Interstellar Comet 3I/Atlas: ब्रह्मांड से जुड़ी खबरें हमेशा लोगों की जिज्ञासा को जगाती हैं, और इस बार जो नज़ारा सामने आया है उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। चीन के Mars Orbiter Tianwen-1 ने अक्टूबर 2025 में Comet 3I/Atlas की ऐसी तस्वीरें ली हैं, जिन्हें देखकर सोशल मीडिया पर हलचल मच गई है। कई लोगों ने इसे “Alien Spaceship” यानी एलियन का जहाज तक कह दिया।
हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक अंतरतारकीय धूमकेतु (Interstellar Comet) है, यानी ऐसा खगोलीय पिंड जो हमारे सौरमंडल के बाहर से आया है। यह अब तक देखा गया केवल तीसरा ऐसा ऑब्जेक्ट है जो बाहरी तारामंडल से हमारे सौरमंडल में दाखिल हुआ है।
मंगल के आसमान से आई तस्वीरें, जिसने बदल दी धारणाएँ | Interstellar Comet 3I/Atlas

चीनी अंतरिक्ष यान Tianwen-1, जो 2021 से मंगल की कक्षा में घूम रहा है, ने इस धूमकेतु की पहली क्लोज़-अप तस्वीरें ली हैं। इन तस्वीरों में एक चमकीला, परंतु हल्का कोर (nucleus) दिखाई देता है, जिसके चारों ओर एक धुंधली, दमकती परत यानी coma फैली हुई है।
तस्वीरों में धूमकेतु कुछ ऐसा दिख रहा है जैसे किसी रहस्यमयी जहाज की चमक हो, और शायद यही वजह है कि इंटरनेट पर इसे एलियन ऑब्जेक्ट कहकर वायरल कर दिया गया। लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जो हमारी समझ के दायरे से परे जरूर है, पर किसी बाहरी जीव के जहाज से जुड़ी नहीं।
कहाँ से आया यह रहस्यमयी धूमकेतु?

Comet 3I/Atlas को पहली बार 1 जुलाई 2025 को चिली में स्थित ATLAS (Asteroid Terrestrial-impact Last Alert System) द्वारा खोजा गया था। इसका नाम भी इसी प्रोजेक्ट से लिया गया है।
यह धूमकेतु हमारे सौरमंडल की सामान्य कक्षाओं में नहीं घूमता, बल्कि इसकी हाइपरबॉलिक ट्रेजेक्टरी है — यानी यह सूरज के गुरुत्वाकर्षण में बंधा नहीं है। यही वजह है कि यह धूमकेतु पृथ्वी या मंगल के पास से गुजरते हुए फिर से अंतरिक्ष की गहराइयों में लौट जाएगा।
अक्टूबर 3, 2025 को यह मंगल ग्रह से करीब 28 मिलियन किलोमीटर (0.19 AU) की दूरी से गुज़रा। यह दूरी खगोलीय दृष्टि से बेहद कम मानी जाती है, जिससे Tianwen-1 को इसे पास से देखने का दुर्लभ मौका मिला।
Alien की चर्चा क्यों हुई?
जब यह खबर आई कि मंगल की कक्षा में घूम रहे चीनी यान ने किसी चमकते ऑब्जेक्ट की तस्वीरें ली हैं, तो इंटरनेट पर लोगों ने तुरंत इसे “एलियन स्पेसशिप” कह दिया।
NASA की ओर से कोई स्पष्ट बयान न आने के कारण अटकलें और बढ़ गईं। कुछ लोगों ने कहा कि इसकी आकृति किसी उड़नतश्तरी (UFO) जैसी लगती है, तो कुछ ने इसे किसी विदेशी सभ्यता का सिग्नल बताया।
हालांकि वैज्ञानिक समुदाय ने इन अफवाहों को खारिज किया है। खगोलविदों के अनुसार, यह एक प्राकृतिक धूमकेतु है जिसकी गैस और धूल की परतें सूर्य की किरणों से प्रकाशित होकर चमक रही हैं।
NASA और ESA भी कर रहे हैं निगरानी
इस धूमकेतु की गतिविधियों को सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि NASA, European Space Agency (ESA) और कई अन्य देशों की ऑब्जर्वेटरीज भी मॉनिटर कर रही हैं।
NASA के Hubble और James Webb Space Telescope ने भी इसकी कुछ तस्वीरें कैद की हैं, जिन्हें अमेरिकी सरकारी शटडाउन खत्म होने के बाद जारी किया जाएगा। वहीं, ESA का ExoMars Trace Gas Orbiter भी इस धूमकेतु की गैस संरचना का अध्ययन कर रहा है।
इन सभी ऑब्ज़र्वेशन्स का उद्देश्य यह समझना है कि इस धूमकेतु में कौन-कौन से रासायनिक तत्व मौजूद हैं और क्या यह सामग्री किसी दूसरे तारे के ग्रहों की परतों से आई है।
Tianwen-1 की बड़ी उपलब्धि
Tianwen-1 के लिए इस धूमकेतु की तस्वीर लेना आसान नहीं था। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह ऑब्जेक्ट मंगल की सतह से हज़ारों गुना कम चमकीला था।
इतनी हल्की रोशनी के बावजूद, चीनी वैज्ञानिकों ने उच्च-संवेदनशील कैमरों और सटीक ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से यह कारनामा कर दिखाया। यह उपलब्धि न केवल चीन की स्पेस टेक्नोलॉजी का प्रमाण है बल्कि यह भी दिखाती है कि मंगल से अंतरिक्ष के गहरे रहस्यों को समझने का नया युग शुरू हो चुका है।
🚨 BREAKING: A NEW INTERSTELLAR OBJECT JUST APPEARED BETWEEN EARTH AND 3I/ATLAS! ☄️
Astronomers discovered C/2025 V1 (Borisov) on Nov 2 — another hyperbolic-orbit comet (e>1.009) from outside our solar system, found by the same guy who spotted 2I/Borisov! 39 62
It’s literally… pic.twitter.com/Sz3yHJ98Ix— Carlos Escobar NFT METAVERSE (@zozyalco) November 7, 2025
कैसा दिखता है Comet 3I/Atlas?
