🔹3. पितरों के लिए तर्पण: यदि आप पितरों के तर्पण करना चाहते हैं तो ब्राह्मणों को भोजन कराएं और तर्पण विधि से जल में तर्पण दें।
🔹4. दान और धर्म: गरीबों को भोजन, वस्त्र, अन्न और दान जरूर करें।
🔹5. मंत्र जप: “ॐ पितृदेवाय विद्महे …” जैसे पितृ मंत्रों का जाप लाभकारी माना गया है।
सावधानियाँ:
-
अमावस्या के दिन नए वाणिज्यिक योजनाओं, नए कार्यों या शुभ कार्यों की शुरुआत करना अक्सर अशुभ माना जाता है।
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इस दिन कटीले शब्द, झगड़ा और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए।
अमावस्या एक पवित्र और प्रभावशाली तिथि है जो हिंदू धर्मानुसार आध्यात्मिक, मानसिक और पारिवारिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। यह दिन न सिर्फ पितृ-आशीर्वाद के लिए, बल्कि मनुष्य के अंदर की नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति पाने का अवसर भी देता है। वर्ष में बार-बार आने वाली यह तिथि हमें दान-पुण्य, तर्पण, आत्म-चिंतन और सेवा की ओर प्रेरित करती है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।
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