TVK Vijay rally stampede: भगदड़ ने ली 36 जानें, पीएम मोदी ने जताया शोक

TVK Vijay rally stampede: तमिलनाडु के करूर जिले में शनिवार शाम को ऐसा दृश्य सामने आया जिसे देख जाना मुश्किल है। अभिनेता-राजनेता विजय की रैली के दौरान भगदड़ मच गई, और इस त्रासदी ने 36 जीवन लील लिए। इस हादसे ने तमिलनाडु और भारत के राजनीति-दृश्य को हिलाकर रख दिया। मृतकों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

रैली स्थल वेलुसमयपुरम का मैदान उस वक्त भारी भीड़ से भरा था, लोग विजय को नज़दीक से देखने की आस में उमड़ पड़े थे। लेकिन जैसे ही परिस्थिति नियंत्रण से बाहर हुई, अफरा-तफरी फैल गई। तस्वीरें और वीडियो हमें यह बताते हैं कि भगदड़ कितनी तीव्र थी — लोग एक-दूसरे के ऊपर चढ़े, गिर पड़े और घायल हो गए।

eyewitnesss कह रहे हैं कि “भीड़ को नियंत्रित करना लगभग नामुमकिन था” क्योंकि लोग विजय की बस की ओर बढ़ते चले गए। विजय की बहुदिन देरी ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया।

पीएम मोदी से लेकर सीएम तक— प्रतिक्रियाएँ | TVK Vijay rally stampede

जब यह हादसा सुनने में आया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत दुख प्रकट किया। उन्होंने कहा यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है। मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना दी और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी संवेदना जताई। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की जान जाना दिल दहला देने वाला है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को सांत्वना दी एवं घायलों की स्वस्थ‍ता के लिए प्रार्थना की।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने घटना को गंभीर देखा। उन्होंने जिला कलेक्टर और अन्य अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि तत्काल घायलों को सर्वोत्तम मदद मिले। उन्होंने कहा कि विस्तारपूर्वक जांच हो, जिम्मेदारों की पहचान हो और भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।

एआईएडीएमके के नेता एके पलानीस्वामी ने इसे चौंकाने वाला और दुखद कहा, और सरकार से मांग की कि घायलों को बेहतर इलाज मिले तथा मृतकों के परिवारों को मुआवज़ा मिले।

घटना की जटिलता — कैसे मची अफरा-तफरी?

TVK Vijay rally stampedeTVK Vijay rally stampede

मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि बिजली गुल होने की खबर फैली और लोगों में भय उत्पन्न हुआ। समय पर विजय का पहुंचना न होना और बड़े पैमाने पर भीड़ का बढ़ना स्थितियों को भयानक बना डाला।

रैली स्थल की व्यवस्था अपर्याप्त थी — निकासी मार्ग सीमित थे, भीड़ नियंत्रण के उपाय कम थे और सुरक्षा बल पर्याप्त नहीं थे। जब लोग विजय को नज़दीक देखना चाहते हुए आगे बढ़े, तो भीड़ ने घुटन की स्थिति बना दी और भगदड़ शुरू हो गई।

कुछ लोग बेजार होकर गिर पड़े, और पीछे की ओर आने वाली भीड़ ने उन्हें कुचल डाला। अस्पतालों तक पहुंचने में दिक्कत हुई क्योंकि मार्ग बंद थे और एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ पाए।

कुछ बयानों से यह भी पता चला कि विजय का बस स्थल पर आने का समय देरी से हुआ, जिससे पहले से जमा हुई भीड़ उग्र हो गई।

मृतकों और घायलों का हाल

मुख्य रिपोर्टों के अनुसार, इस हादसे में कम से कम 36 लोगों की मौत हुई। इनमें 8 बच्चे शामिल बताए गए हैं। महिलाएं भी अधिक संख्या में हैं। घायलों की संख्या 40 से ऊपर है, और उनमें कई की स्थिति गंभीर है।

हत्या की जगह पर प्राथमिक चिकित्सा जारी है, कई लोगों को पास के अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है। दांतों, हड्डियों, चोटों और श्वसन संबंधी समस्याओं के साथ अस्पतालों में भर्ती हैं।

परिजनों को जागरूक करने के लिए हेल्पलाइन्स जारी की गई हैं ताकि वे घायलों की स्थिति जान सकें और मृतकों के स्वजन पहचान सकें।

जांच, जिम्मेदारी और मुआवज़ा

तमिलनाडु सरकार ने इस घटना की गहराई से जांच के लिए एक जांच आयोग का गठन किया है, जिसका नेतृत्व पूर्व न्यायाधीश अरुणा जगदीशान को दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने मृतकों के परिजनों को रू 10 लाख मुआवज़ा देने की घोषणा की है। घायलों को भी वित्तीय सहायता और चिकित्सा सहायता दी जाएगी।

कुछ राजनीतिक दलों ने रैली आयोजकों और सुरक्षा प्रबंधकों को दोषी ठहराया है। कहा जा रहा है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का ठीक से पालन नहीं हुआ था।

कई नेताओं ने यह तर्क भी उठाया कि इतनी बड़ी मात्रा में जनता को इकट्ठा करने से पहले सुरक्षा प्रबंधन को और मजबूत होना चाहिए था।

राजनीति पर असर और भावी चुनौतियाँ

यह हादसा राजनीतिक दृष्टि से भी बहुत बड़ा है। विजय की लोकप्रियता, टीवीके की योजना और 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारी — सब इस हादसे से प्रभावित होंगे।

दूसरी ओर, विपक्ष और सत्ता दलों के बीच दोषारोपण शुरू हो चुका है। रैली आयोजकों पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या उन्होंने आयोजक दृश्य को सही तरीके से योजनाबद्ध किया।

अगर लोक समर्थन गायब हुआ, तो यह घटना चुनावी परिणामों को भी प्रभावित कर सकती है। जनता में यह संदेश जाएगा कि सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए — सिर्फ लोकप्रियता या भीड़ से काम नहीं चलेगा।

आईए अगले चुनावों में यह देखा जाना चाहिए कि इस हादसे के बाद जनता का रुझान कैसा रहेगा, और राजनीतिक दलों ने अपनी रैलियों में सुरक्षा व प्रबंधन को किस तरह प्राथमिकता दी।

             करूर की विजय रैली भगदड़ त्रासदी न सिर्फ तमिलनाडु बल्कि पूरे भारत के लिए एक झटका है। 36 लोगों की जान चली गई, अनगिनत परिवार टूट गए और राजनीति की चमकधमक के बीच मानवीय सदमे ने सभी को चौंका दिया।

प्रधानमंत्री से लेकर राज्य स्तर तक सभी ने संवेदना जताई, लेकिन मुआवज़ा, चिकित्सा और न्याय वही होगा जो कार्रवाई में दिखे। जांच आयोग सच सामने लाएगा, और दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा — ऐसी उम्मीद जनता को है।

इस दुखद हादसे से एक सबक लेना होगा — बड़े कार्यक्रमों की सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत हो कि जनसमूह सहज और सुरक्षित रूप से इकट्ठा हो सके। राजनीति हो या आयोजन — जनता की जान सबसे पहले होनी चाहिए।

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