Constitution Day 2025: 26 नवंबर को देशभर में संविधान दिवस मनाया जाता है। आज का दिन सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि उस विराट रचना को याद करने का अवसर है जिसने भारत को एक मज़बूत लोकतंत्र का आधार दिया। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को तो हम सब जानते हैं, लेकिन एक सवाल अक्सर लोगों को चौंका देता है—भारत के संविधान की मूल प्रति हाथों से किसने लिखी थी?
भारत जैसे विशाल देश के संविधान को एक व्यक्ति ने महीनों तक बैठकर हाथ से लिखा था। यह कहानी है बिहार के मधुबनी जिले के सुलेखकार प्रेम बिहारी नारायण रायजादा की—एक ऐसे कलाकार की, जिसने इस ऐतिहासिक कृति के लिए एक भी रुपये नहीं लिए और बदले में सिर्फ एक छोटी-सी, मगर अपने लिए बेहद अहम शर्त रखी।
भारत के संविधान की मूल प्रति किसने लिखी? | Constitution Day 2025

बहुत कम लोग जानते हैं कि संविधान की अंग्रेज़ी में लिखी गई मूल प्रति किसी मशीन से टाइप नहीं की गई थी। इसे हाथ से लिखा गया था। यह अद्भुत कार्य किया था प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने, जिन्हें कैलिग्राफी में महारत हासिल थी। उन्होंने अपनी पेन, स्याही और अनगिनत निबों की मदद से विश्व के सबसे विस्तृत संविधान की मूल प्रति तैयार की।
दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से पढ़े प्रेम बिहारी रायजादा बचपन से ही सुलेखन कला में रुचि रखते थे। उनके दादा रामप्रसाद सक्सेना, जो फ़ारसी और अंग्रेज़ी के विद्वान थे, ने उन्हें बचपन से ही इस कला का अभ्यास करवाया। जब देश को एक संतुलित, संरचित तथा भविष्य को दिशा देने वाला संविधान चाहिए था, तब रायजादा को यह ऐतिहासिक कार्य सौंपा गया।
नेहरू का अनुरोध और प्रेम बिहारी की अनोखी शर्त
कहानी का एक दिलचस्प हिस्सा यह भी है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने प्रेम बिहारी से संवाद किया और संविधान को हाथ से लिखने का अनुरोध किया। प्रेम बिहारी ने यह काम करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया। उनके लिए यह सिर्फ एक काम नहीं बल्कि राष्ट्र सेवा का अवसर था।
लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी—संविधान के हर पन्ने पर उनका नाम और अंतिम पन्ने पर उनके दादा रामप्रसाद सक्सेना का नाम सुंदर सुलेख में लिखा जाएगा।
संविधान सभा ने उनकी यह शर्त स्वीकार कर ली।
उनकी यह इच्छा व्यक्तिगत नहीं बल्कि अपने गुरु और परिवार की स्मृति के प्रति सम्मान का प्रतीक थी।
On the 76th Constitution Day, the Legislative Department, Ministry of Law and Justice proudly celebrates our guiding Constitution — the document that protects our rights, strengthens our democracy, and unites our diverse nation. Let us honour the vision of our founding leaders… pic.twitter.com/4C3Ow2wwhw
— Ministry of Law and Justice (@MLJ_GoI) November 26, 2025
छह महीने की साधना और 432 घिसी हुई निबें
संविधान की मूल प्रति बनाना कोई साधारण काम नहीं था। प्रेम बिहारी रायजादा ने लगातार छह महीनों तक प्रतिदिन घंटों बैठकर इसे लिखा। वे लकड़ी के खास होल्डर में निब लगाकर उसे स्याही में डुबोते थे। धीरे-धीरे शब्द आकार लेते, पन्ने संवरते और इतिहास गढ़ा जाता।
इस काम में उनकी 432 निबें घिस गईं।
उनके सामने सिर्फ शब्द नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र का भविष्य लिखा जा रहा था—इसलिए हर अक्षर, हर रेखा, हर सजावट को वे पूरी सावधानी से उतारते थे।
पार्चमेंट पेपर पर बना अनमोल दस्तावेज़
संविधान की मूल प्रति सामान्य कागज़ पर नहीं लिखी गई। यह एक विशेष प्रकार के पार्चमेंट कागज़ पर लिखी गई थी, जिसे ब्रिटेन के बर्मिंघम शहर से मंगाया गया। यह कागज़ सैकड़ों साल तक खराब नहीं होता और न ही चिपकता है।
मूल प्रति का आकार 45.7 × 58.4 सेमी है।
अंग्रेजी संस्करण में 233 पन्ने हैं, जिनकी काली लेदर बाइंडिंग पर सोने की नक्काशी की गई है।
संविधान का हिंदी संस्करण भी हाथ से ही लिखा गया था, जिसे पुणे के रिसर्च सेंटर से जुड़े प्रसिद्ध कैलिग्राफर वसंत कृष्ण वैद्य ने तैयार किया। हिंदी प्रति में 264 पन्ने हैं, जिसका कुल वजन लगभग 13 किलो है।
संसद में कहां सुरक्षित है संविधान की मूल प्रति?
संविधान की मूल प्रति को सुरक्षित रखना उतना ही महत्वपूर्ण था जितना उसे लिखना। इसी उद्देश्य से 1985 में संसदीय पुस्तकालय की पहल पर नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी ने एक अनोखा समाधान खोजा।
अमेरिका की एक कंपनी ने विशेष नाइट्रोजन-सील्ड बॉक्स तैयार किए, जिनमें ऑक्सीजन बिल्कुल भी नहीं होती।
ऐसे वातावरण में कागज़ खराब नहीं होता और सदियों तक सुरक्षित रहता है।
यही तकनीक आज भारतीय संसद के संविधान हॉल में रखी मूल प्रति को संरक्षित कर रही है। यह देश की सबसे कीमती विरासतों में से एक है।
संविधान पर किसने किए थे सबसे पहले हस्ताक्षर?
