Vaishno Devi News: जम्मू-कश्मीर में तबाही, भारी बारिश से 34 की मौत, वैष्णो देवी यात्रा पर भूस्खलन, झेलम खतरे के निशान से ऊपर

Vaishno Devi News: जम्मू-कश्मीर में आसमान से बरसती आफ़त ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने न सिर्फ लोगों की ज़िंदगी खतरे में डाल दी है, बल्कि प्रदेश के कई हिस्सों में तबाही का मंजर सामने आ रहा है। बुधवार को कटरा स्थित माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर एक बड़े भूस्खलन ने 34 लोगों की जान ले ली और कई यात्री घायल हो गए। राहत-बचाव टीमें अब भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं।

माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर दर्दनाक हादसा | Vaishno Devi News

श्रद्धालुओं के लिए पवित्र मानी जाने वाली वैष्णो देवी यात्रा इस बार मातम में बदल गई। अर्धकुमारी के पास यात्रा मार्ग पर पहाड़ का बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर गिर पड़ा। देखते ही देखते यात्रियों की भीड़ चपेट में आ गई। हादसे में 34 लोगों की मौत हो गई और कई गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सिन्हा ने घायलों से मुलाकात की और मृतकों के परिजनों को 9 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की—जिसमें 5 लाख रुपये श्राइन बोर्ड और 4 लाख रुपये आपदा प्रबंधन बोर्ड की ओर से दिए जाएंगे।

रिकॉर्ड तोड़ बारिश से जनजीवन ठप

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जम्मू और आसपास के जिलों में बारिश ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जम्मू में 24 घंटे में 296 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो 1973 के बाद सबसे ज्यादा है। वहीं उधमपुर जिले में 629.4 मिलीमीटर बारिश हुई, जिसने 2019 का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

तेज बारिश के कारण जगह-जगह नदियां और नाले उफान पर आ गए हैं। झेलम नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर 22 फीट को पार कर गया है, जिससे कश्मीर घाटी में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

संचार व्यवस्था और बिजली आपूर्ति ध्वस्त

लगातार बारिश और तूफानी हवाओं ने बिजली और मोबाइल नेटवर्क को बुरी तरह प्रभावित किया है। जम्मू-कश्मीर के बड़े हिस्से में मोबाइल टावर गिर गए हैं और बिजली के खंभे टूट गए। लोग अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि वह “लगभग बेजान संचार व्यवस्था” से जूझ रहे हैं। इंटरनेट बेहद धीमा है और कॉल कनेक्ट नहीं हो रहे हैं। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।

बचाव कार्य में सेना और NDRF की तैनाती

हालात की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना, NDRF और SDRF की टीमें मोर्चा संभाले हुए हैं। अब तक 3,500 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। एनडीआरएफ के उपकरणों और राहत सामग्री को ले जाने के लिए C-130 और IL-76 विमान भेजे जा रहे हैं।

इसके अलावा, चिनूक और Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर भी तैयार रखे गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जा सके। प्रशासन लगातार कंट्रोल रूम पर आने वाली मदद की कॉल्स पर कार्रवाई कर रहा है।

स्कूल-कॉलेज बंद, ट्रेन और हवाई सेवाओं पर असर

बारिश और बाढ़ के खतरे को देखते हुए जम्मू संभाग के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को 27 अगस्त तक बंद रखने का आदेश दिया गया है। बोर्ड परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई हैं।

रेलवे ने जम्मू और कटरा आने-जाने वाली 22 ट्रेनों को रद्द कर दिया था, जबकि 27 ट्रेनों को बीच में ही रोकना पड़ा। हालांकि बुधवार दोपहर से धीरे-धीरे ट्रेन सेवाएं बहाल की जा रही हैं।

हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ा। लेह हवाई अड्डे से कई उड़ानें रद्द कर दी गईं, जबकि जम्मू एयरपोर्ट पर सुबह रुकावटों के बाद दोपहर तक संचालन सामान्य हो गया। दिल्ली एयरपोर्ट से भी लेह जाने वाली उड़ानों के लिए एडवाइजरी जारी करनी पड़ी।

प्रभावित इलाके और हालात

जम्मू शहर, आरएस पुरा, सांबा, अखनूर, नगरोटा, कोट भलवाल, बिश्नाह, विजयपुर और कठुआ सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां तेज आंधी, बिजली गिरने और लगातार बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

रेसी, रामबन, डोडा, कटरा, रामनगर और बनिहाल में भी हल्की से मध्यम बारिश हो रही है, लेकिन प्रशासन ने इन इलाकों में भी अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार इस बार का तूफानी सिस्टम बेहद खतरनाक है। बादलों की ऊंचाई 12 किलोमीटर तक मापी गई है, जो बहुत सक्रिय तूफान का संकेत है। विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में भी पहाड़ी और मैदानी इलाकों में तेज बारिश का दौर जारी रहेगा।

सरकार और प्रशासन की चुनौतियाँ

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हालात की समीक्षा की और जल्द से जल्द बिजली, पानी और संचार व्यवस्था बहाल करने के निर्देश दिए। प्रशासन को सबसे बड़ी चुनौती है राहत सामग्री पहुंचाना और सुरक्षित ठिकानों पर रह रहे लोगों की जरूरतों को पूरा करना।

साथ ही, बाढ़ से डूबे इलाकों में बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने मोबाइल मेडिकल टीमें तैनात कर दी हैं।

दहशत और उम्मीदें

भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित लोग इस वक्त बेहद कठिनाई झेल रहे हैं। जिनके घर बह गए हैं या जलमग्न हो गए हैं, वे राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस प्राकृतिक आपदा से सहमे हुए हैं।

फिर भी, सेना, NDRF और प्रशासन की तेजी से चल रही राहत कार्रवाइयों से लोगों में उम्मीद बनी हुई है कि जल्द हालात सामान्य होंगे।

जम्मू-कश्मीर इन दिनों एक बड़े प्राकृतिक संकट से जूझ रहा है। भारी बारिश ने जहां रिकॉर्ड तोड़े हैं, वहीं भूस्खलन और बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी तहस-नहस कर दी है। माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और बचाव एजेंसियां कितनी जल्दी हालात को काबू में लाती हैं और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाती हैं।

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