Uttarakhand Sthapana Diwas 2025: उत्तराखंड, जिसे प्यार से “देवभूमि” कहा जाता है, आज अपनी स्थापना का 25वां वर्षगांठ मना रहा है। 9 नवंबर 2000 को जब उत्तर प्रदेश के पहाड़ी इलाकों को अलग करके एक नया राज्य बनाया गया, तब से यह दिन हर साल उत्तराखंड स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान, संघर्ष और आत्मगौरव का प्रतीक है।
इस साल का उत्तराखंड दिवस और भी खास है क्योंकि राज्य अपने गठन के 25 साल पूरे कर रहा है। यह अवसर है अपने इतिहास को याद करने का, अपनी जड़ों से जुड़ने का और उन संघर्षों को सम्मान देने का जिनसे होकर यह राज्य बना।
उत्तराखंड राज्य के गठन की कहानी: संघर्ष से शुरू होकर सफलता तक की यात्रा | Uttarakhand Sthapana Diwas 2025
उत्तराखंड, जिसे प्यार से “देवभूमि” कहा जाता है, आज अपनी स्थापना का 25वां वर्षगांठ मना रहा है। 9 नवंबर 2000 को जब उत्तर प्रदेश के पहाड़ी इलाकों को अलग करके एक नया राज्य बनाया गया, तब से यह दिन हर साल उत्तराखंड स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान, संघर्ष और आत्मगौरव का प्रतीक है।
इस साल का उत्तराखंड दिवस और भी खास है क्योंकि राज्य अपने गठन के 25 साल पूरे कर रहा है। यह अवसर है अपने इतिहास को याद करने का, अपनी जड़ों से जुड़ने का और उन संघर्षों को सम्मान देने का जिनसे होकर यह राज्य बना।
उत्तराखंड राज्य के गठन की कहानी: संघर्ष से शुरू होकर सफलता तक की यात्रा

उत्तराखंड का इतिहास संघर्ष, उम्मीद और एकजुटता की कहानी है। 90 के दशक में जब पहाड़ी इलाकों के लोग अपने क्षेत्र की पहचान, विकास और प्रशासनिक जरूरतों के लिए आवाज उठाने लगे, तब “अलग राज्य” की मांग ने जोर पकड़ा।
पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियाँ, कठिन जीवनशैली और विकास में पिछड़ापन — इन सबने इस आंदोलन को और मजबूत किया। धीरे-धीरे यह आंदोलन जन-आंदोलन बन गया। आम लोग, छात्र, महिलाएँ और किसान सब इस मांग में शामिल हो गए।
9 नवंबर 2000 को आखिरकार वह ऐतिहासिक पल आया, जब उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड भारत का 27वां राज्य बना। उस समय इसका नाम “उत्तरांचल” रखा गया था, जिसे बाद में 2007 में बदलकर “उत्तराखंड” कर दिया गया।
उत्तराखंड नाम का अर्थ और आध्यात्मिक पहचान
“उत्तराखंड” शब्द का अर्थ है — उत्तर में स्थित भूमि, और यह भूमि सिर्फ भौगोलिक रूप से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी भारत के हृदय में बसती है।
यहां केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री जैसे चार धाम हैं जो हिंदू आस्था के केंद्र हैं। इसलिए इसे “देवभूमि” कहा जाता है।
उत्तराखंड की मिट्टी में धर्म, अध्यात्म और प्रकृति का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां की नदियाँ, झरने, बर्फ से ढकी चोटियाँ और मंदिर सब मिलकर इसे भारत का सबसे सुंदर और शांतिपूर्ण राज्य बनाते हैं।
संघर्ष जिन्होंने उत्तराखंड को बनाया
उत्तराखंड की स्थापना किसी एक दिन का परिणाम नहीं थी, बल्कि वर्षों के संघर्ष का नतीजा थी। इस आंदोलन की शुरुआत पहाड़ के आम लोगों ने की थी।
महिलाओं ने इसमें सबसे आगे रहकर योगदान दिया — चाहे वह जल-जंगल-जमीन के अधिकार की बात हो या समान अवसरों की।
राज्य निर्माण आंदोलन में अल्मोड़ा, पौड़ी, नैनीताल, टिहरी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, चमोली और चंपावत जैसे जिलों से हजारों लोग सड़कों पर उतरे। उन्होंने एक स्वर में कहा – “हमारा पहाड़, हमारा अधिकार।”
यह सिर्फ राजनीतिक आंदोलन नहीं था, बल्कि आत्मसम्मान और पहचान की लड़ाई थी। अंततः केंद्र सरकार ने इस भावना को समझा और 9 नवंबर 2000 को “उत्तरांचल राज्य” के गठन का ऐलान हुआ।
उत्तराखंड स्थापना दिवस का महत्व
उत्तराखंड स्थापना दिवस हर साल उस गौरवशाली दिन को याद करने का अवसर है जब देवभूमि ने अपनी अलग पहचान बनाई।
यह दिन राज्य की संस्कृति, परंपरा और संघर्ष की याद दिलाता है।
लोग इस दिन झंडारोहण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य और उत्तराखंडी गीतों के माध्यम से अपने राज्य का गौरव मनाते हैं।
