देश के छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसी योजना शुरू की थी जिसने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी। इस योजना का नाम है प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi Yojna)। इसे 1 जून 2020 को लॉन्च किया गया था।
इसका मकसद था कि सड़क किनारे रेहड़ी लगाने वाले, फल-सब्जी बेचने वाले, छोटे पान और चाय की दुकान चलाने वाले लोग भी आसानी से बिज़नेस के लिए पैसे जुटा सकें। खास बात यह है कि इस योजना में मिलने वाला लोन पूरी तरह बिना गारंटी (Collateral Free Loan) होता है।
अब केंद्र सरकार ने इस योजना को साल 2030 तक बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है।
योजना की अहमियत | PM Svanidhi Yojna

भारत में लाखों लोग सड़क किनारे छोटी दुकान या रेहड़ी-पटरी लगाकर रोज़गार कमाते हैं। लेकिन अक्सर इनके पास बैंक से लोन लेने के लिए गारंटी या कोई सिक्योरिटी नहीं होती। ऐसे में यह लोग साहूकारों या महंगे ब्याज वाले कर्ज पर निर्भर रहते थे।
पीएम स्वनिधि योजना ने इस समस्या का हल निकाला। इस योजना के तहत अब तक 68 लाख से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर्स को लोन मिल चुका है। इनमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं।
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में 1.15 करोड़ लोगों को इस योजना से फायदा पहुंचे।
कितनी मिलेगी आर्थिक मदद
शुरुआत में इस योजना के तहत अधिकतम 80,000 रुपये तक का लोन दिया जाता था। लेकिन हाल ही में किए गए बदलावों के बाद अब तीन किस्तों में 90,000 रुपये तक का लोन मिल सकेगा।
पहली किस्त में अब 15,000 रुपये तक लोन मिलेगा, जो पहले सिर्फ 10,000 था।
दूसरी किस्त में 25,000 रुपये तक लोन मिलेगा, जबकि पहले यह 20,000 था।
तीसरी किस्त में 50,000 रुपये का लोन मिलेगा, इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
यानी एक रेहड़ी-पटरी वाला बिना किसी गारंटी के कुल 90,000 रुपये तक का कर्ज ले सकता है।
सरकार का बड़ा फैसला
केंद्र सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना की डेडलाइन को 31 मार्च 2030 तक बढ़ा दिया है। इसके लिए सरकार ने 7,332 करोड़ रुपये का बजट तय किया है।
इससे लाखों वेंडर्स को सीधा फायदा मिलेगा। खासतौर पर उन लोगों को जो पहली बार बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं या पहले से दुकान चलाकर उसे बढ़ाना चाहते हैं।
डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा
सरकार इस योजना को डिजिटल इंडिया मिशन से भी जोड़ रही है। इसलिए अब समय पर लोन चुकाने वाले वेंडर्स को UPI-लिंक्ड RuPay क्रेडिट कार्ड भी दिया जाएगा।
इस कार्ड से उन्हें तुरंत पैसे की सुविधा मिलेगी। साथ ही डिजिटल लेन-देन करने पर 1,600 रुपये तक का कैशबैक भी मिलेगा।
यह कदम न सिर्फ वेंडर्स को तकनीकी रूप से मजबूत बनाएगा बल्कि देश को कैशलेस इकॉनमी की ओर भी ले जाएगा।
लोन कहां से मिलेगा
लाभार्थियों को यह लोन कई तरह की वित्तीय संस्थाओं से मिल सकता है। इनमें अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, सहकारी बैंक, एनबीएफसी, माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस और एसएचजी बैंक शामिल हैं।
इस योजना के इंप्लीमेंटेशन पार्टनर हैं – स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI)।
लोन लेने के लिए आवेदक को आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज देने होंगे। इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस, मनरेगा कार्ड और पैन कार्ड भी केवाईसी डॉक्यूमेंट्स के रूप में स्वीकार किए जाएंगे।
सबसे खास बात यह है कि यह लोन देशभर के कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए भी लिया जा सकता है।
प्रयागराज और मैनपुरी में ट्रेनिंग
सरकार सिर्फ लोन देने तक सीमित नहीं है बल्कि वेंडर्स को ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पीएम स्वनिधि योजना के तहत नगर निगम में आयोजित लोक कल्याण मेला में स्ट्रीट फूड वेंडर्स को ट्रेनिंग दी गई। इसी तरह मैनपुरी में भी यह मेला शुरू हुआ है।
यह आयोजन 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चल रहा है और इसे पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर शुरू किया गया।
योजना का सामाजिक असर
पीएम स्वनिधि योजना सिर्फ एक आर्थिक मदद नहीं बल्कि एक सामाजिक क्रांति है। इससे छोटे दुकानदारों और वेंडर्स को सम्मान के साथ रोजगार करने का मौका मिला है।
पहले जो लोग साहूकारों से महंगे ब्याज पर कर्ज लेकर परेशान रहते थे, अब वे सरकार से सस्ती दरों पर लोन लेकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
सरकार का विजन 2030
सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक हर स्ट्रीट वेंडर इस योजना से जुड़ा हो और आत्मनिर्भर बन सके।
यह योजना भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान का भी हिस्सा है। इसके जरिए छोटे दुकानदारों को बड़ी इकॉनमी से जोड़ा जा रहा है।
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (PM Svanidhi Yojna) ने देश के लाखों रेहड़ी-पटरी वालों की जिंदगी बदल दी है। अब जब इसकी डेडलाइन 2030 तक बढ़ा दी गई है और लोन की सीमा भी 90,000 रुपये तक कर दी गई है, तो यह योजना और भी ज्यादा लाभकारी हो गई है।
सरकार के इस कदम से न सिर्फ वेंडर्स को आर्थिक सहारा मिलेगा बल्कि उन्हें डिजिटल इंडिया से भी जोड़ा जाएगा। आने वाले समय में यह योजना भारत के सबसे सफल सामाजिक-आर्थिक कार्यक्रमों में से एक साबित हो सकती है।
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