Deepti Sharma Cricketer: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई शानदार खिलाड़ी दिए हैं, और उनमें से एक नाम है दीप्ति शर्मा। अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी, सटीक गेंदबाजी और दमदार फील्डिंग के लिए मशहूर दीप्ति आज भारतीय महिला क्रिकेट की रीढ़ बन चुकी हैं। आइए जानते हैं उनके जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से।

शुरुआती जीवन और परिवार:
दीप्ति शर्मा का जन्म 24 अगस्त 1997 को सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता भगवान शर्मा भारतीय रेलवे में कार्यरत थे, और मां एक गृहिणी हैं। दीप्ति बचपन से ही क्रिकेट के प्रति बेहद जुनूनी थीं। उनके बड़े भाई सुमित शर्मा खुद क्रिकेट खेलते थे और वही दीप्ति की प्रेरणा बने। दीप्ति अक्सर अपने भाई के साथ गली क्रिकेट खेलती थीं और धीरे-धीरे इस खेल में निपुण होती चली गईं।
जब उन्होंने पहली बार क्रिकेट बैट उठाया, तब उन्होंने यह नहीं सोचा था कि एक दिन वे भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच खेलेंगी। पर उनकी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास ने उन्हें यहां तक पहुंचाया।
क्रिकेट करियर की शुरुआत:
दीप्ति शर्मा ने अपने घरेलू करियर की शुरुआत उत्तर प्रदेश महिला टीम से की। उनके शानदार प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया और जल्द ही उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह मिल गई।
उन्होंने 28 नवंबर 2014 को वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे इंटरनेशनल (ODI) मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया। उस समय वे मात्र 17 वर्ष की थीं। इसके बाद उन्होंने टी20 और टेस्ट फॉर्मेट में भी शानदार प्रदर्शन किया।

दीप्ति शर्मा की बल्लेबाजी:
दीप्ति बाएं हाथ की बल्लेबाज हैं, जो स्थिर और संतुलित बल्लेबाजी के लिए जानी जाती हैं। वे टीम को जरूरत पड़ने पर संभालने वाली खिलाड़ी हैं। उन्होंने कई मौकों पर मध्यक्रम में आकर भारत को संकट से बाहर निकाला है।
2017 में आयरलैंड के खिलाफ उन्होंने 188 रनों की पारी खेली थी, जो महिला वनडे क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़ी पारियों में से एक है। उस मैच में उन्होंने 160 गेंदों पर 27 चौके लगाए थे। यह रिकॉर्ड पारी आज भी उनकी पहचान का हिस्सा है।
गेंदबाजी में महारत:
दीप्ति सिर्फ एक अच्छी बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि एक शानदार गेंदबाज भी हैं। वे ऑफ-स्पिन गेंदबाज हैं और अपनी सटीक लाइन और लेंथ के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कई बार अपने स्पिन जाल में दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाजों को फंसाया है।
2019 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 6 विकेट लेकर अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। उनका यह प्रदर्शन भारतीय महिला क्रिकेट इतिहास के बेहतरीन गेंदबाजी प्रदर्शनों में गिना जाता है।
विश्व कप और प्रमुख टूर्नामेंट्स में प्रदर्शन:
दीप्ति शर्मा ने 2017 महिला विश्व कप में शानदार प्रदर्शन किया। उस टूर्नामेंट में भारत फाइनल तक पहुंचा था और दीप्ति ने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ महत्वपूर्ण 25 रन बनाए और 3 विकेट झटके। हालांकि भारत इंग्लैंड से फाइनल हार गया, लेकिन दीप्ति के प्रदर्शन की खूब सराहना हुई।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भी उन्होंने भारत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और टीम को सिल्वर मेडल जिताने में मदद की। इसके अलावा एशिया कप 2023 में भी उन्होंने कई निर्णायक स्पेल डाले।
Meet your Player of the Tournament ✨ Deepti Sharma pic.twitter.com/Dbi0MWgJY0
— ESPNcricinfo (@ESPNcricinfo) November 2, 2025
विवाद और हाइलाइट मोमेंट्स:
दीप्ति शर्मा का नाम तब सुर्खियों में आया जब उन्होंने 2022 में इंग्लैंड के खिलाफ “मांकड रन आउट” किया था। उन्होंने चार्ली डीन को नॉन-स्ट्राइकर एंड पर आउट किया था, जो क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गया। हालांकि यह आउट नियमों के अनुसार वैध था, पर इस पर नैतिक बहस छिड़ गई। दीप्ति ने शालीनता के साथ अपने फैसले को सही ठहराया और भारतीय टीम के साथ मजबूती से खड़ी रहीं।
व्यक्तिगत जीवन और प्रेरणा:
दीप्ति शर्मा बेहद साधारण जीवन जीती हैं। उन्हें साधारण खाना पसंद है और वे अक्सर कहती हैं कि सफलता का असली राज़ “अनुशासन” में है। वे अपने परिवार को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती हैं और मानती हैं कि उनके माता-पिता और भाई ने उन्हें हर कदम पर समर्थन दिया।
वे बच्चों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं और भारत में महिला क्रिकेट को और सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
पुरस्कार और सम्मान:
दीप्ति शर्मा को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए कई सम्मान मिले हैं:
- बीसीसीआई द्वारा सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर पुरस्कार
- उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार
- कई बार “Player of the Match” और “Player of the Series” अवॉर्ड
दीप्ति शर्मा आज भारतीय महिला क्रिकेट का एक भरोसेमंद नाम हैं। उन्होंने अपने दम पर यह साबित किया है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। उनकी मेहनत, निडरता और आत्मविश्वास आज की पीढ़ी की बेटियों के लिए प्रेरणा है।
वह न केवल एक बेहतरीन ऑलराउंडर हैं बल्कि भारत की उस नई सोच की प्रतीक हैं जो कहती है-
“सपने वही सच होते हैं, जिनके लिए नींद कुर्बान की जाती है।”
दीप्ति शर्मा की कहानी एक ऐसे खिलाड़ी की है जिसने छोटे शहर से निकलकर दुनिया के क्रिकेट मंच पर अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा। आने वाले वर्षों में उनसे और भी बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद की जाती है।
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