2 सितंबर 2025 की सुबह भारत के तकनीकी इतिहास का एक नया पन्ना लिखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नयी दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर से ‘Semicon India 2025’ सम्मेलन का शुभारंभ किया। तीन दिन चलने वाला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2 से 4 सितंबर तक आयोजित होगा। इसका उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण और नवाचार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाना है।
यह सम्मेलन न केवल तकनीकी दृष्टि से बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम है। इसमें दुनिया भर के उद्योग दिग्गज, निवेशक, नीति निर्माता, और शोधकर्ता शामिल हो रहे हैं।
भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा: शुरुआत से अब तक | Semicon India 2025
![]()
भारत ने सेमीकंडक्टर की दिशा में गंभीर कदम 2021 में तब उठाए, जब केंद्र सरकार ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ की शुरुआत की। इसके तहत ₹76,000 करोड़ की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना लागू की गई। इसके बाद 2022 में पहला ‘सेमीकॉन इंडिया’ सम्मेलन बेंगलुरु में हुआ। 2023 में यह गांधीनगर पहुंचा और 2024 में ग्रेटर नोएडा में आयोजित हुआ। अब 2025 में यह दिल्ली आया है, जो इस यात्रा को और मज़बूत बनाता है।
सम्मेलन का उद्देश्य
‘सेमीकॉन इंडिया – 2025’ का मकसद भारत को सेमीकंडक्टर तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। आज दुनिया की हर बड़ी तकनीक—चाहे मोबाइल फोन हो, लैपटॉप, स्मार्ट कार, AI, रोबोटिक्स या सैटेलाइट—सेमीकंडक्टर पर निर्भर है। भारत का लक्ष्य है कि वह केवल इन चिप्स का उपभोक्ता न बने बल्कि निर्माता और निर्यातक भी बने।
इस सम्मेलन में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने, डिज़ाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना को और मज़बूत करने, और नई नीतियों पर चर्चा की जाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका
सम्मेलन के पहले दिन यानी 2 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन सत्र को संबोधित किया और भारत की सेमीकंडक्टर क्रांति का रोडमैप साझा किया। उद्घाटन के अगले दिन, 3 सितंबर को सुबह 9:30 बजे वे ‘सीईओ गोलमेज सम्मेलन’ में शामिल हुए। इसमें दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी कंपनियों के सीईओ मौजूद थे, जिन्होंने भारत की संभावनाओं और रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।
किन विषयों पर हुई चर्चा
सम्मेलन में कई अहम विषयों पर गहराई से विमर्श हुआ, जिनमें शामिल हैं:
- सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन और एडवांस्ड पैकेजिंग
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग
- अनुसंधान एवं विकास (R&D)
- निवेश के नए अवसर और प्रोत्साहन
- डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना का विस्तार
- स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
- भारत में सेमीकंडक्टर के भविष्य की योजना
ये विषय केवल तकनीक तक सीमित नहीं हैं बल्कि भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति से भी जुड़े हैं।
सम्मेलन में सहभागिता
‘सेमीकॉन इंडिया – 2025’ की भव्यता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इसमें 48 से अधिक देशों से प्रतिनिधि शामिल हुए। 2,500 से ज्यादा प्रतिनिधि इस आयोजन का हिस्सा बने। 150 से अधिक वक्ताओं ने मंच से विचार साझा किए, जिनमें 50 से ज्यादा वैश्विक नेता शामिल थे।
इसके अलावा, 350 से अधिक कंपनियों ने अपने उत्पाद और तकनीक का प्रदर्शन किया। कुल मिलाकर, 20,750 से अधिक लोगों ने इस सम्मेलन में भाग लिया। यह आंकड़ा अपने आप में साबित करता है कि भारत अब वैश्विक तकनीकी केंद्र बनने की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
विशेष आकर्षण
सम्मेलन में छह देशों की गोलमेज चर्चा आयोजित हुई, जिसमें वैश्विक सहयोग और रणनीति पर विचार किया गया। इसके अलावा, विभिन्न देशों के लिए अलग-अलग मंडप बनाए गए, जहां उनकी टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स को प्रदर्शित किया गया।
