BCCI Elections 2025: भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड, यानी BCCI, का चुनाव इस साल बेहद अहम माना जा रहा है। मौजूदा अध्यक्ष रॉजर बिन्नी का कार्यकाल पूरा हो चुका है। फिलहाल यह जिम्मेदारी उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला संभाल रहे हैं। लेकिन 28 सितंबर 2025 को मुंबई में BCCI की वार्षिक आम बैठक (AGM) है, जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए नए चेहरे चुने जाएंगे। हर राज्य क्रिकेट संघ को इसमें वोट देने का अधिकार मिलेगा।
हरभजन सिंह: दावेदार बनने की दिशा में कदम | BCCI Elections 2025

हरभजन सिंह, भारत के पूर्व दिग्गज ऑफ़ स्पिनर, अब चर्चाओं में हैं कि वे BCCI के अध्यक्ष पद के दावेदार हो सकते हैं। पंजाब क्रिकेट संघ ने उन्हें AGM के लिए अपना प्रतिनिधि नामित किया है। इसके साथ ही उनके नाम के साथ यह अनुमान लगने लगा है कि वे सिर्फ प्रतिनिधि बनकर नहीं, बल्कि “ऑफिस-बेयरर” की भूमिका में भी हो सकते हैं। उनके क्रिकेट करियर का अनुभव, जनता और मीडिया में उनकी पकड़, और क्रिकेट के प्रति लगाव यह संकेत देते हैं कि वे इस दौड़ में एक मजबूत उम्मीदवार हो सकते हैं।
28 सितंबर की AGM: समय, प्रक्रिया और चुनौती
BCCI चुनाव की प्रक्रिया स्पष्ट है: प्रतिनिधि नामांकन 20-21 सितंबर को होगा, जांच-परख होगी, नाम वापस लेने की तारीख 23 सितंबर है, और अंततः वोटिंग व परिणाम 28 सितंबर को AGM में घोषित होंगे। इस AGM में पांच प्रमुख पदों पर चुनाव होना तय है। वर्तमान में सचिव Devajit Saikia और कोषाध्यक्ष Prabhtej Singh Bhatia अपने-अपने पदों के लिए अकेले नामांकन दाखिल कर चुके हैं — यानी उनकी नियुक्ति अपेक्षाकृत आसान होगी। दूसरी ओर अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला जटिल हो सकता है क्योंकि कई राज्य क्रिकेट संघों के द्वारा अलग-अलग उम्मीदवार समर्थित हो रहे हैं।
सौरव गांगुली का नाम भी है सामने
हरभजन सिंह ही नहीं, सौरव गांगुली का नाम भी इस दौड़ में है। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ़ बंगाल (CAB) ने गांगुली को AGM के लिए अपना प्रतिनिधि नामित किया है। पूर्व कप्तान और पहले BCCI अध्यक्ष रहे गांगुली की प्रसिद्धि, लोकप्रियता और प्रशासनिक अनुभव उन्हें भी दावेदार बनाते हैं। उन्होंने पहले अध्यक्ष पद से लेकर बोर्ड के कई वरिष्ठ पदों पर काम किया है, जो इस चुनाव को और रोचक बनाता है।
चुनाव के मायने: सिर्फ़ पद नहीं पहचान
यह चुनाव सिर्फ़ एक प्रशासकीय पोस्ट भर नहीं है। यह उस दिशा का संकेत है कि भारतीय क्रिकेट किस तरह से आगे बढ़ेगा — प्रबंधन किस तरह से होगा, पंजाब क्रिकेट संघ या बंगाल क्रिकेट संघ जैसी संस्थाएँ कितनी सक्रिय भूमिका निभाएँगी, किस तरह की नीतियाँ होंगी, पारदर्शिता (transparency), खिलाड़ी कल्याण, घरेलू क्रिकेट को कितना समर्थन मिलेगा आदि।
हरभजन जैसे पूर्व खिलाड़ी के अध्यक्ष बनने का मतलब होगा कि प्रशासन में खिलाड़ी दृष्टिकोण (player perspective) भी ज़्यादा प्रभावी होगा। यह बदलाव कई युवा क्रिकेट प्रेमियों के लिए प्रेरणादायक होगा।
हरभजन के पक्ष में जो बातें हैं
