Gandhi Shastri Jayanti 2025: आज का दिन भारतीय इतिहास में दो महान नेताओं की जयंती के रूप में दर्ज है। महात्मा गांधी, जिन्हें बापू के नाम से भी जाना जाता है, और भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन एक साथ मनाया जाता है। यह दिन न केवल उनके योगदान को याद करने का अवसर है, बल्कि उनके जीवन से प्रेरणा लेने का भी है।
महात्मा गांधी: सत्य, अहिंसा और स्वावलंबन के पुजारी | Gandhi Shastri Jayanti 2025

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों को अपनाकर ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष किया। गांधीजी का मानना था कि “साधे जीवन, उच्च विचार” से ही समाज में सुधार संभव है।
गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष किया और 1915 में भारत लौटे। भारत लौटने के बाद उन्होंने देशभर में भ्रमण किया और जनता की समस्याओं को समझा। 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने भारत के धनी वर्ग की आलोचना की और किसानों की दुर्दशा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत की मुक्ति केवल किसानों के सशक्तिकरण से संभव है, न कि वकीलों, डॉक्टरों या जमींदारों से।
गांधीजी के विचारों ने न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में लोगों को प्रेरित किया। उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और विभिन्न संस्थाएं उनके सिद्धांतों पर आधारित पाठ्यक्रम चला रही हैं। उदाहरण के लिए, गुजरात विद्यापीठ ने गांधीवादी दर्शन पर आधारित एक अंतर्राष्ट्रीय पाठ्यक्रम शुरू किया है, जिसमें 13 देशों के छात्र भाग ले रहे हैं।
लाल बहादुर शास्त्री: सादगी, ईमानदारी और नेतृत्व की मिसाल

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय (अब पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन) में हुआ था। उनका जीवन सादगी, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प का प्रतीक था। शास्त्री जी का मानना था कि “जय जवान, जय किसान” से ही देश की समृद्धि संभव है।
शास्त्री जी ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और कई आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने काशी विद्यापीठ से दर्शनशास्त्र और नीतिशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और ‘शास्त्री’ उपाधि प्राप्त की। उनका राजनीतिक सफर 1947 में भारत की आजादी के बाद शुरू हुआ। वे पहले उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव बने, फिर परिवहन एवं वित्त मंत्री। 1952 में नेहरू कैबिनेट में रेल मंत्री के रूप में उन्होंने भारतीय रेलवे को नई दिशा दी। लेकिन, 1956 के ट्रेन हादसे में 146 यात्रियों की मौत के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया, जो राजनीतिक ईमानदारी की अनुपम मिसाल है।
1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान शास्त्री जी ने ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया, जो आज भी प्रासंगिक है। इस नारे ने सेना का मनोबल बढ़ाया और किसानों को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। युद्ध के दौरान उन्होंने गेहूं उत्पादन बढ़ाने के लिए हरित क्रांति की नींव रखी, जबकि दूध उत्पादन को भी प्रोत्साहन दिया। उनका जीवन छोटे-छोटे कार्यों में भी नैतिकता और पारदर्शिता का प्रतीक था।
2 अक्टूबर 2025: एक ऐतिहासिक संयोग
इस वर्ष, 2 अक्टूबर को गांधी जयंती और दशहरा दोनों एक साथ मनाए जा रहे हैं। यह दुर्लभ संयोग है, क्योंकि गांधी जयंती हर साल 2 अक्टूबर को होती है, जबकि दशहरा हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाता है और इसकी तिथि हर साल बदलती रहती है। इस बार दोनों पर्व एक ही दिन पड़ने से उत्सवों का माहौल और भी खास हो गया है
सरकारी छुट्टियाँ और संस्थाओं की गतिविधियाँ
2 अक्टूबर को गांधी जयंती और दशहरा के कारण देशभर में सरकारी छुट्टियाँ घोषित की गई हैं। इस दिन बैंक, स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे। हालांकि, कुछ निजी संस्थाएँ और ऑनलाइन सेवाएँ सामान्य रूप से कार्यरत रहेंगी। इस दिन विभिन्न संस्थाएँ और संगठन गांधीजी और शास्त्री जी की जयंती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं, जिसमें उनके जीवन और योगदान पर चर्चा की जाती है।
मोदी जी ने दी शुभकामनाएं: गांधी जयंती 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। मोदी जी ने कहा कि
“गांधी जयंती प्रिय बापू के असाधारण जीवन को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिनके आदर्शों ने मानव इतिहास की दिशा बदल दी। उन्होंने यह दिखाया कि साहस और सादगी कैसे महान बदलाव के साधन बन सकते हैं। वे सेवा और करुणा की शक्ति में विश्वास करते थे, जो लोगों को सशक्त बनाने का मूल आधार है। हम उनके मार्ग का अनुसरण करते हुए विकसित भारत बनाने की अपनी यात्रा जारी रखेंगे।”
प्रधानमंत्री के इस संदेश ने देशवासियों को गांधीजी के आदर्शों को अपनाने और उनके सिद्धांतों के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा दी। यह केवल श्रद्धांजलि नहीं है, बल्कि उनके विचारों को दैनिक जीवन में उतारने का अवसर भी है।
Gandhi Jayanti is about paying homage to the extraordinary life of beloved Bapu, whose ideals transformed the course of human history. He demonstrated how courage and simplicity could become instruments of great change. He believed in the power of service and compassion as… pic.twitter.com/LjvtFauWIr
— Narendra Modi (@narendramodi) October 2, 2025
प्रेरणा का स्रोत
महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री दोनों ही अपने जीवन में सादगी, ईमानदारी और देशभक्ति के प्रतीक थे। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि यदि हम अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएँ और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें, तो हम अपने देश को प्रगति की ओर ले जा सकते हैं। इस दिन हम सभी को उनके योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए।
ऐसे और भी National लेखों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें! Khabari bandhu पर पढ़ें देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरें — बिज़नेस, एजुकेशन, मनोरंजन, धर्म, क्रिकेट, राशिफल और भी बहुत कुछ।
दशहरा 2025 शुभकामनाएँ: विजयदशमी पर अपने प्रियजनों को भेजें खास संदेश
Hurun Rich List 2025: भारत में अरबपतियों की बाढ़, अब 350 बिलेनियर, संपत्ति स्पेन की GDP से भी ज्यादा