Most Runs in ODI Cricket: सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले दिग्गज बल्लेबाज़

Most Runs in ODI Cricket: 30 जून 1971 को जब पहली बार पुरुषों की एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेली गई थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक बल्लेबाज़ कितना बड़ा रिकॉर्ड बना सकता है। आज, Sachin Tendulkar का नाम उस रिकॉर्ड-बुक के शीर्ष पर चमकता है – वह “सबसे ज़्यादा रन” का रिकॉर्डधारी हैं। आइए जानते हैं इस रिकॉर्ड के पीछे का सफर, और उन महान खिलाड़ियों के बारे में जो उसके नज़दीक आए।

Most Runs in ODI Cricket

भारत के लिए खेलते हुए सचिन तेंदुलकर ने ८९-२०१२ के बीच 463 मैचों में कुल 18,426 रन बनाए।

  • उन्होंने 452 पारियों में यह रिकॉर्ड बनाया।

  • उनकी औसत लगभग 44.83 की रही।

  • इस अवधि में उन्होंने 49 शतक और 96 अर्धशतक भी बनाए। 
    उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें अकेला ऐसा बल्लेबाज़ बना दिया जिसे इतनी बड़ी संख्या में रन बनाने का गौरव प्राप्त है।

Most Runs in ODI Cricket: दूसरे स्थान पर कौन-कौन आए?

जब सचिन ने इतना बड़ा अंतर बना लिया, तो दूसरे पायदान पर पहुँचने वाले खिलाड़ियों ने भी अपनी छाप छोड़ी है।

स्थान खिलाड़ी टीम रन
2 Kumar Sangakkara श्रीलंका ~14,234
3 Virat Kohli भारत ~14,181 (लगभग)
4 Ricky Ponting ऑस्ट्रेलिया ~13,704
5 Sanath Jayasuriya श्रीलंका ~13,430

ये आंकड़े बताते हैं कि “दस हजार रन” का मील-पत्थर पार कर जाना कोई बड़ी बात नहीं—लेकिन “चालीस-पचास हजार से आगे निकलना” वाकई विशेष होता है।

भारत के लिए ODI में सर्वाधिक रन बनाने वालों में रोहित शर्मा का स्थान:

  • रोहित शर्मा ने 2025 अक्टूबर तक भारत के लिए ODI में सर्वाधिक रन बनाने वालों की सूची में तीसरे स्थान हासिल कर लिया है।

  • उदाहरण के लिए, एक रिपोर्ट के अनुसार:

    “267 पारी में रोहित ने 11,249 रन बनाए… उन्होंने पूर्व कप्तान Sourav Ganguly (11,221 रन) को पीछे छोड़ा।”

  • शीर्ष पर अभी भी Sachin Tendulkar हैं (18,426 रन) और दूसरे स्थान पर Virat Kohli हैं।

Most Runs in ODI Cricket

रिकॉर्ड के मायने – क्यों खास है ये?

  1. अवधि का खेल: एक दिवसीय क्रिकेट में 100+ मैच खेलने वाले खिलाड़ी कभी-कभी दोहरा दबाव झेलते हैं – प्रदर्शन लगातार करना और इससे भी बढ़कर, फिटनेस बनाए रखना। सचिन ने 20+ वर्षों में यह रन बनाए।

  2. परिस्थितियों का मर्म: अलग-अलग देशों में खेलने का अनुभव, विभिन्न पिचें, मौसम व चुनौतियाँ – इन सबका सामना करना आसान नहीं।

  3. रन का निरंतर प्रवाह: सिर्फ एक-दो सीजन में रिकॉर्ड नहीं बनाया गया; यह लंबी अवधि से चलता आया सफर है।

  4. अनजाने दबाव: टीम की उम्मीदें, व्यक्तिगत लक्ष्य, मीडिया व फैंस – इस सब के बीच खुद को संभालना आसान नहीं।

भविष्य में क्या संभव है?

आज के समय में भी Virat Kohli जैसे खिलाड़ी रिकॉर्ड के करीब हैं, लेकिन सचिन का रिकॉर्ड इतना ऊँचा है कि उसे पार करना आसान नहीं दिखता। एक उपयोगकर्ता टिप्पणी में लिखा है:

“18,426 रन. 49 शतक. 463 मैच. यह रिकॉर्ड नहीं – एक गाथा है।”

तो सवाल यह है: क्या कोई भविष्य में इस रिकॉर्ड को चुनौती दे पाएगा? खिलाड़ियों की संख्या कम नहीं, पर आधुनिक क्रिकेट में विविध फॉर्मेट-भार, फ्रेंचाइजी लीग का बोझ और फिटनेस चुनौतियाँ भी बढ़ रही हैं।

जब हम “सबसे ज़्यादा रन” की बात करते हैं, तो सिर्फ संख्याएँ नहीं देखना चाहिए—उनका अर्थ, उस दौड़ में कितनी मेहनत, कितनी चुनौतियाँ और कितनी समय-सिंकता हुई है, उस पर भी ध्यान देना चाहिए। सचिन तेंदुलकर ने वो किया जिसके बारे में अक्सर कहा जाता है: “एक पीढ़ी ने देखा, अगली पीढ़ी ने सुनना शुरू किया।”

तो अगली बार जब आप किसी खेल को देखें, चाहे वो क्रिकेट हो या कोई अन्य खेल, याद रखें – रिकॉर्ड सिर्फ आंकड़े नहीं होते; वे मेहनत, लगन और समय की निशानी होते हैं।

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