8th Pay Commission Update: भारत में हर दशक में एक नया वेतन आयोग (Pay Commission) बनाया जाता है ताकि केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन की संरचना का पुनरीक्षण किया जा सके। पिछले 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा है और देश भर में लगभग 50.14 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी और करीब 69 लाख पेंशनर नए वेतनमान का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
8वें वेतन आयोग (8th CPC) को लेकर सवाल अब केवल “कब लागू होगा?” ही नहीं, बल्कि यह भी कि “कितनी बढ़ोतरी होगी?” और “क्या यह 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा?” ये सभी चर्चाओं का केंद्र बन चुकी हैं।
8वाँ वेतन आयोग क्यों और कैसे बना? 8th Pay Commission Update
भारत सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को औपचारिक रूप से संविधानित किया है और इसके Terms of Reference (ToR) को 3 नवंबर 2025 को वित्त मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया।
इस आयोग का मुख्य काम वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवा शर्तों की समीक्षा करना है और नई सिफारिशें तैयार करना है। आयोग को अपना रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, यानी यह रिपोर्ट मध्य 2027 तक जमा होने की उम्मीद है।
आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस रंजनाप्रकाश देसाई कर रही हैं, जो कि इस पूरे प्रक्रिया को मार्गदर्शित करेंगी।
8वें वेतन आयोग की समय सीमा और रिपोर्ट जमा होने का प्रोसेस

आयोग को नोटिफिकेशन मिलने के बाद से 18 महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट जारी करनी है। रिपोर्ट आने के बाद आम प्रक्रिया के तहत सरकार उसे समीक्षा, मंत्रिपरिषद की मंजूरी, और आवश्यक बजट प्रावधानों के लिए भेजती है। आम तौर पर इस प्रक्रिया में 3 से 6 महीने और लग सकते हैं।
अगर यह पूरा समय‑बद्ध तरीके से चलता है, तो सबसे पहले रिपोर्ट मध्य 2027 तक आएगी और उसके बाद मनुकीकरण और सरकारी स्वीकृति के बाद लागू होने की संभावना देर 2027 या प्रारंभिक 2028 में दिखती है।
क्या 1 जनवरी 2026 से लागू होगा?: सरकार की आधिकारिक स्थिति
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू करने की कोई आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है। वित्त राज्य मंत्री ने कहा है कि आयोग का गठन और ToR पहले ही हो चुका है, लेकिन आवश्यक तारीख और फंड अलॉटमेंट सरकार बाद में तय करेगी।
कई कर्मचारियों की उम्मीद थी कि नई सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होंगी, क्योंकि 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। लेकिन अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक हरी झंडी नहीं मिली है।
फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) – वेतन में बढ़ोतरी का गणित

फिटमेंट फैक्टर वह गुणक (Multiplier) होता है जिसे मौजूदा बेसिक वेतन पर लागू करके नया वेतन निर्धारित किया जाता है। यह 8वें वेतन आयोग के तहत सबसे महत्वपूर्ण संख्या होगी।
विशेषज्ञों के अनुमान बताते हैं कि यह फैक्टर 1.83 से 2.57 के बीच हो सकता है।
अगर ऐसा होता है, तो:
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वर्तमान Rs. 18,000 बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी का नया बेसिक लगभग Rs. 32,940 से Rs. 44,280 तक हो सकता है।
यह एक मोटा अनुमान है और अंतिम निर्णय सरकार के स्वीकृत रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।
भत्तों और पेंशन में संभावित बदलाव
8वें वेतन आयोग के अंतर्गत सिर्फ मूल वेतन नहीं, बल्कि भत्तों जैसे HRA, Transport Allowance, Dearness Allowance (DA) और पेंशन भी संशोधित किए जाएंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि कुल मिलाकर कर्मचारियों को 14% से लेकर 54% तक की वास्तविक वेतन वृद्धि मिल सकती है, लेकिन उच्च वृद्धि की संभावना का बोझ सरकार आर्थिक रूप से संभालने में चुनौतीपूर्ण है।
आलोचक और वित्तीय जानकार दोनों इसे एक संतुलित वृद्धि के रूप में देखते हैं, जिसमें कर्मचारियों को पर्याप्त लाभ मिलेगा और सरकार के वित्तीय संतुलन पर भी अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा।
DA और DR का क्या होगा?
देरियनेस अलाउंस (DA) और पेंशनर्स के लिए दीयरनेस रिलीफ (DR) 7वें वेतन आयोग के समय के अनुसार हर छह महीने में बढ़ते रहे हैं। 31 दिसंबर 2025 के बाद 7वें वेतन आयोग का चक्र खत्म होने पर भी DA/DR बढ़ोतरी जारी रह सकती है जब तक कि 8वें आयोग की सिफारिशें लागू नहीं होतीं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल DA को बेसिक वेतन में मर्ज (जोड़) करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए उम्मीदें और चुनौतियाँ
8वें वेतन आयोग का प्रभाव लगभग 1.2 करोड़ लोगों पर पड़ेगा — जिसमें कर्मचारी और पेंशनभोगी शामिल हैं।
यह न केवल वेतन और पेंशन में वृद्धि का मुद्दा है, बल्कि लंबे समय से सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव, भत्तों के पुनरावलोकन और आर्थिक जीवन की गुणवत्ता सुधार का मुद्दा भी है।
सरकारी कर्मचारियों की यूनियनों की मांग है कि वेतन वृद्धि के साथ fitment factor अधिक से अधिक रखा जाए ताकि छोटे वेतनभोगियों को अधिकतम लाभ मिल सके। वहीं सरकार की चिंतन यह भी है कि वित्तीय भार संतुलित रहे, ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर न पड़े।
क्या वेतन आयोग की रिपोर्ट देर से आए तो बैक पे मिलेगा?
इतिहास कहता है कि अगर आयोग सिफारिशें देर से लागू होती हैं, तो सरकार आम तौर पर रेट्रोस्पेक्टिव बैक पे (arrears) देती है — यानी रिपोर्ट लागू होने के बाद शुरुआती तारीख से लेकर कार्यान्वयन तक का अंतर वैतनिक रूप से भर देती है।
इसका मतलब है कि अगर आयोग रिपोर्ट 2028 में लागू होती है, तो कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से लेकर लागू होने तक के अंतर का भुगतान वापस मिल सकता है, जैसा कि पिछले आयोगों के समय देखा गया है।
8वाँ वेतन आयोग कब लागू होगा?
संक्षेप में कहें तो:
अभी तक 8वें वेतन आयोग के लागू होने की आधिकारिक तारीख नहीं आई है।
आयोग को 3 नवंबर 2025 को ToR मिला और इसके पास 18 महीने रिपोर्ट देने के लिए समय है, जो कि मध्य 2027 तक रिपोर्ट दे सकता है।
रिपोर्ट के अनुमोदन और वित्तीय स्वीकृति के बाद लागू होने की समय सीमा देर 2027 या शुरुआती 2028 लगती है।
सरकार के बयानों के अनुसार तारीख का निर्णय बाद में ही लिया जाएगा, और कर्मचारी तथा पेंशनभोगियों को आर्थिक योजनाओं और फंड के आधार पर प्रभावी तारीख की घोषणा का इंतज़ार करना होगा।
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