PM Modi at Tripura Sundari Temple: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 सितंबर 2025 को दक्षिणी त्रिपुरा के उदयपुर में स्थित 524 वर्ष पुराने त्रिपुर सुंदरी मंदिर का उद्घाटन किया। यह मंदिर हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां देवी सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था। मंदिर का पुनर्विकास केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की प्रसाद योजना के तहत किया गया है, जिसकी कुल लागत ₹52 करोड़ से अधिक है, जिसमें राज्य सरकार ने ₹7 करोड़ का योगदान दिया है।
त्रिपुरा के उदयपुर में स्थित त्रिपुर सुंदरी मंदिर, जिसे 1501 में महाराजा धन्य माणिक्य द्वारा स्थापित किया गया था, भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहीं देवी सती के चरण गिरे थे, और इसलिए इसे विशेष पवित्र माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव की पत्नी, देवी पार्वती के अवतार, देवी त्रिपुर सुंदरी को समर्पित है।
मंदिर का गर्भगृह चौकोर आकार का है और इसे पारंपरिक बंगाली ग्रामीण झोपड़ी के रूप में डिज़ाइन किया गया है। मंदिर के पीछे कल्याणसागर झील स्थित है, जो परिसर में प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करती है। श्रद्धालु कहते हैं कि झील का शांत वातावरण ध्यान और भक्ति के अनुभव को और भी गहरा बनाता है।
पीएम मोदी द्वारा उद्घाटन: एक नया अध्याय | PM Modi at Tripura Sundari Temple
22 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मंदिर के पुनर्विकसित स्वरूप का उद्घाटन किया। यह उद्घाटन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह त्रिपुरा की सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत को भी नई पहचान देता है।
मंदिर के पुनर्विकास की कुल लागत ₹52 करोड़ से अधिक है, जिसमें से ₹7 करोड़ त्रिपुरा राज्य सरकार ने योगदान दिया। यह परियोजना केंद्र सरकार की प्रसाद योजना (PRASAD – Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual, Heritage Augmentation Drive) के तहत की गई। इस योजना का उद्देश्य तीर्थ स्थलों का आधुनिकीकरण और धार्मिक विरासत का संरक्षण करना है।
मंदिर के पुनर्विकास की विशेषताएँ

मंदिर के पुनर्विकास में मुख्य गर्भगृह, भव्य प्रवेश द्वार, बहुउद्देशीय हॉल, प्रसाद गृह और विस्तृत लॉबी का निर्माण शामिल है। मंदिर परिसर को सजाने के लिए सुंदर उद्यान, पथ और जलाशयों का निर्माण किया गया है। यह पुनर्निर्मित परिसर न केवल भव्यता में बढ़ोतरी करता है, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव को भी और समृद्ध बनाता है।
मंदिर परिसर में प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने के लिए कल्याणसागर झील और आसपास के हरियाली को संरक्षित किया गया है। झील में तैरते कछुए और जलपक्षी श्रद्धालुओं को शांति और ध्यान का अनुभव कराते हैं।
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— NDTV (@ndtv) September 22, 2025
प्रधानमंत्री की यात्रा और उद्घाटन समारोह
प्रधानमंत्री मोदी की यह त्रिपुरा की एक महत्वपूर्ण यात्रा थी। उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि यह पुनर्विकास न केवल धार्मिक महत्व को बढ़ाता है, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाता है। उन्होंने इस परियोजना को “आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण” बताया।
सुरक्षा की दृष्टि से, उद्घाटन के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में हजारों सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी। श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की गई थीं ताकि वे सुरक्षित और सहज रूप से मंदिर दर्शन कर सकें।
त्रिपुर सुंदरी मंदिर का धार्मिक महत्व
त्रिपुर सुंदरी मंदिर का महत्व केवल स्थापत्य या पर्यटन में ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यधिक है। यह मंदिर हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में शामिल है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शक्ति पीठों पर देवी सती के अंग गिरने से वह स्थान पवित्र बन जाता है और भक्तों को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।
मंदिर में देवी त्रिपुर सुंदरी की विशाल मूर्ति स्थापित है। पूजा-अर्चना और भजन संध्या के दौरान श्रद्धालु अनुभव करते हैं कि देवी की उपस्थिति वातावरण को दिव्य ऊर्जा से भर देती है।
मुख्यमंत्री माणिक साहा का संदेश
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सोशल मीडिया पर मंदिर के पुनर्विकसित स्वरूप का वीडियो साझा करते हुए कहा, “माता की कृपा से यह मनमोहक परिसर त्रिपुरा की समस्त जनता के लिए गर्व का विषय है। प्रधानमंत्री मोदी का मार्गदर्शन और केंद्र सरकार का सहयोग इस परियोजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण था। त्रिपुरा की जनता उद्घाटन समारोह का बेसब्री से इंतजार कर रही थी।”
त्रिपुर सुंदरी मंदिर में श्रद्धालुओं की भक्ति
मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, खासकर नवरात्रि और प्रमुख त्योहारों के दौरान। भजन, आरती और पूजा-अर्चना से मंदिर परिसर में दिव्य वातावरण बन जाता है। श्रद्धालु हाथों में फूल, अक्षत और नैवेद्य लेकर आते हैं।
मंदिर में श्रद्धालु देवी की पूजा करने के बाद कल्याणसागर झील में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। इसके अलावा, मंदिर परिसर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम और सांस्कृतिक आयोजन स्थानीय कला और परंपरा को जीवित रखते हैं।
त्रिपुरा की सांस्कृतिक विरासत
त्रिपुरा राज्य का इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर अत्यंत समृद्ध है। महाराजा धन्य माणिक्य के शासनकाल में यह मंदिर बनवाया गया था और यह राज्य की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 1949 में त्रिपुरा की पूर्ववर्ती रियासत भारत सरकार के नियंत्रण में आई।
मंदिर और उसके आसपास की परंपराएँ न केवल धार्मिक हैं, बल्कि यह क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। मंदिर के भव्य पुनर्विकास से यह विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और आकर्षक बन गई है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
त्रिपुर सुंदरी मंदिर के पुनर्विकास से राज्य के पर्यटन उद्योग को नई दिशा मिली है। नए परिसर, बेहतर सुविधाएँ और सुरक्षित वातावरण श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। इसके माध्यम से स्थानीय व्यवसायियों और हाथकारी उद्योग को भी लाभ हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन समारोह में कहा कि मंदिर पुनर्विकास का उद्देश्य न केवल श्रद्धालुओं के लिए अनुभव को बेहतर बनाना है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में भी योगदान करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा त्रिपुर सुंदरी मंदिर का उद्घाटन एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अवसर है। यह परियोजना न केवल धार्मिक महत्व को बढ़ाती है, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत को संरक्षित करने में भी मदद करती है।
मंदिर का नया स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव को और समृद्ध बनाएगा। यह पुनर्विकास त्रिपुरा राज्य की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन धरोहर को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
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