Mexico Tariffs India 2026: मैक्सिको ने 2026 की शुरुआत से एक ऐसा बड़ा कदम उठाया है जिसने दुनिया भर के व्यापार समीकरणों में हलचल मचा दी है। एक जनवरी 2026 से मैक्सिको 1,460 से ज्यादा उत्पादों पर 5% से 50% तक का भारी टैरिफ लागू करने जा रहा है। यह टैक्स उन सभी देशों पर लगेगा जिनका मैक्सिको के साथ कोई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA नहीं है। सबसे बड़ा नुकसान चीन को पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इस फैसले की सबसे तीखी चोट भारत को भी लगने वाली है।
भारत और मैक्सिको के बीच पिछले कई वर्षों से व्यापारिक संबंध निरंतर बढ़ते रहे हैं। 2024 में भारत ने मैक्सिको को लगभग 8.9 अरब डॉलर का माल निर्यात किया था। लेकिन नए टैरिफ नियमों के लागू होने के बाद भारतीय एक्सपोर्ट सेक्टर के कई अहम हिस्सों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
FTA क्या है और इससे भारत को कैसे हुआ नुकसान? Mexico Tariffs India 2026

इसे समझना जरूरी है कि मैक्सिको ने यह टैरिफ केवल उन देशों पर लगाया है जिनके साथ उसका कोई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट नहीं है। FTA दो या अधिक देशों के बीच होने वाला एक व्यापारिक समझौता होता है, जिसके तहत आपसी व्यापार पर लगने वाली ड्यूटी या टैक्स को या तो काफी हद तक कम किया जाता है या पूरी तरह खत्म कर दिया जाता है। इसका सीधा फायदा यह होता है कि दोनों देशों के बीच माल सस्ता हो जाता है और व्यापार बढ़ता है।
भारत और मैक्सिको के बीच फिलहाल कोई FTA नहीं है। इसी कारण भारत को इस नए शुल्क से कोई छूट नहीं मिली। इसका नतीजा यह है कि भारतीय उत्पाद, खासकर ऑटोमोबाइल, स्टील और टेक्सटाइल, अब मैक्सिकन बाजार में काफी महंगे हो जाएंगे।
मैक्सिको को इस कड़े कदम की जरूरत क्यों?
मैक्सिको के इस फैसले के पीछे कई आर्थिक और राजनीतिक वजहें हैं। सबसे प्रमुख कारण चीन से बढ़ती सस्ती आयातित वस्तुओं की बाढ़ है। चीन का मैक्सिको के साथ व्यापार अधिशेष 100 अरब डॉलर से भी अधिक हो चुका है। स्थानीय उद्योगों पर इसका बुरा असर पड़ रहा था। स्टील, ऑटो पार्ट्स और टेक्सटाइल उद्योग चीनी उत्पादों की मार झेल रहे थे।
इसके अलावा अमेरिका का दबाव भी एक अहम कारण है। अमेरिका कई बार चेतावनी दे चुका था कि मैक्सिको के रास्ते चीनी सामान उनकी अर्थव्यवस्था तक पहुंच रहा है। 2026 में होने वाली अमेरिका-मेक्सिको व्यापार समीक्षा से पहले मैक्सिको ने यह कदम उठाकर अमेरिका को संकेत दिया है कि वह चीन के खिलाफ अमेरिकी नीति का समर्थन करता है।
घरेलू राजनीति भी इससे जुड़ी है। मैक्सिको सरकार स्थानीय उद्योगों और मजदूरों को बचाने का दावा कर रही है। वहीं सरकार को अतिरिक्त टैक्स के रूप में लगभग 3.75 अरब डॉलर की आय भी होने वाली है।
भारत पर कितना पड़ेगा असर?

सबसे बड़ा झटका भारतीय ऑटो उद्योग को लगा है। मैक्सिको भारत के लिए पैसेंजर कार एक्सपोर्ट का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है, जहां भारत लगभग 80 करोड़ से 1 अरब डॉलर तक की कारें हर साल भेजता है। पहले जो कारें 20% शुल्क पर जाती थीं, अब उन्हें 50% टैक्स देना होगा। इतने भारी शुल्क के बाद भारतीय कारें मैक्सिकन बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगी।
इसी तरह ऑटो कंपोनेंट उद्योग पर भी 25% से 50% तक का टैक्स लगने वाला है, जिससे लगभग हर उत्पाद लाइन महंगी हो जाएगी। यह सेक्टर सालाना 600–700 मिलियन डॉलर के निर्यात करता था, जिसे अब गंभीर नुकसान झेलना पड़ेगा।
आयरन और स्टील उद्योग पर भी भारी मार पड़ेगी। यह सेक्टर 900 मिलियन डॉलर के निर्यात का बाजार था, जो अब 35% से 40% टैरिफ झेलने वाला है। भारतीय स्टील मैक्सिकन बाजार में अब पहले जैसा सस्ता नहीं रहेगा, जिससे टाटा स्टील जैसी कंपनियों को नुकसान होगा।
टेक्सटाइल, फुटवियर और तैयार कपड़ों के निर्यात पर 30% से 35% टैरिफ लगेगा। यह लगभग 500–600 मिलियन डॉलर के सेक्टर को प्रभावित करेगा। केवल हाई-एंड और प्रीमियम उत्पाद ही किसी तरह टिक पाएंगे।
रासायनिक उत्पाद और फार्मा सेक्टर पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ेगा। 15% से 30% शुल्क लगने के बावजूद भारतीय जेनेरिक दवाएं अभी भी प्रतिस्पर्धी कीमत में रहेंगी। फिर भी लागत बढ़ेगी और निर्यात घटने की संभावना है।
कुल मिलाकर विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत से मैक्सिको जाने वाला लगभग 25% से 40% निर्यात प्रभावित होगा।
भारत की प्रतिक्रिया—कूटनीतिक स्तर पर तेज़ी

