Explained Market Crash Today: क्या है इसकी असली वजह?

Explained Market Crash Today: आज (9 दिसंबर 2025) भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली – सेंसेक्स-निफ्टी दोनों लाल निशान पर रहे। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 700 अंक तक लुढ़का, वहीं निफ्टी भी लगभग 200–250 अंक गिरकर नीचे कारोबार कर रहा था।

न सिर्फ बड़ी कंपनियों (लार्ज-कैप), बल्कि मिडकैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी भारी बिकवाली रही, जिससे आम निवेशकों के निवेश पर असर पड़ा।

Explained Market Crash Today

गिरावट के प्रमुख कारण:

1. वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों का रवैया:

बहुत बड़ा कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चय बना हुआ है। आज वैश्विक संकेत (global cues) कमजोर थे, खासकर अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में होने वाले नीतिगत फैसलों की चिंता के चलते।

इसके साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं – इस वजह से भारत में निवेश का प्रवाह नीचे आ रहा है, जिससे बाजार में दबाव बन गया है।

2. अमेरिकी और वैश्विक मौद्रिक नीतियों पर असमंजस:

अगले कुछ दिनों में Federal Reserve (अमेरिका का सेंट्रल बैंक) की अहम बैठक है। इस फैसले से वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर और धन प्रवाह (capital flows) पर असर हो सकता है – तभी से निवेशक सतर्क हो गए हैं।

इस प्रकार का अनिश्चित माहौल निवेशकों में बेचैनी पैदा करता है, और बहुत से लोग बेहतर रिटर्न की उम्मीद में शेयर बेचकर सुरक्षित विकल्पों की ओर झुकाव दिखाते हैं।

3. रुपये में कमजोरी – मुद्रा का अवमूल्यन:

रुपये की गिरावट ने भी बाजार पर दबाव डाला है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारत निवेश करना महंगा पड़ा है। यह वजह भी है कि विदेशी निवेशकों ने शेयर बेचना शुरू कर दिया।

मुद्रा की कमजोरी से कच्चे माल का आयात महंगा हो जाता है, कंपनियों की लागत बढ़ जाती है – जिससे भविष्य की कमाई को लेकर चिंता बढ़ जाती है।

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4. मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भारी बिकवाली – रिटेल निवेशकों को झटका

आज का सत्र इस लिहाज से खास था कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों के शेयरों में बिकवाली सबसे ज़्यादा रही। इस वजह से वे निवेशक, जिनका पोर्टफोलियो इन शेयरों में था, अधिक प्रभावित हुए।

कई निवेशकों को आशा थी कि बाजार बेहतर होगा, लेकिन बिकवाली के कारण उनकी पूँजी टल गई – खासकर वो लोग जो हाई-रिटर्न के चक्कर में रिस्की शेयरों में निवेश करते हैं।

5. टेक्निकल-फैक्टर्स, ऑप्शन्स एक्सपायरी, और मुनाफावसूली (Profit taking)

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में पहले से ही उच्च स्तर पर कई शेयर थे – इस स्थिति में आज का गिरावट partly “मुनाफावसूली” (profit-booking) रही। लोग जो कमाई कर चुके थे, उन्होंने थोड़ा-बहुत शेयर बेचा।

इसके अलावा, आज फ्यूचर्स-ऑप्शन्स (derivatives) का रोल-ओवर या एक्सपायरी भी थी – जिससे उतार-चढ़ाव (volatility) बढ़ गई, और ट्रेडर्स सावधान हो गए।

क्या हम समझ सकते हैं कि यह गिरावट सिर्फ एक दिन की है या कुछ और?

यह कहना मुश्किल है, लेकिन कुछ बातें संकेत देती हैं कि यह गिरावट सिर्फ आज-कल की नहीं, बल्कि थोड़ा सतर्कता का माहौल बन रहा है।

  • विदेशी निवेशों की लगातार निकासी (outflow) हो रही है, जो कि एक बड़ा झटका है; अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो बाजार को वसूली में तकलीफ हो सकती है।

  • मुद्रा (रुपया) और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता – ये दोनों ऐसे कारक हैं जो सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि कुछ समय तक असर दिखा सकते हैं।

  • मिड-कैप एवं स्मॉल-कैप शेयरों में गिरावट ने रिटेल निवेशकों को प्रभावित किया है; वो लोग अब निवेश में दोबारा सोचेंगे – इस कारण से मार्केट में कमजोरी बने रहने की संभावना है।

लेकिन – यदि विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटे, और वैश्विक स्थिति स्थिर हुई, तो बाजार फिर उबर सकता है।

निवेशकों के लिए सुझाव: घबराएं नहीं, समझदारी से काम लें

  1. अगर आप रिटेल निवेशक हैं – और आपका पोर्टफोलियो मिड या स्मॉल-कैप शेयरों में है – तो अभी जल्दबाजी में बेचने से बचें। गिरावट के बाद कभी-कभी मुनाफे के लिए यह अच्छा मौका भी हो सकता है।

  2. लंबी अवधि के निवेशकों (long-term investors) को ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए; बड़ी इक्विटी कंपनियाँ (large-cap) आमतौर पर स्थिर रहती हैं।

  3. अपने निवेश को diversify रखें – सिर्फ इक्विटी पर भरोसा न रखें; फिक्स्ड-इनकम, म्यूचुअल फंड, सोना आदि पर भी थोड़ा विचार करें।

  4. मार्केट की हर हलचल पर भावनात्मक प्रतिक्रिया देने से बचें; बल्कि, आर्थिक-सामग्री (fundamental) संकेतों पर ध्यान दें।

आज की गिरावट कई कारणों – वैश्विक अस्थिरता, विदेशी निवेशकों की निकासी, रुपये की कमजोरी, मुनाफावसूली तथा मिड/स्मॉल-कैप शेयरों की बिकवाली – का संयोग है। यह निश्चित रूप से निवेशकों के लिए एक चेतावनी है कि बाजार हमेशा सीधा नहीं चलता।

लेकिन – यदि हम संयम रखें, समझदारी से निवेश करें और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएँ – तो गिरावट अस्थायी हो सकती है, और बाजार फिर उबर सकता है।

निवेश में “डर” से ज़्यादा “धैर्य” और “रणनीति” मायने रखती है।

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