एक खास मंडप कार्यबल विकास और नवाचार को समर्पित था, ताकि यह दिखाया जा सके कि आने वाले समय में भारत किस तरह युवाओं को प्रशिक्षित करेगा और नए रोजगार सृजित करेगा।
मेड इन इंडिया चिप की दिशा में बड़ा कदम
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2025 के अवसर पर घोषणा की थी कि साल के अंत तक भारत का पहला ‘मेड इन इंडिया’ चिप बाजार में उपलब्ध होगा। यह बयान भारतीय तकनीक की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक घोषणा थी।
इसके अलावा, गुजरात के सानंद में देश की पहली OSAT (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट) पायलट लाइन का उद्घाटन हुआ। यहां से भारत का पहला घरेलू चिप तैयार होगा। यह एक ऐसा कदम है, जिससे भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बनने का मौका मिलेगा।
रोजगार और शिक्षा में लाभ
सेमीकंडक्टर उद्योग केवल तकनीक का ही नहीं, बल्कि रोजगार और शिक्षा का भी नया अध्याय लिख रहा है।
-
लगभग 280 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को डिज़ाइन टूल्स दिए गए हैं।
-
72 से अधिक स्टार्टअप्स को समर्थन मिला है।
-
डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना से 23 स्टार्टअप्स को सीधी मदद दी गई है।
इसके चलते भारत में माइक्रोप्रोसेसर, CCTV, कम्युनिकेशन चिप्स, नेविगेशन सिस्टम और मोटर कंट्रोलर जैसे क्षेत्रों में शोध और विकास तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
टाटा समूह की असम में स्थापित होने वाली OSAT सुविधा लगभग 15,000 प्रत्यक्ष और 12,000 अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन करेगी। युवाओं के लिए यह क्षेत्र अत्यधिक आकर्षक बन गया है, जहां वेतनमान भी कई अन्य उद्योगों की तुलना में कहीं बेहतर है।
वैश्विक सहयोग और उद्योग दिग्गजों की भागीदारी
इस सम्मेलन में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। ASML, Applied Materials, IBM, Infineon, KLA, Lam Research, Micron, SK Hynix, Tata Electronics और Tokyo Electron जैसी कंपनियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
यह सहयोग भारत के लिए केवल निवेश का ही नहीं, बल्कि तकनीकी हस्तांतरण, शोध साझेदारी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में शामिल होने का भी अवसर है।
भविष्य की चुनौतियाँ और अवसर
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती है स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना। इसके लिए देश को कंपाउंड सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले फैब्स, रासायनिक और गैस उत्पादन इकाइयों में भी निवेश करना होगा।
इसके साथ ही, मानव संसाधन विकास यानी स्किल डेवलपमेंट को प्राथमिकता देनी होगी। अगर भारत बड़ी संख्या में कुशल इंजीनियर, तकनीशियन और शोधकर्ता तैयार कर लेता है तो वह इस क्षेत्र में लंबे समय तक टिकेगा।
‘सेमीकॉन इंडिया – 2025’ केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है। इस आयोजन ने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अब केवल एक बड़ा बाजार नहीं है, बल्कि एक बड़ा निर्माता और नवाचार केंद्र भी बनने जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और सरकार की योजनाएँ इस बात की गवाही देती हैं कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के सेमीकंडक्टर मानचित्र पर एक मजबूत और स्थायी स्थान बनाएगा।
ऐसे और भी Global लेखों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें! Khabari bandhu पर पढ़ें देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरें — बिज़नेस, एजुकेशन, मनोरंजन, धर्म, क्रिकेट, राशिफल और भी बहुत कुछ।
SCO Summit में मोदी-शी की मुलाक़ात ने खोली उम्मीदों की खिड़की, LAC पर समझौता और भरोसे का संदेश
1 thought on “भारत बनेगा चिप्स का चैंपियन: प्रधानमंत्री मोदी ने ‘Semicon India 2025’ सेमीकंडक्टर सम्मेलन का उद्घाटन कर रचा इतिहास”