8th Pay Commission Central Government: देश में हर दस साल में केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों (और पेंशनभोगियों) के वेतन, भत्ते व सेवानिवृत्ति लाभों की समीक्षा करने हेतु एक Pay Commission गठित होती है। वर्तमान समय में सातवां वेतन आयोग अपनी अवधि पूरी कर रहा है, और सरकार ने जनवरी 2025 में 8वां वेतन आयोग बनाने की स्वीकृति दी है।

सरकार ने क्या कहा है? | 8th Pay Commission Central Government
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि केंद्र सरकार ने 8वां वेतन आयोग बनाने की मंज़ूरी दे दी है।
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सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू हुई थीं, और उसकी अवधि दिसंबर 2025 तक समाप्त होगी। इसलिए सरकार समय रहते अगले आयोग का गठन करना चाहती है ताकि बदलावों को सही तरीके से लागू किया जा सके।
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अभी तक आयोग के Terms of Reference (TOR) या अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है।
कर्मचारियों की उम्मीदें और मांगें:
सरकारी कर्मचारियों की तरफ से कुछ मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
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मिनिमम सैलरी और फिटमेंट फैक्टर
कर्मचारियों का कहना है कि फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाया जाए — जैसे कि कुछ रिपोर्टों में इसका अनुमान 2.86 का लगाया जा रहा है। इससे न्यूनतम Basic Pay में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। -
भत्ते (Allowances) और महंगाई भत्ता (Dearness Allowance, DA)
भत्तों-HRA, ट्रांसपोर्ट, अन्य क्षेत्रीय भत्तों की समीक्षा और बढ़ोतरी की उम्मीद है। DA बढ़ने की उम्मीद भी है क्योंकि महंगाई दर लगातार बढ़ी है। -
पेंशनभोगियों के लिए सुधार
पुराने पेंशन सिस्टम की बहाली, सेवाकाल के बाद मिलने वाले लाभों में समानता, और पुरानी पेंशन प्रणाली की वापसी की मांगें भी उठ रही हैं। -
जल उम्मीद की तिथि
कर्मचारियों का कहना है कि नई वेतन संरचना 1 जनवरी 2026 से लागू होनी चाहिए ताकि अंतर कम हो सके।
संभावित बदलाव: क्या-क्या हो सकता है:
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Fitment Factor में वृद्धि: अनुमान है कि 7वें वेतन आयोग की फिटमेंट फैक्टर (2.57) से इसे बढ़ाकर 2.86 या आसपास किया गया तो बेसिक पे में बढ़ोतरी होगी।
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भत्तों में समंजस्य: हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट, और अन्य भत्तों में वृद्धि संभावित है, खासकर महँगी-हून वाली जगहों के लिए।
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सेवानिवृत्ति लाभों में सुधार: पेंशन, पुराने पेंशनर्स की स्थिति, और पुराने वेटेज़ सेवानिवृत्ति नियमों की समीक्षा हो सकती है।
किन बातों का इंतज़ार अभी है?
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Terms of Reference (TOR): आयोग के सामने किन-किन विषयों को रखना है, किन विभागों से इनपुट लेना है, किन कर्मचारियों को शामिल करना है — ये स्पष्ट नहीं है।
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कार्य-समय (Timeline): आयोग की रिपोर्ट कब आएगी, और नई वेतन संरचना कब लागू होगी — यह अभी तय नहीं है। रिपोर्ट तैयार होने में पिछले आयोगों को 2-3 साल लगे थे।
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आर्थिक बोझ और बजट प्रावधान: सरकार को यह तय करना होगा कि कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी/भत्ते और पेंशन कैसे मूव करेंगी, बजट पर क्या असर पड़ेगा, और इसे कहां से संसाधन जुटाए जाएँगे।
फायदे और चुनौतियाँ:
संभावित लाभ:
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कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों की खरीद-शक्ति में सुधार होगा।
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महंगाई के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।
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सरकारी नौकरियों की मांग बनी रहेगी क्योंकि बेहतर वेतन आकर्षण बढ़ाएगा।
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आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी — जब सैलरी बढ़ेगी तो खर्च बढ़ेगा, जिससे बाजार को बल मिलेगा।
संभावित चुनौतियाँ:
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सरकारी खजाने पर बोझ: वित्तीय दबाव बढ़ेगा, विशेष रूप से केंद्र तथा राज्यों के बजटों में।
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राजस्व की कमी: बढ़ी हुई सैलरी और भत्ते देने के लिए टैक्स राजस्व या अन्य राजस्व स्रोतों में इज़ाफ़ा चाहिए होगा।
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समय की देरी: जैसे कि पिछले आयोगों में हुआ, रिपोर्ट तैयार होने और लागू करने में देरी होने की संभावना बनी है। यह कर्मचारियों के बीच उत्साह के बाद निराशा भी ला सकती है।
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भत्तों और योगदानों में असमानता: भिन्न-भिन्न विभागों, क्षेत्रों और पदों के बीच न्याय की दृष्टि से अंतर हो सकता है, यदि समुचित समीक्षा और संतुलन न किया जाए।
उम्मीदों के बीच संतुलित नजर:
8वां वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी उम्मीद है। यह न सिर्फ़ एक आर्थिक लाभ की बात है, बल्कि जीवनयापन की बढ़ती चुनौतियों, Inflation, महंगाई और श्रम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक न्यायपूर्ण प्रणाली का हिस्सा हो सकती है।
लेकिन, इस उम्मीद को हकीकत में बदलने के लिए सरकार को पारदर्शी तरीके से काम करना होगा: TOR जल्दी जारी करना होगा, आयोग की रिपोर्ट समय पर तैयार होनी चाहिए और लागू करने के लिए बजट और संसाधन सुनिश्चित होने चाहिए।
यदि यह सही समय पर हो जाए, तो यह कर्मचारियों के लिए सिर्फ़ “वेतन वृद्धि” नहीं होगी, बल्कि एक संवैधानिक और सामाजिक विश्वास का इजाफ़ा होगा कि सरकार समय-समय पर अपने कर्मचारियों की गरिमा, श्रम की तुच्छता, और आर्थिक आवश्यकता को समझती है।
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