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह धूमकेतु आकार में कई सौ मीटर से लेकर एक किलोमीटर तक चौड़ा है। इसका केंद्र एक बर्फीला ठोस नाभिक है, जो सौर विकिरण के कारण गैस और धूल छोड़ता है। यही गैस एक चमकदार पूंछ (tail) बनाती है, जो अंतरिक्ष में दूर तक फैली हुई दिखाई देती है।
इसकी हाइपरबॉलिक ट्रेजेक्टरी दर्शाती है कि यह किसी दूसरे तारे के गुरुत्वाकर्षण से निकला हुआ है और अब हमारे सौरमंडल से होकर आगे बढ़ रहा है — शायद फिर कभी लौटे भी नहीं।
Standby for a cosmic show! 🌌
The interstellar visitor 3I/ATLAS, hurtling through our Solar System at over 130,000 mph, isn’t just a fleeting comet it’s a galactic storyteller.
🔭Latest update:
• Confirmed hyperbolic orbit → came from beyond our Sun.
• Spectroscopy shows… pic.twitter.com/twREMw2nD2— KAMLESH DABHHI (@kamleshdabhhi) October 30, 2025
वैज्ञानिकों की उत्तेजना और उम्मीदें
दुनिया भर के वैज्ञानिक इस खोज से बेहद उत्साहित हैं। उनका मानना है कि इस तरह के इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट्स हमें यह समझने में मदद करते हैं कि दूसरे तारामंडलों में ग्रह और धूमकेतु कैसे बनते हैं।
Comet 3I/Atlas का अध्ययन इस बात की झलक देगा कि ब्रह्मांड में पदार्थ की संरचना कितनी विविध है। यह धूमकेतु हमारे सौरमंडल का हिस्सा नहीं, बल्कि किसी और तारे के आस-पास बना था — यानी इसकी सामग्री हमें उस “दूसरी दुनिया” की झलक दिखा रही है, जो अरबों किलोमीटर दूर है।
एलियन नहीं, बल्कि ब्रह्मांड का संदेशवाहक
भले ही सोशल मीडिया पर इसे “एलियन जहाज” कहा जा रहा हो, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए 3I/Atlas एक कॉस्मिक मैसेंजर है — यानी ब्रह्मांड का दूत। यह हमें याद दिलाता है कि हमारा सौरमंडल इस विशाल ब्रह्मांड का सिर्फ एक छोटा-सा कोना है।
यह धूमकेतु न तो एलियन का जहाज है और न ही किसी सभ्यता का संकेत, बल्कि यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि कहीं न कहीं, बहुत दूर, हमारे जैसे ही ग्रह और जीवन हो सकते हैं।
चीन की भूमिका और भविष्य की दिशा
Tianwen-1 की यह सफलता चीन के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल Mars Exploration में उसकी क्षमता दिखाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अब अंतरिक्ष अनुसंधान में सिर्फ अमेरिका या यूरोप ही नहीं, बल्कि चीन भी बड़ी भूमिका निभा रहा है।
भविष्य में चीन इस धूमकेतु पर स्पेक्ट्रोस्कोपिक स्टडी करने की योजना बना रहा है, जिससे इसकी रासायनिक संरचना और गैसों की प्रकृति समझी जा सकेगी।
रहस्य जारी है, लेकिन डर की नहीं, जिज्ञासा की कहानी है यह
Comet 3I/Atlas भले ही सोशल मीडिया पर “एलियन स्पेसशिप” के नाम से वायरल हो गया हो, लेकिन असल में यह ब्रह्मांड की अनोखी कहानी है। यह हमें सिखाता है कि अंतरिक्ष में अभी बहुत कुछ ऐसा है जो हमारी समझ से परे है।
यह धूमकेतु हमें अपने सौरमंडल की सीमाओं से बाहर झाँकने का मौका दे रहा है — जहाँ से यह शायद किसी दूसरे सूरज, किसी दूसरे ग्रह या किसी अनजान दुनिया से आया है।
मंगल से ली गई ये तस्वीरें विज्ञान के इतिहास में दर्ज रहेंगी, क्योंकि उन्होंने हमें एक बार फिर यह एहसास कराया कि ब्रह्मांड का हर कोना जीवन, रहस्य और संभावनाओं से भरा हुआ है।
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