सरकारी स्तर पर देहरादून, नैनीताल और हल्द्वानी जैसे शहरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनमें राज्य के नायक, आंदोलनकारी और युवा प्रतिभाएँ सम्मानित की जाती हैं।
इस दिन लोगों को यह एहसास होता है कि उत्तराखंड सिर्फ एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक भावना है — जो हिमालय की शांति, गंगा की पवित्रता और लोगों की सादगी में बसती है।
उत्तराखंड: संस्कृति, परंपरा और प्रकृति का संगम
उत्तराखंड अपनी संस्कृति और लोक परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां के लोकगीत, नृत्य, त्यौहार और खानपान इसे भारत के सबसे रंगीन राज्यों में शामिल करते हैं।
गढ़वाली और कुमाऊंनी बोलियों में लोकगीतों की मिठास आज भी हर गांव में गूंजती है।
दीपावली, होली, हarela, फूलदेई और बग्वाल जैसे त्यौहार यहां पूरे उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।
उत्तराखंड की कला, हस्तशिल्प और लोक संगीत न सिर्फ यहां के लोगों की पहचान हैं बल्कि यह राज्य की आत्मा भी हैं।
उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन
उत्तराखंड का नाम आते ही आंखों के सामने हिमालय की बर्फीली चोटियाँ, नीले झरने, हरियाली और मंदिरों की घंटियाँ गूंज उठती हैं।
यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल जैसे मसूरी, नैनीताल, औली, ऋषिकेश, हरिद्वार, चोपता, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
ऋषिकेश को योग की राजधानी कहा जाता है, जहां हर साल हजारों विदेशी और भारतीय पर्यटक आध्यात्मिक शांति पाने आते हैं।
केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे धाम हर हिंदू भक्त के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
25 साल का हुआ उत्तराखंड
उत्तराखंड के ‘सिल्वर जुबली’ के मौके पर प्रधानमंत्री 8260 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. साथ ही राज्य को कई परियोजनाओं की सौगात देंगे. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को अलग राज्य के लिए संघर्ष करने वाले… pic.twitter.com/xoa1lNEY6h
— NDTV India (@ndtvindia) November 9, 2025
राज्य के 25 साल: प्रगति और चुनौतियाँ
25 वर्षों की यात्रा में उत्तराखंड ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, सड़क और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में विकास हुआ है।
राज्य ने पर्यावरण संरक्षण और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया है।
हालांकि, पहाड़ी इलाकों से पलायन, रोजगार के अवसरों की कमी और बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियाँ आज भी मौजूद हैं।
राज्य की सरकारें लगातार इन समस्याओं के समाधान की दिशा में काम कर रही हैं ताकि उत्तराखंड के हर कोने में समान विकास हो सके।
देवभूमि की नई पहचान
आज उत्तराखंड सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आध्यात्मिकता की मिसाल बन चुका है।
यहां के लोग मेहनती, सरल और प्रकृति से जुड़े हुए हैं।
उत्तराखंड का यंग जनरेशन शिक्षा, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
स्मार्ट विलेज, ऑर्गेनिक फार्मिंग, होमस्टे टूरिज्म और लोक संस्कृति को पुनर्जीवित करने जैसे कदम राज्य को नई दिशा दे रहे हैं।
उत्तराखंड दिवस – गर्व, एकता और प्रेरणा का प्रतीक
उत्तराखंड स्थापना दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि यह राज्य के गौरव, संघर्ष और आत्मसम्मान का उत्सव है।
यह दिन याद दिलाता है कि अगर लोग एकजुट हों और अपने अधिकार के लिए खड़े हों, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।
देवभूमि की इस धरती पर प्रकृति की सुंदरता के साथ-साथ लोगों की मेहनत और संस्कृति की गहराई भी बसती है।
जब पूरा उत्तराखंड 9 नवंबर को अपने तिरंगे के नीचे एक स्वर में गाता है — “जय उत्तराखंड, जय देवभूमि”,
तो यह दिन हर दिल में गर्व और भावनाओं का पर्व बन जाता है।
उत्तराखंड स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
देवभूमि सदा खुशहाल, सुरक्षित और समृद्ध रहे। 🌸
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