Chennai Thermal Power Plant Accident: चेन्नई थर्मल पावर प्लांट हादसे में 9 मजदूरों की मौत, सीएम स्टालिन और पीएम मोदी ने किया मुआवजे का ऐलान

Chennai Thermal Power Plant Accident: तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के पास मंगलवार को एक थर्मल पावर प्लांट में बड़ा हादसा हुआ। नॉर्थ चेन्नई के वायल्लूर क्षेत्र में निर्माणाधीन पावर प्लांट में आर्च स्ट्रक्चर गिरने से कम से कम 9 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल है।

यह हादसा थिरुवल्लूर जिले के पोन्नेरी के पास हुआ, जहां भेल कंपनी द्वारा बिजली संयंत्र का निर्माण कार्य चल रहा था।

हादसा कैसे हुआ? Chennai Thermal Power Plant Accident 

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना उस समय हुई जब इमारत की चौथी मंजिल पर लगभग 30 फीट की ऊंचाई पर मजदूर काम कर रहे थे। करीब 30 से ज्यादा मजदूर वहां मौजूद थे।

निर्माण के दौरान बड़ा आर्च स्ट्रक्चर अचानक गिर गया और इसके साथ ही बना मचान भी ढह गया। मजदूर देखते ही देखते मलबे में दब गए। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बचाव दल ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और शवों को निकालकर स्टेनली अस्पताल पहुंचाया गया।

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असम के मजदूर बने हादसे के शिकार

इस हादसे में जान गंवाने वाले ज्यादातर मजदूर असम राज्य के रहने वाले बताए जा रहे हैं। वे रोजी-रोटी की तलाश में चेन्नई आए थे और थर्मल पावर प्लांट की साइट पर काम कर रहे थे।

उनके परिवार अब गहरे सदमे में हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मृतकों के शवों को उनके गृह राज्य भेजने का आदेश दिया है।

सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

हादसे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि काम के दौरान उचित सेफ्टी प्रोटोकॉल और मजबूत मचान का इंतजाम नहीं था।

विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण कार्यों में अक्सर सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे मजदूरों की जान पर खतरा मंडराता है।

सीएम स्टालिन ने जताया दुख, किया मुआवजे का ऐलान

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर लिखा:

“मुझे यह समाचार सुनकर गहरा दुख हुआ कि एन्नोर में भेल कंपनी द्वारा बनाए जा रहे बिजली संयंत्र के निर्माण कार्य के दौरान हुई दुर्घटना में असम राज्य के नौ श्रमिकों की मृत्यु हो गई। मैं उन सभी के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।”

सीएम ने आगे कहा कि मृतक श्रमिकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा और घायल को पूरा इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।

साथ ही, अधिकारियों को तुरंत घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य करने के निर्देश दिए गए।

पीएम मोदी ने जताया शोक, पीएम राहत कोष से मदद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर गहरा शोक जताया। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया:

“तमिलनाडु के चेन्नई में इमारत गिरने की घटना से दुखी हूं। इस मुश्किल घड़ी में मेरा पूरा साथ प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के साथ है। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।”

पीएम मोदी ने घोषणा की कि मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता पीएम राहत कोष से दी जाएगी।

घटनास्थल पर बचाव और राहत कार्य

जैसे ही हादसे की सूचना मिली, दमकल विभाग, पुलिस और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे। मलबे में दबे मजदूरों को निकालने के लिए क्रेन और मशीनों का इस्तेमाल किया गया।

घटनास्थल पर अब भी मलबा हटाने का कार्य जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और मजदूर अंदर फंसा न हो।

देशभर में शोक और गुस्सा

इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सोशल मीडिया पर लोगों ने हादसे पर गहरा दुख जताया और सवाल उठाए कि आखिर मजदूरों की सुरक्षा को क्यों नजरअंदाज किया गया।

ट्रेड यूनियनों और मजदूर संगठनों ने भी कड़ा रुख अपनाया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मजदूरों की जिंदगी पर हमेशा खतरा

भारत में निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूर अक्सर जोखिम भरे माहौल में काम करते हैं।

  • सुरक्षा उपकरणों की कमी,
  • सुरक्षा मानकों का पालन न होना,
  • और ठेकेदारों की लापरवाही अक्सर ऐसे हादसों की वजह बनती है।

तमिलनाडु जैसे औद्योगिक राज्यों में रोजाना हजारों मजदूर प्लांट और फैक्ट्रियों में काम करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के इंतजाम अभी भी अपर्याप्त हैं।

हादसों का काला इतिहास

चेन्नई और आसपास के इलाकों में पहले भी कई बड़े हादसे हो चुके हैं।

  • 2020 में नेयवेली थर्मल पावर स्टेशन में बॉयलर ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी।
  • 2014 में चेन्नई बिल्डिंग हादसा हुआ था, जिसमें 60 मजदूरों की जान गई थी।

आज का यह हादसा फिर साबित करता है कि जब तक सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तब तक मजदूरों की जान पर खतरा बना रहेगा।

सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी

इस हादसे ने सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • क्या पावर प्लांट साइट पर समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट हुआ था?
  • क्या मजदूरों को हेलमेट, हार्नेस और सेफ्टी गियर दिए गए थे?
  • क्या इंजीनियरिंग डिजाइन और मचान की मजबूती की जांच की गई थी?
  • अगर इन सवालों का जवाब “नहीं” है, तो यह सिर्फ हादसा नहीं बल्कि लापरवाही से हुई मौतें हैं।

सुरक्षा से बड़ा कुछ नहीं

चेन्नई का यह हादसा फिर याद दिलाता है कि विकास और निर्माण कार्य जितना जरूरी है, उतनी ही जरूरी है मजदूरों की सुरक्षा।

9 मजदूरों की मौत सिर्फ आंकड़ा नहीं है, बल्कि 9 परिवारों की दुनिया उजड़ गई है।

सरकार ने मुआवजे का ऐलान किया है, लेकिन असली न्याय तभी होगा जब जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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