भारत सरकार और भारतीय उद्योग इस फैसले को लेकर काफी चिंतित हैं। नवंबर और दिसंबर 2025 में भारतीय व्यापारिक संगठनों ने मैक्सिकन संसद के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन इसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
अब भारत सरकार इसे एक तत्काल कूटनीतिक मुद्दे के रूप में उठा रही है। भारत की इच्छा है कि मैक्सिको के साथ जल्द से जल्द एक FTA या कम से कम एक आंशिक व्यापार समझौता हो सके, जिसमें ऑटोमोबाइल और स्टील सेक्टर को राहत मिले।
यदि आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं होता, तो भारत के कई उत्पादन क्षेत्रों को निर्यात में बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ेगा।
कौन जीत रहा है और कौन हार रहा है?
मैक्सिको की इस नीति से सबसे ज्यादा फायदा उसके घरेलू उद्योगों को होगा। स्टील, टेक्सटाइल और ऑटो-पार्ट बनाने वाली स्थानीय कंपनियां विदेशी उत्पादों की प्रतिस्पर्धा से कुछ समय के लिए राहत पाएंगी। सरकार को भी टैरिफ के जरिए भारी राजस्व मिलेगा। अमेरिका को भी यह कदम रणनीतिक रूप से लाभ पहुंचा रहा है, क्योंकि इससे चीन पर अंकुश लगाने का उसका लक्ष्य मजबूत होता है।
दूसरी तरफ, भारत और चीन दोनों इस नीति से बड़े नुकसान झेलेंगे। भारतीय ऑटो कंपनियां लगभग रातोंरात मैक्सिको के बाजार से बाहर हो सकती हैं। स्टील और टेक्सटाइल सेक्टर को भी बिक्री में भारी कमी देखने को मिल सकती है। दक्षिण कोरिया, ताइवान और थाईलैंड जैसे एशियाई देश भी प्रभावित होंगे।
मैक्सिको के उपभोक्ता भी नुकसान में हैं। उन्हें अब कार, कपड़े और रोजमर्रा के कई सामान महंगे खरीदने पड़ेंगे। स्थानीय दुकानों और कारखानों को सस्ते एशियाई कच्चे माल नहीं मिल पाएंगे, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी।
क्या यह फैसला लंबे समय तक टिकेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टैरिफ कदम अल्पकालिक राजनीतिक उद्देश्यों और अमेरिकी दबाव के कारण उठाया गया है। लेकिन यदि मैक्सिको के उद्योगों को इससे वास्तव में फायदा नहीं होता या उपभोक्ता कीमतें बहुत बढ़ जाती हैं, तो भविष्य में सरकार इस पर पुनर्विचार कर सकती है। भारत के साथ FTA की संभावना भी बढ़ सकती है।
आने वाले महीनों में कूटनीति, व्यापार वार्ताओं और अमेरिकी दबाव के बीच यह मामला किस दिशा में जाएगा, यह काफी दिलचस्प रहेगा।
चीन को रोकने की कोशिश में भारत बना बड़ी चोट का शिकार
मैक्सिको का नया टैरिफ फैसला दुनिया के सबसे आक्रामक संरक्षणवादी कदमों में से एक माना जा रहा है। इसका मुख्य निशाना भले ही चीन हो, लेकिन इसकी सीधी चोट भारत पर भी गहरी पड़ेगी। भारत के निर्यात क्षेत्र, विशेषकर ऑटो और स्टील, को इससे भारी झटका लगने वाला है।
अब नजर भारत और मैक्सिको के बीच होने वाली संभावित व्यापार वार्ताओं पर है। क्या भारत नुकसान की भरपाई कर पाएगा या यह टैरिफ लंबे समय तक भारतीय उद्योगों को प्रभावित करेगा, समय ही बताएगा।
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