Peshawar Bomb Blast: पाकिस्तान एक बार फिर बम धमाके से दहल उठा है। पेशावर में हुए इस दर्दनाक विस्फोट ने पूरे देश को दहला कर रख दिया। जानकारी के अनुसार, इस धमाके में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई है और 4 कानून प्रवर्तन अधिकारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। शुरुआती जांच से यह साफ हो गया है कि इस हमले का निशाना पुलिस अधिकारी थे। विस्फोट में इस्तेमाल किया गया उपकरण पुलिस के रास्ते में लगाया गया था, जिससे यह घटना सुनियोजित और पूर्व-नियोजित लग रही है।
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Toggleपेशावर धमाके की भयावह तस्वीर | Peshawar Bomb Blast

धमाका इतना जोरदार था कि आस-पास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। लोग अपने घरों और दुकानों से बाहर निकलकर चीख-पुकार मचाने लगे। सड़क पर बिखरे खून के धब्बे और घायल लोगों की चीखें पूरे घटनास्थल को भयावह बना रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि धमाके की आवाज़ कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी और उसके बाद धुआं आसमान में फैल गया।
घायल पुलिसकर्मियों की हालत नाजुक
पेशावर के सीसीपीओ ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि धमाके में घायल हुए चारों कानून प्रवर्तन अधिकारियों की हालत गंभीर है। घायलों को तुरंत बचाव सेवाओं की मदद से पास के अस्पतालों में रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, घायलों में से कुछ की स्थिति नाजुक बनी हुई है और उन्हें गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में रखा गया है।
घटनास्थल पर सुरक्षा बलों की तैनाती
धमाके के तुरंत बाद बड़ी संख्या में सुरक्षा बल घटनास्थल पर पहुँच गए और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई। पुलिस और बम निरोधक दस्ता मौके पर मौजूद रहे और आसपास के इलाकों की गहन तलाशी ली गई। अधिकारियों ने कहा कि इस हमले के पीछे किसका हाथ है, यह अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन शुरुआती अंदेशा आतंकी संगठनों की ओर जाता है।
मृतकों की संख्या की पुष्टि
बलूचिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री बख्त मुहम्मद काकर ने इस हमले में हुई मौतों की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मरने वालों की संख्या नौ है और सभी घायलों को पास के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं पुलिस ने कहा कि धमाके के बाद अस्पताल में केवल आठ शव लाए गए थे, लेकिन बाद में एक और घायल ने दम तोड़ दिया।
अस्पताल में मातम का माहौल
घायलों और मृतकों के परिवार जैसे ही अस्पताल पहुंचे, वहां मातम का माहौल गहरा गया। चीख-पुकार और विलाप की आवाजों ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। डॉक्टरों और नर्सों की टीम लगातार घायलों का इलाज कर रही है लेकिन घायलों की गंभीर स्थिति के कारण मौत का खतरा टल नहीं पा रहा है।
पुलिस की जांच और साक्ष्य एकत्रीकरण
पुलिस के अनुसार, विस्फोट स्थल से सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं। बम निरोधक विशेषज्ञों ने घटनास्थल से कुछ धातु के टुकड़े और तार बरामद किए हैं, जिनसे बम बनाने के तरीके की जानकारी मिल सकती है। जांच अधिकारियों ने कहा कि यह धमाका अत्याधुनिक IED (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) से किया गया हो सकता है, जिसे सड़क किनारे लगाया गया था।
पाकिस्तान में बढ़ता आतंकी खतरा
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान आतंकी धमाकों से दहला हो। खासकर पेशावर और क्वेटा जैसे शहर लंबे समय से आतंकवादियों के निशाने पर रहे हैं। इससे पहले भी कई बार पुलिस, सुरक्षाबलों और सरकारी इमारतों को निशाना बनाया जा चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां कब तक इन हमलों को रोक पाने में विफल रहेंगी।
30 सितंबर का क्वेटा धमाका भी यादगार
पाकिस्तान में हाल ही में हुए धमाकों की बात करें तो 30 सितंबर को क्वेटा शहर में भीषण विस्फोट हुआ था। उस समय धमाके के बाद हमलावर ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी थी। इस हमले में 10 लोगों की मौत हो गई थी और 32 लोग घायल हुए थे। यह धमाका फ्रंटियर कॉप्स्र मुख्यालय के पास हुआ था, जिसके कारण इसे बड़ा आतंकी हमला माना गया।
क्वेटा धमाके के बाद दहशत
क्वेटा धमाके के बाद पूरे इलाके में धुआं और आग का गुबार फैल गया था। आस-पास के घरों और इमारतों की खिड़कियां टूट गईं। लोग सहमे हुए थे और कई घंटे तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। उस घटना के बाद से ही सुरक्षा बल अलर्ट पर थे, बावजूद इसके पेशावर में धमाका होना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
पाकिस्तान की जनता में आक्रोश
लगातार हो रहे धमाकों से पाकिस्तान की जनता बेहद नाराज़ है। लोग सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर क्यों आम नागरिक और सुरक्षाबल बार-बार आतंकवादियों का शिकार बन रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने सरकार से कठोर कदम उठाने की मांग की है।
आतंकी संगठनों की रणनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि इन धमाकों के पीछे आतंकी संगठनों की यह रणनीति हो सकती है कि वे पाकिस्तान में अस्थिरता फैलाना चाहते हैं। पेशावर जैसे संवेदनशील इलाकों को निशाना बनाकर यह संदेश दिया जा रहा है कि वे किसी भी समय कहीं भी हमला कर सकते हैं।
पाकिस्तान सरकार की चुनौती
पाकिस्तान सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन आतंकी हमलों को रोकने की है। सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही, खुफिया एजेंसियों को मजबूत करना होगा ताकि इस तरह की घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।
लोगों में फैला डर और असुरक्षा
धमाके के बाद पेशावर और आस-पास के इलाकों में लोग डरे हुए हैं। लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। स्कूलों और बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। कई इलाकों में सुरक्षा बलों ने गश्त बढ़ा दी है ताकि लोगों को सुरक्षित महसूस कराया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया
इस तरह की घटनाओं की निंदा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी की जा रही है। पड़ोसी देश भारत समेत कई देशों ने आतंकवाद को मानवता के लिए खतरा बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को अब गंभीरता से कदम उठाने होंगे क्योंकि यह केवल उसके लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए खतरा है।
शांति की ओर लंबा रास्ता
पेशावर बम धमाके ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान आतंकवाद की समस्या से जूझ रहा है और इसे खत्म करना आसान नहीं है। नौ मासूम लोगों की मौत और चार पुलिसकर्मियों के घायल होने की यह घटना केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म है। सवाल यह है कि पाकिस्तान कब तक इस तरह की घटनाओं से जूझता रहेगा और कब वहां के लोग सुरक्षित माहौल में सांस ले पाएंगे।
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