कश्मीरी व्यंजन गुश्ताबा – दही और मसालों में पका कश्मीर का नाज़ुक कोफ्ता व्यंजन

कश्मीरी व्यंजन गुश्ताबा: कश्मीर की पाक परंपरा में कुछ व्यंजन इतने खास हैं कि उन्हें केवल खाना नहीं बल्कि एक उत्सव माना जाता है। उन्हीं में से एक है गुश्ताबा। इसे कश्मीरी वज़वान (पारंपरिक दावत) का “राजा” कहा जाता है। बड़े-बड़े कार्यक्रमों, शादियों और त्यौहारों में जब तक गुश्ताबा परोसा न जाए, दावत अधूरी मानी जाती है। यह व्यंजन दही की मलाईदार ग्रेवी में बने मुलायम मीट कोफ्तों से तैयार होता है।

कश्मीरी व्यंजन गुश्ताबा
               कश्मीरी व्यंजन गुश्ताबा

इतिहास और परंपरा:

गुश्ताबा का इतिहास कश्मीर की रसोई से गहराई से जुड़ा है। माना जाता है कि यह व्यंजन लगभग 14वीं शताब्दी में उस समय प्रचलन में आया जब कश्मीर पर तुर्क और मध्य एशियाई संस्कृतियों का प्रभाव पड़ा। मध्य एशिया से आए रसोइयों ने मटन को बारीक कूटकर कोफ्ते बनाने की कला सिखाई, जिसे स्थानीय मसालों और दही की ग्रेवी के साथ मिलाकर एक नया रूप दिया गया – यही बना गुश्ताबा

“गुश्ताबा” शब्द फारसी भाषा से आया है – ‘गुश्त’ यानी मांस और ‘आबा’ यानी पानी/रस। धीरे-धीरे यह शब्द बदलते-बदलते “गुश्ताबा” बन गया।

कश्मीरी वज़वान (36 डिशों वाली दावत) में यह अंतिम डिश के रूप में परोसी जाती है। वज़वान में सबसे पहले कबाब और मांसाहारी स्टार्टर दिए जाते हैं, फिर रोगन जोश, तबक माज़, यखनी आदि। और जब अंत में गुश्ताबा परोसा जाता है, तो इसका अर्थ होता है कि दावत समाप्त हो चुकी है। इस परंपरा से इसकी महत्ता समझी जा सकती है।

कश्मीरी व्यंजन गुश्ताबा के लिए आवश्यक सामग्री (4 लोगों के लिए):

कोफ्तों के लिए

  • बकरे का कीमा – 500 ग्राम (बिना चर्बी वाला, ताज़ा)

  • वसा/चरबी (fat) – 50 ग्राम (थोड़ी मात्रा, कोफ्ते को मुलायम बनाने के लिए)

  • अदरक पाउडर – 1 छोटा चम्मच

  • सौंफ पाउडर – 1 छोटा चम्मच

  • काली मिर्च पाउडर – ½ छोटा चम्मच

  • नमक – स्वादानुसार

ग्रेवी के लिए

  • दही – 2 कप (अच्छी तरह फेंटा हुआ)

  • प्याज़ – 2 (बारीक कटी हुई)

  • अदरक-लहसुन पेस्ट – 1 बड़ा चम्मच

  • घी – 3 बड़े चम्मच

  • सौंफ पाउडर – 1 छोटा चम्मच

  • अदरक पाउडर – 1 छोटा चम्मच

  • इलायची पाउडर – ½ छोटा चम्मच

  • तेजपत्ता – 1

  • दालचीनी – 1 टुकड़ा

  • नमक – स्वादानुसार

बनाने की विधि:

1. कोफ्ते तैयार करना

  • सबसे पहले मटन के कीमे को एक बड़े पत्थर या सिल-बट्टे पर लंबे समय तक कूटें। कश्मीरी रसोई में इसे घंटों तक कूटा जाता है ताकि इसका टेक्सचर बेहद मुलायम हो जाए।

  • कीमे में थोड़ा वसा (fat) मिलाकर और कूटें।

  • अब इसमें अदरक पाउडर, सौंफ पाउडर, काली मिर्च और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएँ।

  • हथेली पर थोड़ा तेल लगाकर एकसमान गोल कोफ्ते बना लें।

2. ग्रेवी बनाना

  • कढ़ाई में घी गरम करें और उसमें प्याज़ डालकर सुनहरा भूरा होने तक भूनें।

  • अदरक-लहसुन पेस्ट डालकर अच्छी खुशबू आने तक पकाएँ।

  • अब इसमें फेंटा हुआ दही डालें और लगातार चलाते रहें ताकि दही फटे नहीं।

  • इसमें सौंफ पाउडर, अदरक पाउडर, इलायची पाउडर, तेजपत्ता और दालचीनी डालें।

  • धीमी आँच पर ग्रेवी को गाढ़ा होने तक पकाएँ।

3. कोफ्तों को पकाना

  • अब तैयार किए गए मटन कोफ्तों को धीरे-धीरे ग्रेवी में डालें।

  • ढककर 20–25 मिनट तक धीमी आँच पर पकाएँ ताकि कोफ्ते अंदर तक पक जाएँ और दही-मसालों का स्वाद उनमें समा जाए।

  • ध्यान रखें कि कोफ्ते टूटें नहीं, इसलिए बीच-बीच में हल्के हाथ से चलाएँ।

4. परोसना

  • तैयार गुश्ताबा को गाढ़ी, मलाईदार ग्रेवी के साथ एक बड़े बर्तन में परोसें।

  • इसे गर्म-गर्म बासमती चावल या कश्मीरी रोटी (शीरमाल) के साथ खाने का आनंद लिया जाता है।

पोषण और स्वाद:

  • गुश्ताबा प्रोटीन से भरपूर होता है क्योंकि इसमें ताज़ा मटन का प्रयोग किया जाता है।

  • दही और मसाले इसे पचने में आसान बनाते हैं और ठंडे मौसम में शरीर को ऊर्जा व गर्माहट देते हैं।

  • सौंफ और अदरक जैसे मसाले इसे विशिष्ट कश्मीरी स्वाद प्रदान करते हैं।

सांस्कृतिक महत्व:

गुश्ताबा सिर्फ एक व्यंजन नहीं बल्कि कश्मीर की पहचान है। इसे परोसना सम्मान और मेहमान-नवाज़ी का प्रतीक है। शादियों और खास मौकों पर जब बड़े तामझाम से वज़वान सजाया जाता है, तब गुश्ताबा की उपस्थिति अनिवार्य होती है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही जीवंत है।

गुश्ताबा कश्मीर की पाक कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी रेसिपी जितनी धैर्य और नफ़ासत से तैयार होती है, उतनी ही शान से इसे परोसा भी जाता है। जब आप इस व्यंजन का स्वाद लेते हैं, तो यह केवल स्वादिष्ट खाना नहीं बल्कि कश्मीर की समृद्ध संस्कृति और परंपरा का अनुभव होता है। सच कहा जाए तो गुश्ताबा बिना किसी संदेह के “कश्मीर की शान” है।

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