150 Years of Vande Mataram: ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल और भारत की सांस्कृतिक धरोहर

150 Years of Vande Mataram: गणतंत्र दिवस भारत का वह दिन है, जब हर साल 26 जनवरी को पूरे देश में संविधान के सम्मान और देशभक्ति के जज्बे के साथ मनाया जाता है। यह दिन न केवल देश की स्वतंत्रता और लोकतंत्र का प्रतीक है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और सैन्य शक्ति का भी अद्भुत प्रदर्शन करता है।

2026 का गणतंत्र दिवस इस बार और भी खास है। इस वर्ष का केंद्रीय विषय है: ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल’। यह थीम इस बार संसद की विंटर सत्र में भी प्रमुख रही और पूरे देश में इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।

‘वंदे मातरम्’ और इसका ऐतिहासिक महत्व:

‘वंदे मातरम्’ भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में लिखा था। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरक स्रोत रहा है और आज भी यह देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति प्यार का प्रतीक माना जाता है।

2026 के गणतंत्र दिवस पर, तेजेंद्र कुमार मित्रा द्वारा 1923 में बनाई गई पेंटिंग्स की श्रृंखला प्रदर्शित की जाएगी, जो ‘वंदे मातरम्’ के छंदों को चित्रों के माध्यम से दर्शाती हैं। ये पेंटिंग्स न केवल कला का अद्भुत उदाहरण हैं, बल्कि देशभक्ति की भावना को भी जीवंत करती हैं।

गणतंत्र दिवस पर राजपथ का आकर्षण:

दिल्ली के कृतव्य पथ (Kartavya Path) पर गणतंत्र दिवस का जश्न हमेशा ही दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है। इस दिन आयोजित राजपथ परेड में भारत की सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है।

परेड में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सांस्कृतिक झांकियां दिखाई जाती हैं, जो भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करती हैं। इस वर्ष की झांकियों और प्रदर्शनों का केंद्रीय विषय ‘वंदे मातरम् के 150 साल’ होने के कारण हर झांकी इस ऐतिहासिक गीत की महिमा को उजागर करती नजर आएगी।

150 Years of Vande Mataram

सैन्य शक्ति और तकनीकी प्रदर्शन:

गणतंत्र दिवस पर भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना अपनी शक्ति और आधुनिक तकनीकी उपकरणों का प्रदर्शन करती है। इस बार की परेड में नवीनतम हथियार, लड़ाकू विमान, टैंक और मिसाइल प्रणालियों का भी प्रदर्शन होगा। यह न केवल देशवासियों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि दुनिया के लिए भारत की सुरक्षा और सामरिक क्षमता का संदेश भी है।

गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि:

इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष श्री एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि होंगे। उनके आगमन से यह कार्यक्रम और भी महत्वपूर्ण बन गया है, क्योंकि यह भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती महत्ता और सहयोग का प्रतीक है।

कला और संस्कृति का संगम:

2026 के गणतंत्र दिवस में न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन होगा, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दिखाया जाएगा। विभिन्न राज्यों की झांकियों में लोकनृत्य, संगीत, हस्तशिल्प और ऐतिहासिक घटनाओं का सुंदर चित्रण किया जाएगा। विशेष रूप से ‘वंदे मातरम्’ की थीम के अंतर्गत इस गीत के ऐतिहासिक महत्व और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को दर्शाने वाली झांकियों को प्रमुख स्थान दिया गया है।

शिक्षा और जागरूकता का संदेश:

गणतंत्र दिवस केवल उत्सव नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति, एकता और राष्ट्रीय पहचान का संदेश भी देता है। इस वर्ष की परेड ‘वंदे मातरम् 150 साल’ की थीम के माध्यम से युवाओं को देशभक्ति की भावना से जोड़ने और उन्हें भारतीय इतिहास और संस्कृति की महत्वपूर्ण जानकारी देने का प्रयास है।

गणतंत्र दिवस 2026 न केवल भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन है, बल्कि यह हमारे राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने का भी प्रतीक है। तेजेंद्र कुमार मित्रा की पेंटिंग्स, रंग-बिरंगी झांकियां, और सैन्य प्रदर्शन इस दिन को यादगार बनाते हैं।

इस परेड के माध्यम से देशवासियों को यह याद दिलाया जाता है कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता संग्राम और लोकतंत्र की नींव कितनी मजबूत है। इस प्रकार, गणतंत्र दिवस 2026 न केवल उत्सव है बल्कि देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी है।

“वंदे मातरम्! 150 साल का गौरव और हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की ज्वाला।”

150 Years of Vande Mataram

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