एक दिलचस्प तथ्य यह है कि संविधान पर हस्ताक्षर करने का क्रम थोड़ा उलट गया था।
नियम के अनुसार सबसे पहले संविधान सभा के अध्यक्ष और स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को हस्ताक्षर करना था, लेकिन हस्ताक्षर वाले पन्ने पर सबसे पहले पहुंच गए जवाहरलाल नेहरू और उन्होंने वहीं हस्ताक्षर कर दिए।
धीरे-धीरे बाकी सदस्य भी आने लगे और अपने-अपने हस्ताक्षर कर गए। अंत में जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद पहुंचे, तो उन्हें पर्याप्त जगह नहीं मिली और उन्होंने ऊपर की ओर तिरछे हस्ताक्षर किए।
यह दृश्य आज के संविधान हॉल में संरक्षित मूल प्रति में देखा जा सकता है।
भारत के संविधान का निर्माण कैसे हुआ?
संविधान निर्माण की प्रक्रिया एक दिन में नहीं हुई। इसके पीछे दो वर्षों से ज्यादा की मेहनत और व्यापक बहसें थीं। 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक हुई थी। इसके बाद 4 नवंबर 1947 को ड्राफ्ट तैयार हुआ। करीब दो वर्ष तक विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा चलती रही। पूरे मसौदे में 2000 से अधिक परिवर्तन किए गए।
आखिर्कार 26 नवंबर 1949 को संविधान को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया गया और 26 जनवरी 1950 को यह लागू हुआ।
इसी दिन भारत एक पूर्ण गणतंत्र बना।
प्रेम बिहारी रायजादा की निजी कहानी: कठिन बचपन और असाधारण प्रतिभा
प्रेम बिहारी रायजादा का जीवन सिर्फ संविधान लेखन तक सीमित नहीं था। उनका बचपन मुश्किल दौर से गुजरा।
वे छोटी उम्र में ही माता-पिता को खो चुके थे। उनके दादा रामप्रसाद सक्सेना ने ही उन्हें पाला, बड़ा किया और शिक्षा दिलवाई।
दादा ने ही उन्हें सुलेखन सिखाया, जो आगे चलकर उनका जीवन बदल देने वाला कौशल बना। रायजादा का काम सिर्फ सुंदर अक्षरों का संयोजन नहीं था बल्कि कला, धैर्य और राष्ट्रप्रेम का दुर्लभ संगम था।
संविधान लेखन का कक्ष और आज का संविधान क्लब
जहां प्रेम बिहारी बैठकर संविधान लिखते थे, उस कक्ष को बाद में संरक्षित किया गया और वहीं संविधान क्लब का निर्माण हुआ।
यही जगह आज भी लोगों को उस अभूतपूर्व साधना की याद दिलाती है, जिसने कागज़ पर भारत का भविष्य रचा था।
भारत का संविधान क्यों है दुनिया का सबसे विस्तृत संविधान?
भारत के संविधान में शुरुआत में 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियां और एक प्रस्तावना थी।
विभिन्न परिस्थितियों, देश की विविधता और सामाजिक-राजनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे विस्तृत बनाया गया।
यह दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसमें आज संशोधनों के बाद 470 से अधिक अनुच्छेद हो चुके हैं।
Constitution Day 2025: क्यों मनाते हैं यह दिन?
2015 में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में 19 नवंबर 2015 को भारत सरकार ने 26 नवंबर को प्रत्येक वर्ष संविधान दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की।
इसका उद्देश्य नागरिकों में संविधान के मूल्यों—न्याय, समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और लोकतांत्रिक भावना—के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
संविधान दिवस हमें क्या सिखाता है?
संविधान दिवस सिर्फ दफ्तरों में भाषण देने या स्कूलों में कार्यक्रम करने का दिन भर नहीं है। यह दिन याद दिलाता है कि आजादी आसान नहीं थी और न ही लोकतंत्र अपने-आप चलता है। संविधान हमारे अधिकारों की ढाल है और कर्तव्यों की दिशा भी।
प्रेम बिहारी रायजादा जैसे लोग, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के राष्ट्र को इतना बड़ा योगदान दिया, हमें बताते हैं कि देश सेवा कई रूपों में की जा सकती है।
कभी शब्दों से, कभी संकल्प से और कभी अपने हुनर से।
एक अनसुना लेकिन अविस्मरणीय नायक
Constitution Day 2025 पर जब हम संविधान के बारे में बात करते हैं, तो डॉ. भीमराव अंबेडकर से लेकर संविधान सभा के सभी सदस्यों की भूमिका याद करते हैं।
लेकिन प्रेम बिहारी रायजादा का नाम अक्सर पीछे छूट जाता है।
आज यह कहानी हमें याद दिलाती है कि भारत का संविधान सिर्फ नेताओं और विधिवेत्ताओं का बनाया हुआ दस्तावेज़ ही नहीं, बल्कि एक कलाकार की मेहनत, सौंदर्य और समर्पण का जीवंत उदाहरण भी है।
उनके हाथों ने वह भविष्य लिखा, जिसे आज हम संरक्षित रखे हुए हैं।
भारत का संविधान सिर्फ एक किताब नहीं—यह एक जीवित दस्तावेज़ है, और प्रेम बिहारी रायजादा उसका अमर सुलेख।
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