Chhattisgarh Naxal News: छत्तीसगढ़ में लंबे समय से नक्सलवाद की समस्या जड़ें जमाए हुए है। सरकार और सुरक्षा बलों की लगातार कोशिशों के चलते अब यह आंदोलन धीरे-धीरे कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में बीजापुर जिले से आई खबर ने नक्सली नेटवर्क को झकझोर दिया है। यहां एक ही बार में 103 नक्सलियों ने अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस सामूहिक आत्मसमर्पण से स्पष्ट होता है कि लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों और सरकारी नीतियों का असर जमीन पर दिखने लगा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में से 49 पर करोड़ों रुपये के इनाम घोषित थे। ये सभी कई गंभीर वारदातों और नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे थे। सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने न केवल हथियार डाले, बल्कि वे अब मुख्यधारा में लौटने का निर्णय भी कर चुके हैं। उनके द्वारा छोड़े गए हथियारों का मूल्य एक करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। यह घटना छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।
पुलिस की रणनीति और इंसेंटिव स्कीम | Chhattisgarh Naxal News

बीजापुर में आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को प्रोत्साहन राशि के तौर पर 50,000 रुपये का चेक प्रदान किया गया। यह राशि उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने और नया जीवन शुरू करने के लिए दी गई है। पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को अब समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
राज्य सरकार ने नक्सलियों को हथियार छोड़ने और सामान्य जीवन अपनाने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। इन योजनाओं के तहत नक्सलियों को पुनर्वास के अवसर मिलते हैं, ताकि वे अपराध की राह छोड़कर समाज का हिस्सा बन सकें। यही कारण है कि बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं।
कांकेर जिले में मुठभेड़
जहां बीजापुर से आत्मसमर्पण की खबर आई, वहीं कांकेर जिले से मुठभेड़ की बड़ी जानकारी सामने आई। 28 सितंबर को कांकेर जिले के छिंदखड़क गांव के जंगली पहाड़ी इलाके में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। यह मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब जिला रिजर्व गार्ड (DRG) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान संयुक्त रूप से तलाशी अभियान चला रहे थे। इस अभियान में गरियाबंद और कांकेर के सुरक्षा बल भी शामिल थे।
जंगल में छिपे नक्सलियों ने अचानक सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में तीन माओवादी मारे गए। इनमें दो पुरुष और एक महिला माओवादी शामिल थे। यह मुठभेड़ घंटों तक चली और सुरक्षाबलों ने इलाके में भारी दबाव बनाकर नक्सलियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
14 लाख का इनामी नक्सली ढेर
मारे गए नक्सलियों में से एक 14 लाख रुपये का इनामी था। यह नक्सली लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना हुआ था और कई हिंसक वारदातों में शामिल रहा था। कांकेर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) आईके एलेसेला ने पुष्टि की कि मुठभेड़ में ढेर हुए तीनों नक्सली संगठन के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे। इस घटना ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है और उनके नेटवर्क पर बड़ा असर पड़ा है।
एसएसपी ने बताया कि नक्सली छिंदखड़क के पहाड़ी इलाके में लंबे समय से छिपे हुए थे और वहां से सुरक्षा बलों पर हमलों की योजना बना रहे थे। लेकिन तलाशी अभियान के दौरान उनकी साजिश नाकाम कर दी गई और सुरक्षा बलों ने उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया।
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103 नक्सली, 106 करोड़ के ईनामी । पहली बार इतने नक्सलियों ने एक साथ… pic.twitter.com/7zMw9orscC
— Paramilitary News(CAPF)🇮🇳 (@Paramilitary_in) October 2, 2025
बरामद हथियार और सामग्री
मुठभेड़ के बाद जब सुरक्षा बलों ने इलाके की तलाशी ली तो वहां से तीनों नक्सलियों के शव बरामद किए गए। इसके अलावा मौके से भारी मात्रा में हथियार भी मिले। इनमें एक SLR (सेल्फ-लोडिंग राइफल), एक .303 राइफल, एक 12 बोर बंदूक और अन्य नक्सली सामग्री शामिल है। इन हथियारों से स्पष्ट होता है कि नक्सली बड़ी कार्रवाई की योजना बना रहे थे, लेकिन सुरक्षा बलों की तत्परता ने उनकी योजना को विफल कर दिया।
बरामद किए गए हथियारों को देखकर सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नक्सलियों का यह समूह आस-पास के गांवों में दहशत फैलाने और सुरक्षा बलों पर हमले करने की फिराक में था। हालांकि अब इन हथियारों के मिलने से उनकी साजिश नाकाम हो गई है।
नक्सलियों पर लगातार दबाव
छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षा बलों ने बीते कुछ वर्षों में नक्सलियों पर लगातार दबाव बनाया है। बड़े स्तर पर चलाए जा रहे तलाशी अभियानों और विकास कार्यों ने नक्सलियों के प्रभाव को कमजोर किया है। बीजापुर और कांकेर में हुई हालिया घटनाओं से यह साफ है कि नक्सली अब बैकफुट पर आ गए हैं।
जहां एक ओर आत्मसमर्पण की घटनाएं बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर मुठभेड़ों में उनके बड़े नेताओं और इनामी नक्सलियों का सफाया हो रहा है। यह बदलाव इस ओर इशारा करता है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद की जड़ें उखाड़ फेंकना संभव हो सकता है।
समाज की मुख्यधारा में वापसी
बीजापुर में आत्मसमर्पण करने वाले 103 नक्सलियों ने यह साबित कर दिया है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास की राह अपनाना ही बेहतर है। पुलिस और प्रशासन ने इन नक्सलियों को समाज में पुनर्वास का अवसर देकर उनके जीवन को नई दिशा दी है।
आत्मसमर्पण करने वालों में कई ऐसे हैं जो वर्षों से जंगलों में भटक रहे थे और हिंसा का हिस्सा बने हुए थे। अब वे अपने परिवार और बच्चों के साथ एक सामान्य जीवन जीने का सपना देख रहे हैं। सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी सुरक्षा और पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी उठाई जाएगी।
नक्सलियों का भविष्य
विशेषज्ञों का मानना है कि आत्मसमर्पण और मुठभेड़ों की बढ़ती घटनाएं आने वाले समय में नक्सलवाद की स्थिति को और कमजोर कर देंगी। जो नक्सली अभी भी हथियारबंद हैं, वे भी जल्द ही आत्मसमर्पण की राह पकड़ सकते हैं, क्योंकि सुरक्षा बलों की रणनीति और सरकार की योजनाएं लगातार दबाव बना रही हैं।
यह भी साफ है कि नक्सलियों के पास अब दो ही विकल्प हैं—या तो हिंसा छोड़कर समाज में लौटें या फिर मुठभेड़ों में अपनी जान गंवाएं। बीजापुर और कांकेर की घटनाएं इसका सबसे बड़ा प्रमाण हैं।
छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुई घटनाएं इस बात की गवाही देती हैं कि नक्सलवाद का अंत अब दूर नहीं है। बीजापुर में 103 नक्सलियों का आत्मसमर्पण और कांकेर में 14 लाख के इनामी समेत तीन माओवादियों का ढेर होना इस ओर इशारा करता है कि सुरक्षा बलों की रणनीति सफल हो रही है।
जहां आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार से नई जिंदगी शुरू करने का अवसर मिल रहा है, वहीं हथियार नहीं छोड़ने वालों को सुरक्षा बलों के अभियान का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले समय में अगर यही रफ्तार जारी रही तो नक्सलवाद का प्रभाव छत्तीसगढ़ से लगभग खत्म हो जाएगा और वहां शांति व विकास का नया दौर शुरू होगा।
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