पहली और सबसे बड़ी बात है उनका क्रिकेट अनुभव: उन्होंने लगभग 367 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं और 700 से ज़्यादा विकेट लिए हैं। उनके अंदर क्रिकेट की बारीकियाँ जानने की क्षमता है, मैदानों का अनुभव है। दूसरी बात, वे राजनीति और सार्वजनिक जीवन से भी जुड़े हैं; 2022 में हरभजन को राज्यसभा के लिए नामांकन हुआ था। इससे यह संकेत मिलता है कि वे सिर्फ खेल की दुनिया तक सीमित नहीं हैं, प्रशासन और सामाजिक स्तर पर सक्रिय हैं।
तीसरी बात, पंजाब क्रिकेट संघ द्वारा उनका नाम समर्थन प्राप्त होना उनकी उम्मीदवारी को बल देता है। एक राज्य संघ का समर्थन बहुत मायने रखता है क्योंकि वह वोटिंग में भी अहम भूमिका निभाता है।
चुनौतियाँ भी कम नहीं
हरभजन के लिए रास्ता आसान नहीं है। प्रशासनिक अनुभव का आभाव एक बड़ा मुद्दा हो सकता है। BCCI की चुनौतियाँ सिर्फ़ टेक्निकल नहीं, बल्कि सामाजिक, राजनीतिक और लॉजिस्टिक होती हैं। बड़े पद पर आने के लिए सिर्फ लोकप्रियता नहीं, बल्कि नेटवर्क, समर्थन प्राप्त राज्य संघों की संख्या, राजनीति की समझ और नीति निर्धारण की क्षमता चाहिए।
साथ ही, सौरव गांगुली जैसे अनुभवी नेता भी दावेदारी में हैं, जिनके अपने समर्थक हैं। इससे चुनावी मुकाबला कम तीव्र नहीं होगा।
अध्यक्ष बनने पर हरभजन के सामने क्या कार्रवाइयाँ होंगी अपेक्षित
अगर हरभजन सिंह अध्यक्ष बनते हैं, तो उनसे अपेक्षाएँ होंगी कि वे कुछ क्षेत्रों में सुधार करें। घरेलू क्रिकेट का सरंक्षण, खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएँ, वित्तीय पारदर्शिता, चयन प्रणाली में निष्पक्षता, and media interaction आदि में नई राह खोलें।
इसके अलावा, IPL और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की भूमिका, महिला क्रिकेट को और बढ़ावा देना, युवा खिलाड़ियों को समय देना — ये सब ऐसे विषय होंगे जिन पर उनकी क्षमता मानी जाएगी।
ऐतिहासिक संदर्भ और पूर्व उदाहरण
यह कोई पहला मौका नहीं है जब पूर्व खिलाड़ी BCCI अध्यक्ष बने हों। 2019 में सौरव गांगुली ने इस पद को संभाला, जिससे यह साबित हुआ कि खिलाड़ी-देखभाल अनुभव भी प्रशासकीय क्षमता में बदला जा सकता है। उसके बाद रॉजर बिन्नी बने, जिन्होंने लगातार पद संभाला और अब उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है।
ऐसी परंपरा यदि बनी रहे, तो हरभजन सिंह जैसा नाम इस दिशा में एक प्राकृतिक चयन जैसा लग सकता है।
इस चुनाव में हरभजन सिंह की दावेदारी ने खेल-प्रेमियों और विशेषज्ञों दोनों को उत्साहित कर दिया है। उनका नाम पारंपरिक क्रिकेट प्रशासनों में नयापन ला सकता है। लेकिन चुनाव सिर्फ़ नाम या प्रशंसा से नहीं जीता जाता। समर्थन, रणनीति, अनुभव और स्पष्ट विजन होना ज़रूरी है।
28 सितंबर की AGM में हरभजन सिंह, सौरव गांगुली और अन्य उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा जिसमें भारतीय क्रिकेट का भविष्य तय होगा। यदि हरभजन इस दौड़ में सफल होते हैं, तो वो सिर्फ़ अध्यक्ष नहीं बनेंगे, बल्कि कई युवा खिलाड़ियों और प्रशंसकों के लिए उम्मीद का प्रतीक बनेंगे।
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