पिनालू की सब्ज़ी: उत्तराखंड की रसोई अपने सादेपन और पोषक गुणों के लिए जानी जाती है। यहाँ की हर डिश में पहाड़ की खुशबू और लोक संस्कृति की झलक मिलती है। इन्हीं खास व्यंजनों में से एक है “पिनालू की सब्ज़ी”। यह डिश न केवल स्वाद में अनोखी है, बल्कि अपने इतिहास और परंपरा से भी जुड़ी हुई है। पिनालू, जिसे अरबी (Colocasia) या घुइँयां भी कहा जाता है, पहाड़ी इलाकों में खूब उगती है और सदियों से लोगों के भोजन का हिस्सा रही है।

पिनालू क्या है?
पिनालू मूल रूप से अरबी की एक किस्म है। यह पहाड़ों की उपजाऊ मिट्टी में आसानी से उग जाती है।
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इसकी जड़ (कंद) से सब्ज़ी बनती है।
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इसके पत्तों का भी उपयोग पकवानों में किया जाता है।
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यह कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, आयरन और मिनरल्स से भरपूर होती है।
इतिहास और परंपरा:
पिनालू की सब्ज़ी का इतिहास उत्तराखंड की कृषि परंपरा से गहराई से जुड़ा है।
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प्राचीन खेती: अरबी के कंद पहाड़ों की नमी भरी जमीन में आसानी से पैदा होते थे, इसलिए यह अनाज और दालों के साथ रोज़ाना की थाली में शामिल रहा।
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त्योहार और संस्कार: पुराने समय में गाँवों में जब मेहमान आते थे, तो खास पकवानों के साथ पिनालू की सब्ज़ी भी ज़रूर परोसी जाती थी।
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गाँव की संस्कृति: महिलाओं का समूह खेत से पिनालू निकालकर घर लाता और फिर मिलकर उसकी सब्ज़ी बनाता। यह एक सामाजिक परंपरा का हिस्सा था।
पोषण और स्वास्थ्य लाभ:
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पिनालू में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है, जो पाचन क्रिया के लिए अच्छा है।
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यह ऊर्जा देने वाला भोजन है, क्योंकि इसमें स्टार्च की भरपूर मात्रा होती है।
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आयरन और कैल्शियम से हड्डियाँ मजबूत होती हैं।
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पहाड़ के ठंडे मौसम में यह शरीर को गर्माहट प्रदान करती है।
पिनालू की सब्ज़ी बनाने की विधि:
सामग्री:
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पिनालू (अरबी) – 500 ग्राम
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सरसों का तेल – 2 बड़े चम्मच
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हींग – एक चुटकी
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जीरा – 1 छोटा चम्मच
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हरी मिर्च – 2 (बारीक कटी)
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हल्दी पाउडर – ½ छोटा चम्मच
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धनिया पाउडर – 1 छोटा चम्मच
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लाल मिर्च – स्वादानुसार
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नमक – स्वादानुसार
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पानी – आवश्यकतानुसार
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हरा धनिया – सजावट के लिए
विधि:
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सबसे पहले पिनालू को अच्छे से धोकर उबाल लें।
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उबालने के बाद उसका छिलका उतारकर गोल टुकड़ों में काट लें।
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कढ़ाई में सरसों का तेल गरम करें और उसमें जीरा व हींग का तड़का लगाएँ।
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हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड भूनें।
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अब इसमें हल्दी, धनिया और लाल मिर्च पाउडर डालकर मसाला भूनें।
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कटे हुए पिनालू के टुकड़े डालें और मसाले में अच्छे से मिलाएँ।
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स्वादानुसार नमक और थोड़ा पानी डालकर ढक दें और 5–7 मिनट धीमी आँच पर पकाएँ।
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सब्ज़ी तैयार होने पर ऊपर से हरा धनिया डालकर परोसें।
खाने का तरीका:
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पिनालू की सब्ज़ी को आमतौर पर गहत (कुल्थी) की दाल और चावल के साथ खाया जाता है।
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इसे रोटियों के साथ भी परोसा जाता है।
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गाँवों में लोग इसे लकड़ी की आँच पर बनाते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है।
सांस्कृतिक महत्व:
पिनालू की सब्ज़ी सिर्फ खाने की चीज़ नहीं बल्कि पहाड़ की पहचान है।
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शादी-ब्याह या पर्व-त्योहार में इसे खास पकवानों की थाली में रखा जाता है।
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यह उत्तराखंड की आत्मनिर्भर खेती का प्रतीक है, क्योंकि इसे लोग अपने खेतों में ही उगाते हैं।
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आज भी गाँवों में जब कोई खास मेहमान आता है तो पिनालू की सब्ज़ी बनाकर परोसना आतिथ्य का हिस्सा माना जाता है।
आधुनिक समय में पिनालू:
आजकल शहरों और होटलों में भी उत्तराखंडी व्यंजन लोकप्रिय हो रहे हैं। पर्यटन बढ़ने के कारण, नैनीताल, मसूरी और अल्मोड़ा जैसे क्षेत्रों के रेस्टोरेंट्स में पिनालू की सब्ज़ी आसानी से मिल जाती है। यह अब सिर्फ गाँवों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उत्तराखंड की पाक-संस्कृति का प्रतीक व्यंजन बन चुकी है।
पिनालू की सब्ज़ी उत्तराखंड की परंपरा, संस्कृति और स्वाद का अनोखा संगम है। यह सिर्फ एक डिश नहीं बल्कि पहाड़ के जीवन की झलक है, जिसमें सादगी, पोषण और अपनापन सब कुछ समाया हुआ है। जब आप कभी उत्तराखंड जाएँ तो इस सब्ज़ी का स्वाद लेना न भूलें, क्योंकि यही स्वाद आपको पहाड़ की असली रसोई से जोड़ देगा।
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