Islamabad Court Bomb Blast: पाकिस्तान की राजधानी दहली, आतंकी साए में फिर घिरा मुल्क

Islamabad Court Bomb Blast: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मंगलवार, 11 नवंबर 2025 को हुए भीषण आत्मघाती धमाके ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। अदालत परिसर के बाहर हुए इस हमले में 12 से अधिक लोगों की मौत और 25 से ज्यादा लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। यह धमाका उस वक्त हुआ जब अदालत के गेट पर भारी भीड़ मौजूद थी। चश्मदीदों के मुताबिक, एक व्यक्ति अचानक तेज आवाज़ में चिल्लाया और फिर कुछ ही पलों में ज़ोरदार विस्फोट हुआ। चारों ओर धुएँ का गुबार, चीख-पुकार और भगदड़ मच गई।

Islamabad Court Bomb Blast

घटना का पूरा विवरण:

धमाका इस्लामाबाद की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के बाहरी हिस्से में सुबह लगभग 10:30 बजे हुआ। पुलिस के अनुसार, हमलावर एक आत्मघाती जैकेट पहने हुए था और उसने अदालत के प्रवेश द्वार के पास मौजूद पुलिस वाहन के करीब खुद को उड़ा लिया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आस-पास खड़ी कई गाड़ियों के शीशे चकनाचूर हो गए और आसपास के भवनों की खिड़कियाँ भी टूट गईं।

पुलिस और राहत दल तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों को पाकिस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, कई घायल अब भी गंभीर हालत में हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

हमले की जिम्मेदारी और आतंकी संगठन का दावा:

इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने ली है। संगठन ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि उनका निशाना “अदालतों और सरकारी अधिकारियों” पर था जो “ग़ैर-इस्लामी कानूनों” को लागू कर रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब TTP ने इस तरह का हमला किया हो। पिछले एक दशक से यह संगठन पाकिस्तान के अंदरूनी हिस्सों में कई बम धमाके और हमले कर चुका है। हालांकि, राजधानी में इस तरह का बड़ा धमाका सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सरकार और सेना की प्रतिक्रिया:

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में बयान देते हुए कहा कि यह हमला पाकिस्तान की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा, “यह घटना हमें याद दिलाती है कि आतंकवाद अब भी खत्म नहीं हुआ है। हमें एक बार फिर अपने सुरक्षा तंत्र को मज़बूत करना होगा।”

राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। प्रधानमंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों को आदेश दिया है कि वे मामले की गहन जांच करें और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करें।

घटनास्थल की भयावह तस्वीरें:

धमाके के बाद जो दृश्य सामने आए, वे दिल दहला देने वाले थे। सड़क पर बिखरे हुए जूते-चप्पल, खून से सनी फाइलें और टूटे मोबाइल फोन इस बात का सबूत थे कि यह हमला कितनी निर्दयता से किया गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, धमाका इतना तेज था कि कुछ देर के लिए पूरा इलाका अंधकारमय हो गया और लोग समझ नहीं पाए कि क्या हुआ।

राहत कर्मियों को धमाके के बाद मलबे में फंसे लोगों को निकालने में करीब दो घंटे लग गए। पुलिस ने इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया है और फोरेंसिक टीम सबूत इकट्ठा कर रही है।

राजधानी में बढ़ी सुरक्षा-सतर्कता:

इस धमाके के बाद इस्लामाबाद समेत पूरे पाकिस्तान में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है। अदालतों, सरकारी कार्यालयों और पुलिस ठिकानों के बाहर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। राजधानी में कई चेकपोस्ट बनाए गए हैं, और संदिग्ध व्यक्तियों की तलाशी ली जा रही है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला सिर्फ राजधानी की शांति भंग करने के लिए नहीं था, बल्कि इसका मकसद सरकार को यह संदेश देना था कि आतंकवाद अब भी ज़िंदा है।

पड़ोसी देशों की प्रतिक्रिया:

भारत ने पाकिस्तान द्वारा लगाए गए उन आरोपों को खारिज किया है जिनमें उसने हमले के लिए भारत को अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे “बेतुका और झूठा नैरेटिव” कहा और कहा कि पाकिस्तान को अपने अंदरूनी आतंकवादी ढांचे को खत्म करने पर ध्यान देना चाहिए।

दूसरी ओर, अफगानिस्तान पर भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि वहाँ सक्रिय उग्रवादी समूह पाकिस्तान की सीमा पार हमलों को बढ़ावा दे रहे हैं। इससे दोनों देशों के रिश्तों में फिर से तनाव बढ़ गया है।

आतंकवाद पर नियंत्रण की चुनौती: Islamabad Court Bomb Blast

पाकिस्तान पिछले दो दशकों से आतंकवाद से जूझ रहा है। एक समय ऐसा भी था जब देश के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में आतंकवाद लगभग खत्म कर दिया गया था, लेकिन अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद TTP और अन्य संगठनों ने फिर से अपनी जड़ें मजबूत कर ली हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को अपनी खुफिया प्रणाली और सीमा सुरक्षा को और मजबूत करना होगा। आतंकियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए न केवल सैन्य बल्कि वैचारिक स्तर पर भी कदम उठाने होंगे।

जनता का डर और असुरक्षा की भावना:

इस हमले के बाद आम नागरिकों में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। अदालत परिसर में रोज़ काम करने वाले वकील और कर्मचारी अब डरे हुए हैं। एक वकील ने स्थानीय चैनल से बात करते हुए कहा, “हम तो रोज़ न्याय की लड़ाई लड़ते हैं, पर आज खुद हमारे जीवन पर न्याय नहीं हुआ।”

स्थानीय दुकानदारों ने भी बताया कि धमाके के बाद बाजार कई घंटों तक बंद रहे। लोग अपने घरों में दुबके रहे और पूरे दिन शहर में दहशत का माहौल बना रहा।

आगे का रास्ता: Islamabad Court Bomb Blast

इस्लामाबाद धमाका पाकिस्तान के लिए सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यह याद दिलाता है कि आतंकवाद की जड़ें अब भी देश के दिल में कहीं गहराई तक फैली हैं। सरकार के लिए यह समय है कि वह केवल निंदा और वादों से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई करे।

जरूरी है कि सुरक्षा एजेंसियों, राजनीतिक दलों और आम जनता – सभी का सहयोग मिलकर इस खतरे से निपटने के लिए एकजुट हो। वरना आतंक का यह साया बार-बार मासूमों की जान लेता रहेगा।

इस्लामाबाद में हुआ यह धमाका पाकिस्तान की राजधानी को एक बार फिर डर और अनिश्चितता के साए में ले आया है। सवाल अब यह नहीं कि आतंकवाद कहाँ से आया, बल्कि यह है कि इसे खत्म करने की राजनीतिक और सामाजिक इच्छाशक्ति क्या पाकिस्तान के पास है।
इस हमले ने साफ कर दिया है कि जब तक आतंकवाद के खिलाफ ईमानदार और ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक पाकिस्तान में अमन का सूरज पूरी तरह नहीं उग पाएगा।

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